बड़ी बहू – डॉ बीना कुण्डलिया : Moral Stories in Hindi

अरे राधाऽऽऽ ओ बहुरानीऽऽऽ बेटा कहां हो इसके बिना तो हम बिल्कुल अपाहिज से होकर रह गये हैं…थोड़ा गर्म पानी दे दो बिटिया, सुबह से गले में जकड़न सी हो रही है सोच रही गरारे कर गला साफ कर लेती ।  “ हे भगवान ये बैठे बिठाए क्या मुसीबत गले पड़ आई” क्या कल जाना … Read more

बड़ी बहू – मनु वाशिष्ठ : Moral Stories in Hindi

मैं सूत्रधार, मेरा कोई रूप या आकार नहीं, कहीं भी आ जा सकता हूं, किसी के भी मन की बात जान, बता सकता हूं। और उसे अपनी जुबां दे सकता हूं। आज एक ऐसे ही प्रसंग पर मैं सूत्रधार बन अपनी प्रतिक्रिया दे रहा हूं। पुरुषों! तुम्हारे लिए बहुत आसान होता है ना, महान बनना … Read more

एक मॉ ऐसी भी – एम पी सिंह : Moral Stories in Hindi

बिन बाप की बेटी आशा को मॉ के लाड़ प्यार ने बिगाड़ दिया था। उसकी हर जायज नाजायज जिद पूरी करती थीं। बड़ा भाई मॉ से बहुत कहता कि थोड़ा कंट्रोल करो, कल ससुराल जाएगी तो परेशानी हो सकती है। मॉ बोलती, मैं अपने पैसे खर्च करती हूं, तेरे पेट में क्यों दर्द होता है। … Read more

बड़ी बहू –  सुनीता माथुर   : Moral Stories in Hindi

गायत्री देवी अपने घर की स्थिति से इतनी दुखी हो गईं और घबरा कर प्रेरणा से बोलीं ——–बड़ी बहू मेरी बात ध्यान से सुनो——- तुम अपने बेटे यश को लेकर अपने मायके चली जाओ अपन तो बहुत कर्जे में आ गए हैं! प्रेरणा अपनी सास से बोली—–   मैं– ऐसा नहीं कर सकती अरे मां … Read more

बड़ी बहु दहेज नहीं संस्कार साथ लेकर आएगी   : Moral Stories in Hindi

“भाभी कहो तो अपने अनुज के लिए मेरी भांजी सुमन की बात करूं? लड़की पढ़ी लिखी सुंदर तो है ही साथ ही खूब दहेज भी लाएगी । मेरी ननद को अपना घर परिवार पसंद है इसलिए वरना रिश्तों की कोई कमी नहीं है “ कुसुम अपनी भाभी सरला से बोली “नहीं जीजी कल ही गुप्ता … Read more

दूसरी रसोई – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

माँ, अगर मेरी पत्नी की जगह आपकी बेटी होती तो क्या आपका तब भी  इतनी सी बात पर यही फ़ैसला होता कि एक घर में दो रसोई बना दी जाएँ ?  मुझसे बहस करने की ज़रूरत नहीं है । मैं तो बेटी मानकर इसे घर में लेकर आई थी और बेटी मानकर ही समझाती हूँ … Read more

बड़ी बहू का सबक – रोनिता कुंडु   : Moral Stories in Hindi

अरे दीपिका… हमारा सामान समेटा या नहीं? पूरा कमरा बिखरा पड़ा है, पता नहीं यह क्या कर रही है? आशा जी ने चिल्लाते हुए कहा.. तब तक दीपिका हड़बड़ाती हुई रसोई से आई और अपना पसीना पहुंचते हुए कहा, क्या हुआ मम्मी जी रसोई का सारा काम अब निपटा है, अभी जाकर आपका सामान लगा … Read more

बेटी- बहू में कोई फ़र्क नहीं –  विभा गुप्ता  : Moral Stories in Hindi

 ” डाॅक्टर साहब…अब मेरी बहू कैसी है? डिलीवरी में कितना समय है…।” जानकी जी घबराते हुए पूछने लगीं तो डाॅक्टर साहिबा बोलीं,” बहन जी..मैंने तो आपको पहले ही बताया था कि केस काॅम्प्लीकेकेटड है..।हम माँ और बच्चे, दोनों को बचाने की कोशिश करेंगे..फिर भी अगर एक को ही बचाना पड़े तो..।आप बता दीजिये कि आप … Read more

कामचोर-मनीषा सिंह : Moral Stories in Hindi

 “शोभा के बेटे की शादी” अब तक नहीं हुई !उम्र कम नहीं 40 का हो गया•• परंतु एक भी रिश्ता नहीं आ रहा !शोभा जी की पड़ोसन कमला अपनी सखी शकुंतला से बोली।  हां बहन••! लड़की की शादी में अगर देर  हो जाए तो बात समझ में आती है पर यहां तो शोभा बहन, अपने … Read more

अगर आपकी बेटी होती तो? – मधु वशिष्ठ : Moral Stories in Hindi

——————–         आज मानसी की जगह सीढ़ियों से उतरकर पवन को रसोई की ओर आते देख भावना जी बर्तनों को और जोर-जोर से फेंकने लगी। इससे पहले कि पवन कुछ बोलता भावना जी चिल्ला कर बोली महारानी अभी सो ही रही है। सुबह उठकर सारे घर का काम करना मेरी ही जिम्मेदारी है। उसे पता नहीं … Read more

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