” एक फैसला आत्म सम्मान का” – पूजा शर्मा : Moral Stories in Hindi

जैसे ही कॉलेज से नताशा घर आई तो उसकी बड़ी बहन गरिमा और उसके पति दोनों बच्चों के साथ आए हुए थे। उसे देखते ही खुश होते हुए बोले तुम्हारे घर के पास ही अपने किसी परिचित के यहां उनके बेटे के नामकरण संस्कार मेंआए थे तो सोचा तुमसे भी मिलते चलें। हमें नहीं पता … Read more

बिजातीय बड़ी बहू – माधुरी गुप्ता : Moral Stories in Hindi

काबेरी जी ने झिझकते हुए अपने बड़े बेटे अजय का नम्बर डायल किया,फोन उनकी बड़ी बहू निकिता ने उठाया, सासूमां की आवाज सुनते ही उसने उनको सादर चरणस्पर्श कहा ,फिर उनकी व ससुरजी की सेहत केबारे में पूछा। हां निकिता ने कहा,जी मांजी बताइए आपने क्यों याद किया आज हम लोगों को वहां सब ठीक … Read more

पहचान – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

मम्मी! मुझे भी रोटी पर मक्खन खाना है । चाची ने मीनू दीदी को मक्खन दे दिया और मुझे नहीं….. कोई बात नहीं गीतू , अच्छा ये तो बता …. तुम्हारे पेपर ख़त्म हो जाएँगे ना आज ? फिर कल तो गीतू मामा के घर जाएगी । जाओ ,  स्कूल बस आने  वाली होगी ।  … Read more

एक फैसला आत्मसम्मान के लिए – डॉ ममता सैनी : Moral Stories in Hindi

सरकारी अस्पताल के धुंधले गलियारों में, राजीव बेचैनी से बैठा हुआ था, अपने फोन को कसकर पकड़े हुए। उस सुबह ही खबर आई थी—उसके पिता, जो उसके लिए सब कुछ छोड़ चुके थे, को लकवा मार गया था। मुंबई में एक प्रतिष्ठित व्यवसायी बनने के बाद, राजीव ने पिछले पांच वर्षों में अपने माता-पिता को … Read more

आत्मसम्मान का निर्णय – डॉ ममता सैनी : Moral Stories in Hindi

गाँव की पगडंडियों पर चलते हुए संध्या के कदम डगमगा रहे थे, लेकिन उसके हृदय में एक अदम्य साहस था। वह जानती थी कि आज का दिन उसकी जिंदगी को हमेशा के लिए बदल देगा। संध्या का विवाह पच्चीस साल पहले अनुराग से हुआ था। अनुराग एक शिक्षित व्यक्ति था, लेकिन समाज के पुराने रीति-रिवाजों … Read more

एक फ़ैसला आत्मसम्मान के लिए – के कामेश्वरी : Moral Stories in Hindi

नलिनी कॉलेज में लेक्चरर थी । उस दिन छुट्टी थी इसलिए कोई हड़बड़ी नहीं थी आदत से मजबूर उस दिन भी उसकी नींद जल्दी ही खुल गई थी । वह उठकर अपने कमरे से बाहर आई तो बादल छाए हुए थे ऐसा लग रहा था जैसे अब बरसने लगेंगे । वह बरामदे में ही एक … Read more

इसके बाद क्या.… – रश्मि झा मिश्रा : Moral Stories in Hindi

पूरे दो साल हो गए थे… अविनाश को अपाहिज हुए… एक हादसे में उसने अपनी दोनों टांगें गंवा दी…व्हीलचेयर पर जिंदगी खींचने को मजबूर अविनाश… अभी सिर्फ 32 साल का ही हुआ था…  तीन साल पहले… बड़ी ही धूमधाम से उसकी शादी अवंतिका से हुई थी… दोनों ने साल भर यहां-वहां घूम कर, खूब मस्ती … Read more

अन्तर्मन की आवाज़ – ऋतु दादू : Moral Stories in Hindi

कुमुद वृद्धाश्रम की संचालिका सुशीलाजी के साथ लॉन में बैठी कुनकुनी धूप का आनंद ले रही थी,उसके डाक्टर बेटी, दामाद हर तीसरे माह  वृद्धाश्रम में आकर यहां रहने वाले लोगो का स्वास्थ्य परिक्षण करते हैं,आश्रम की संचालिका सुशीला देवी कुमुद की सखी हैं, इसलिए कुमुद भी उनके साथ आ जाती है।अचानक कुमुद की नज़र सामने … Read more

माँ मेरी पत्नी की जगह अगर आपकी बेटी होती – पूजा शर्मा : Moral Stories in Hindi

सुबह के 8:00 बजे थे।अभी-अभी बहू सोनाली के पिता की तेरहवीं रस्म में से लखनऊ से मेरठ तक का लंबा सफर करके आए जानकी जी के बेटा बहु बैठे ही थे, उनकी बहू सोनाली अपनी सास के गले लगकर हिचकियों से रोने लगी। जानकी जी उसे सांतावना देती हुई कहने लगी, अरे जाने वाले को … Read more

एक फैंसला आत्मसम्मान के लिए – अमित रत्ता : Moral Stories in Hindi

सावित्री आज दस साल बाद जेल से बाहर निकलती है जैसे ही गेट से बाहर आती है सामने नीली बत्ती वाली गाड़ी उसका इंतजार कर रही होती है। डीएसपी साहिबा और एक लड़की गाड़ी से बाहर निकलती है और आंसुओं से भरी आंखों के साथ सावित्री के सामने खड़ी होकर उसे सल्यूट करके उसके पैर … Read more

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