सोच – कमलेश राणा

मुग्धा जी बैंक में ऑफिसर हैं,,उनके पति भी अच्छी पोस्ट पर कार्यरत थे,,बड़ा ही प्यारा परिवार था,,दो बच्चे,,एक बेटा और एक बेटी ,, बहुत प्यार था दोनों के बीच,,सुबह ,,,शाम ,,जब भी देखो ,,साथ घूमते या चाय पीते,,कभी बाहर बैठकर गप्पें लगाते नज़र आ ही जाते,, कॉलोनी में सबसे बड़ा अच्छा व्यव्हार था उनका,,,हर समय … Read more

आखिर क्यों  – गोमती सिंह

——रूचि और शानू, दोनों भाई बहनों में सिर्फ दो वर्ष का अंतर था । दोनों एक ही परिवेश में पले बढ़े लेकिन जैसे जैसे उम्र बढ़ने लगा स्वभाव में जमीन-आसमान का फर्क दिखाने लगा ।    ये हमारे भारतवर्ष का प्राकृतिक नियम है कि लड़कियां जैसे जैसे बड़ी होती जाती हैं उनका घर से बाहर … Read more

बिटिया, शर्म या गर्व – नीलिमा सिंघल 

अंकिता का आज सुबह से फिर चीखना चिल्लाना शुरू हो गया था ,,रोज रोज के नाटक से नंदा परेशान रहने लगी थी बचपन से देखती आ रही थी, आज उसने ठान लिया था कि बात करके रहेगी,,घर काटने को दौड़ता था सब के मुहँ फूले रहते कोई किसी से ढंग से बात नहीं करता था,, … Read more

“फ्लाइट ऑफिसर”  – गीता वाधवानी 

सुचिता अपनी एयर होस्टेस बेटी केतकी के विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने का समाचार सुनकर अचेत हो गई थी। उसके पति सौरभ ने तुरंत डॉक्टर को बुलवाया। डॉक्टर के द्वारा इंजेक्शन लगाने के लगभग आधे घंटे बाद सुचिता को होश आया था और वह रोने लगी थी।  रोते-रोते सौरभ से कहने लगी-“आप केतकी को फोन लगाइए … Read more

सेवा का मेवा – उषा गुप्ता

“अरे ,कोई तो सुन लो ,बड़की …मझली …छोटी ,कोई तो आ जाओ।सारे कपड़े गीले हो गए हैं।बदल दो रे।” बिस्तर पर लेटे हुए सासु माँ का बोलना बराबर चालू था। जब कोई नहीं आया तो व्हीलचेयर को घसीटते हुए राजेश बाबू अंदर आए और बोले, “रमा बेटा “ ” पापा ,बच्चों का स्कूल का समय … Read more

कल किसने देखा है – रश्मि प्रकाश

हर साल गर्मी की छुट्टियों में हम बच्चों के साथ कहीं ना कहीं घूमने जाते थे और इस बार  हमने शिमला जाने का प्लान बनाया।  शिमला का नाम आते ही मुझे याद आया कि वहां मेरी कॉलेज की बेस्ट फ्रेंड सुहानी भी रहती है।  मैंने अपने पति से कहा,  “हम शिमला जाएंगे तो  तो मैं … Read more

मेरी पहचान है बेटियाँ  – विभा गुप्ता

  ” कैसे करेंगे तीन-तीन बेटियों की शादी विमल बाबू?दो बेटियाँ कम थीं जो एक और को ले आये।” पड़ोस के मिस्टर वर्मा व्यंग्य से बोले जब विमल बाबू ने उन्हें कन्या-जन्म की मिठाई खिलाई।जवाब में विमल बाबू ने हमेशा की तरह मुस्कुरा दिया।तीसरी पुत्री के जन्म पर उनके रिश्तेदारों ने भी उन्हें और उनकी पत्नी … Read more

 डर पर जीत – लतिका श्रीवास्तव

आज भी ट्रेन लेट होती जा रही थी…..पानी पीने के लिए बॉटल निकाली ही थी कि हाथ से छूटकर गिर गई उठाने के लिए झुकी ही थी कि किसी ने बॉटल देते हुए …..प्रणाम मैम”…. कहते हुए पैर छू लिए तो शमिता चकित हो गई!कौन है ?का स्वाभाविक प्रश्न उसकी आंखों में पढ़ते हुए सामने … Read more

मेरी बेटियां,मेरा अभिमान,मेरा गुरूर – सुषमा यादव

 #बेटी हमारा स्वाभिमान  ,,मेरी सभी कहानियां हकीकत बयां करती हैं,, इसलिए मैं असली नाम और स्थान लिखने से  परहेज़ करतीं हूं,,पर एक बहुत बड़े साहित्य मंच की प्रसिद्ध लेखिका ने लिखा,, आप की सभी कहानियां सच्चाई लिए हुए बहुत ही बेहतरीन रहतीं हैं,, आप बहुत अच्छा लिखती हैं, परंतु यदि आप अपनी कहानियों में किरदारों … Read more

पुनर्मिलन – तृप्ति शर्मा

#बेटी_हमारा_स्वाभिमान आज उसे अनमना सा देख रोहित ने पूछा तो उसने कह तो दिया कुछ नही पर क्या सच मे कुछ नही था। जीवन की भेंट की हुई बहुत सी उथल पुथल के बावजूद बचपन, जवानी के बाद आज उस पड़ाव पर खड़ी थी जहां उसके पास सब कुछ था पर अकेलेपन का डर भी … Read more

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