राखी का रिफंड और मीठी खटास का बंधन –  डॉ० मनीषा भारद्वाज :  Moral Stories in Hindi

राखी की सुबह थी। सूरज की किरणें खिड़की से झांक रही थीं, मानो चांदी के धागों को सुनहरे रंग में रंगने आई हों। लेकिन मिष्टू के कमरे का माहौल उतना उज्ज्वल नहीं था। दस वर्षीया मिष्टू, जिसके चेहरे पर आमतौर पर चावल के दाने जैसी मासूम मुस्कान खिली रहती थी, आज बिल्कुल बादलों से घिरे … Read more

ये बंधन सिर्फ कच्चे धागे का नहीं है

पूरा बाजार रंग बिरंगी राखियों से भरा पड़ा था ।आज सपना बच्चों की बच्चों के लिए राखी खरीदने बाजार गई थी। वहां एक सुंदर सी राखी देखकर उसको हाथ में उठा कर देखने लगी। कितनी सुंदर राखी है ना ,काश ? में भी अपने भाई की कलाई पर यह राखी बांध पाती पर कितनी मजबूर … Read more

सूरत या सीरत – विमला गुगलानी :  Moral Stories in Hindi

   “ अरे जाहन्वी, लगता है तुम्हारे ब्लाक में जो एक खाली फ्लैट था, वहां कोई आ गया है, चलो अच्छा है, रौनक बढ़ेगी” नमिता ने फोन पर कहा।   “ हां, एक औरत दिखी तो थी कल सब्जी वाले ढ़ेले पर, देखने में तो बिल्कुल जाहिल, गंवार सी लग रही थी, पता नहीं कितनी देर सब्जी … Read more

किराएदार -प्रतिमा श्रीवास्तव :

 Moral Stories in Hindi रिटायरमेंट के बाद अशोक जी और सुनिता जी एक छोटे से टाऊन में आकर रहने लगे थे। वक्त के साथ-साथ बच्चे अपने परिवार में व्यस्त और मां – बाप अपनी जिंदगी जीने की जद्दोजहद में लगे थे। शाम के सात बज रहे थे की डोर बेल बजी।डोर बेल भी कभी कभार … Read more

तेरी पत्नी को चढ़ाकर रखा हैं तूने – स्वाती जैंन :  Moral Stories in Hindi

सुधा जी के दो बार ग्लास खटखटाने की आवाज से प्रिया को महसूस हुआ कि शायद मम्मी जी पानी मांग रही हैं !! प्रिया डायनिंग टेबल पर सुधा जी के लिए पानी लेकर पहुंची ही थी कि सुधा जी बोली – पानी लाने में इतना समय लगता हैं क्या ?? मायके से कुछ संस्कार लेकर … Read more

प्यार के साथ सख्ती भी जरूरी है – विमला गुगलानी :  Moral Stories in Hindi

“ माँ, अरविंद की हरकतें दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही है”, ईशा ने अपनी माँ गोमती से कहा।    गोमती को चुप देखकर ईशा समझ गई कि मां कुछ नहीं कहेगी।ईशा ने फिर कहा” माँ, माना कि अरविंद सरपंच का इकलौता लड़का है, और आप उनके यहां खाना बनाने का काम करती हो, और … Read more

भाभी से मायका – बिंदेश्वरी त्यागी :

Moral Stories in Hindi निधि और सोमेश चाय नाश्ता कर ही रहे थे तभी फोन आता है निधि फोन उठाती है और देखकर खुश हो जाती है क्योंकि फोन उसकी रुचि भाभी का था l रक्षाबंधन आने वाला था l फोन उठा कर निधि बोलती है भाभी सब ठीक है सुबह-सुबह कैसी मेरी याद आ … Read more

सदा सुहागन – कंचन श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

अम्मा मनिहारिन आई है ,वो कुछ बोलती की शहर से आई बहुत ने कहा व्हाट्स मनिहारिन ये क्या क्या शब्द आप सब बोलती रहती हैं मेरी तो कुछ समझ में नही आता। दलान में बैठी दादी सास ने मुंह बिचकाया हुं ये क्या जाने रस्मों रिवाज पूजा पाठ तीज त्योहार।इसे तो सिर्फ़ नौकरी करना और … Read more

तोहफा – डॉ० मनीषा भारद्वाज :

धूप की सुनहरी किरणें श्रीवास्तव जी के छोटे से ड्राइंग रूम में चाय की प्यालियों पर पड़ रही थीं। हवा में गुलाब जल और ताज़ा कटे हुए केक की मिठास मिली हुई थी। आज प्रिया का इक्कीसवाँ जन्मदिन था। उसकी माँ, सुधा जी, परदे को बार-बार समेटतीं, बाहर झाँकतीं। “अरे वाह! फूफी जी आ गईं! … Read more

घर दीवार से नहीं परिवार से बनता है -करुणा मालिक :

Moral Stories in Hindi सुरभि की दादी ! इस साल झूला नहीं डलवाया क्या ? हाय क्यूँ ना डलवाती भला ? तुमने ध्यान ना दिया ….रोज़ तो मोहल्ले के बच्चे शाम को झूलने आते हैं, मेला सा लग जाता है । हाँ…. हर साल सावन शुरू होने से दो-चार दिन पहले डलवा देती थी…. अबकि … Read more

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