घर दीवार से नहीं परिवार से बनता है – मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

अरे मम्मी आप क्यों झाड़ू लगा रही हो भाभी कहां गई ।घर में घुसते ही निभि ने मां से पूछा ,अरे बेटा आ गई तू गले से बेटी को लगाते हुए रेखा जी ने कहा। अरे क्या बताएं ।अरे ये आपकी उम्र है काम करने की आप क्यों झाड़ू लगा रही थी ।अरे काम वाली … Read more

घर दीवार से नहीं परिवार से बनते हैं – मधु वशिष्ठ

घर दीवार से नहीं परिवार से बनते हैं सुमित्रा गुस्से में वर्मा जी से चिल्ला कर बोली। बंटी का दोस्त और  दीप्ति की सहेलियां भी घर से जा रही थी और दीप्ति उतरा हुआ मुंह लेकर खाने की प्लेटें सिंक में डाल रही थी।        आइऐ आपको वर्मा जी के परिवार के बारे में बताते हैं। … Read more

दान – पुष्पा कुमारी “पुष्प” : Moral Stories in Hindi

“आप मुझे पाँच रुपए उधार दे सकती हैं क्या?” बस का टिकट पंद्रह रूपए का था और उस लड़के के हाथ में उस इकलौते दस के नोट के अलावा उसके बटुए से एक पाँच सौ का नोट भी झांँक रहा था। इधर बस कंडक्टर उसे पाँच रूपए के बदले पाँच सौ का छुट्टा देने को … Read more

#घर दीवार से नहीं परिवार से बनता है – सरिता कुमारी : Moral Stories in Hindi

परिवार के जिस प्रारूप की परिकल्पना की थी कभी आज वो पूर्णतः प्राप्त हो गई है । वर्तमान समय में यह बड़ा ही दुर्लभ कल्पना का तो हकीकत बनना नामुमकिन ही था लेकिन मैं नाउम्मीद नहीं हुई और हमेशा प्रयत्नशील रही । यह काम बहुत कठिन था । हिंसा भड़काना या दिलों में नफ़रत पैदा … Read more

“स्वाति मेरा टिफिन तैयार है क्या”- एकता बिश्नोई : Moral Stories in Hindi

“माँ मेरा नाश्ता लगा दो, मुझे कॉलेज को देर हो रही है।”“मम्मी मेरी यूनिफॉर्म कहाँ रख दी आपने? मिल नहीं रही है  ढूंँढ कर दे दो जरा …।”“बहू एक गिलास पानी देना…दवा खानी है मुझे।”ये उसकी दिनचर्या के वे शब्द  थे जो स्वाति रोज सुनती थी पर पलट कर इनका कोई उत्तर नहीं दे पाती … Read more

संकीर्ण मनोवृत्ति का ज़हर – रत्नापांडे

मिश्रा जी का परिवार तीन पीढ़ियों के इर्द-गिर्द घूमता, रिश्तों की बारीकियों को समझता हुआ एक सामान्य परिवार था। जिसमें सब कुछ बिल्कुल वैसा ही था जैसा आम तौर पर होता है। लड़ना-झगड़ना, प्यार सब कुछ था। सास-बहू के बीच तकरार भी वैसी ही थी जैसी अधिकांश परिवारों में रोजमर्रा की जिंदगी में होती रहती … Read more

सुखमय जीवन – कंचन श्रीवास्तव आरज़ू : Moral Stories in Hindi

——————– खाना परोस कर टाठी पति की ओर सरकाती हुई बेना  हांकते हुए बोली सुनिये ना अब तो बिट्टू की नौकरी भी लग गई तो अब  बिआह करे में काहे की देर ।अरे देख लो कोई सुघड़ लड़की और उसके हाथ पीले कर दो। आखिर कब तक अपने से रोटी बनाई खाई। अधिकतर  तो होटले … Read more

आत्म सम्मान – रत्ना पांडे : Moral Stories in Hindi

रोज-रोज अपने आत्म सम्मान पर चोट सहन करती उर्मिला अपने मन में सोच रही थी कि आख़िर क्यों वह अपने आत्म सम्मान को प्रतिदिन तार-तार होने देती है? क्यों बात-बात पर ताने सुनती है? क्या इस परिवार के लोगों को सम्मान देना सिर्फ़ उसका कर्तव्य है? क्या उनका कर्तव्य कुछ नहीं जो उसे उसके परिवार … Read more

तिरस्कार कब तक – सुनीता माथुर : Moral Stories in Hindi

सुनैना को लगा कब तक तिरस्कर, अपमान और बेज्जती, सहन करनी पड़ेगी!— आखिर मेरा कसूर क्या है? मैंने अपने बच्चे को पढ़ा लिखा कर बड़ा किया और इतने संघर्ष के बाद भी उसकी  पसंद की शादी की जब तक पति जिंदा थे अपने बेटे आकाश को अच्छी परवरिश दी बेटे की नौकरी भी अच्छी लग … Read more

उस जमाने की लड़कियां – रवीन्द्र कान्त त्यागी

सर्दियों का मौसम और गुनगुनी धूंप में बैठकर मूंफली कुड्कूड़ाने का मजा एक फोन ने खराब कर दिया था। शहर के एक बड़े ट्रांसपोर्टर मेरे एक अनन्य मित्र थे। उनका फोन आया कि गुड़गांव (तब यही नाम था) से उनका ट्रक चोरी हो गया है। लछमन यादव नाम का ड्राइवर अभी जॉब पर रखा था। … Read more

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