वहम – डॉ उर्मिला सिन्हा : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi  :  कहते हैं वहम का इलाज हकीम सुलेमान के पास भी नहीं है और सुरेखा तो साधारण मानवी है। पहिरावा, दिखावा से भले ही वह शिक्षित,आधुनिका दिखाई देती है, परंतु बाल्यावस्था से मन में कुछ मनोवैज्ञानिक गुत्थियां अवश्य पाले हुई है।    सुबह जल्दी में थी। गृहिणियों का प्रातकाल वैसे भी बड़ा … Read more

प्रतिज्ञा – तरन्नुम तन्हा

चार दिन बाद घर लौटी तो बीमार माँ की सेवा में लगी फुलटाइम मेड-नर्स, नीना, ने बताया कि माँ बस जूस और सूप ले रही हैं; दलिया तो देखती भी नहीं। “उनकी पसंद का कुछ और बना लेती न!” “बच्चे की तरह जिद पर हैं कि सुहानी के हाथ से ही खाऊँगी,” नीना बहुत होपलैस … Read more

रिश्ता बराबरी का होना चाहिये -प्रीति गुप्ता

दीपाली एक मध्यमवर्गीय परिवार की लड़की है। माता पिता के अलावा एक छोटा भाई है। पिता की छोटी सी सरकारी नौकरी में दोनो बच्चो कि परवरिश अच्छी हो रही थी। देखते देखते समय निकल गया दीपाली ने खूब पढ़ाई करके मेडिकल कॉलेज में एडमिशन ले लिया। अपनी पढ़ाई के साथ एक हॉस्पिटल में पार्ट टाइम … Read more

भीगे पल – विजया  डालमिया

बरसते भीगते मौसम के साथ शिल्पा का मन भी आज ना जाने क्यों भीगता चले जा रहा था। यूँ तो उसने कभी भी मौसम के बदलाव से अपने आप में कोई फर्क कभी नहीं महसूस किया। जिम्मेदारियों को बखूबी निभाते निभाते कितने ही मौसम यूँ ही गुजर गए उसे पता ही नहीं चला। उसकी जिंदगी … Read more

टैग – पुष्पा कुमारी पुष्प

“मम्मी जी के लिए यह साड़ी कैसी रहेगी?..आप जरा देखकर बताइए।” मॉल से कपड़े खरीदती रागिनी ने अपनी सास के लिए एक साड़ी पसंद कर अपने पति राजीव की ओर बढ़ा दिया। “मांँ को हल्के रंग की साड़ी पसंद आती है!.उन्हें गाढ़ा रंग पसंद नहीं।” यह कहते हुए राजीव ने रागिनी को अपनी तरफ से … Read more

वो दबी मुड़ी रोटियां – नीरजा कृष्णा

आज उनके घर में कुछ मित्र रात्रिभोज के लिए आ रहे थे…सब तरह की तैयारियां की गई… रागिनी को इतना भागते दौड़ते देख कर पापा जी का मन भीग सा गया,”अरे बिटिया, तुम बहुत थक जाओगी… हर चीज़ घर में  कहाँ तक बनाओगी… रूमाली रोटी…बटर नान और स्टफ्ड कुलचे बाहर से आ जाऐंगे… सब्जियां तुमलोग … Read more

हमारी छोरी,छोरे से कम ना है – डॉ पारुल अग्रवाल

#बेटी_हमारा_स्वाभिमान कहते है बेटी पराई होती है, पता नहीं किसने ये रीत बनायी। क्या बेटी के पैदा होने में कम समय लगता है या दर्द नहीं होता खैर ये तो हमारे समाज की संकीर्ण सोच है पर मेरे को लगता है कि जब हम हर बात पर आधुनिकता का ढिंढोरा पीटते हैं तो इस बात … Read more

सच्ची श्रद्धा” – डॉ .अनुपमा श्रीवास्तवा

पंडित जी बड़े मनोयोग से पुण्य तिथी का श्राद्ध कर्म करवाने में लगे हुए थे। तर्पण की सारी व्यवस्था ठाकुर साहब के तीनों बेटों ने धूमधाम से कर रखी थी। कोई कमी नहीं रहे इसका उन्होंने खास ख्याल रखा था। पांच प्रकार के पांच पेटी फल,  सूखे मेवे, पांच तरह की मिठाई, और तरह तरह … Read more

सही फ़ैसला – *नम्रता सरन “सोना”* : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi  : सीमा के पैरों तले ज़मीन खिसक गई… घर की छत पंखे की तरह घूमती महसूस हो रही थी। उफ ! ये कैसे मुमकिन है…. क्या ये सच है ?…नही ऐसा नहीं हो सकता…. शायद मुझे कुछ गलतफ़हमी हो रही है…सीमा के मस्तिष्क में हजारों सवाल एक साथ उठ रहे थे। … Read more

ममता का कर्ज़ – कल्पना मिश्रा

“डॉक्टर साहब, जब आप छुट्टी पर थे तब कोई आदमी एक बुढ़िया को यहाँ भर्ती कराकर चला गया है और तबसे आज तक वापस लौटकर ही नही आया। दिक्कत ये है कि वह बुढ़िया अपने बारे में कुछ भी नही बता पा रही है। हमने बहुत कोशिश किया पर भर्ती कराने वाले ने अपना नाम, … Read more

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