परसम्मान ही स्वसम्मान – रश्मि सिंह : Moral Stories in Hindi

दफ्तर के खुलने का समय हो चुका है, सब अपने कंप्यूटर्स ऑन कर रहे है । शिशिर-रवि अयोध्या परियोजना से व्यय की जो स्टेटमेंट आनी थी आ गई क्या ? रवि (हँसते हुए)-सर मेल तो आ गया है पर उसमे अटैचमेंट ग़लत लगा दी है ।  शिशिर-उन्हें रिप्लाई कर इन्फॉर्म करो। शिशिर के जाते ही … Read more

बच्चों का इंतजार – जया शर्मा प्रियंवदा : Moral Stories in Hindi

दशहरे की छुट्टियों में बच्चों को साथ लेकर आने का वायदा किया था ,अंकित ने । मिश्रा दंपत्ति बहुत खुश थे। कुछ दिनों के लिए ही सही, घर के एकान्त को चीरने के लिए रौनक आ रही है । बहुत बड़ा घर बनाते हुए ,एक सपना पाल लिया था ,मिश्रा जी ने । दोनों बहुओं … Read more

दिखावा हार गया – जया शर्मा प्रियंवदा : Moral Stories in Hindi

सूरज और किशोर बचपन से ही एक साथ ही खेलकूद कर बड़े हुए। दोनों के ही परिवार शुरू से ही एक दूसरे के सुख दुख में साथ रहते हुए, एक अच्छे पड़ोसी होने का धर्म निभाते रहे । सूरज और किशोर की उम्र बराबर होने के कारण ,दोनों दिनभर एक साथ खेलते रहते । सूरज … Read more

सच्चे रिश्तों की पहचान – सीमा शर्मा : Moral Stories in Hindi

दीपक जी खाना खाकर कुछ देर आराम करने के लिए अपने कमरे में गए ही थे कि अचानक फोन की घंटी बज उठी। उन्होंने फोन उठाया तो दूसरी तरफ से उनके समधी शशिकांत जी की आवाज़ आई। उन्होंने कहा, “कल आपसे एक ज़रूरी मुलाकात करनी है।” यह सुनकर दीपक जी चिंतित हो गए, क्योंकि दो … Read more

रोज रोज का सिलसिला बंद हो – कमलेश आहूजा : Moral Stories in Hindi

रोज रोज का सिलसिला बंद हो ये सिलसिला रोज का होने लगा पूजा की नन्द रेवती आए दिन ससुराल वालों से झगड़कर मायके आ जाती थी। पूजा के सास ससुर व पति उसे समझाने की बजाय और शय देते थे। रेवती शुरू से जिद्दी व क्रोधी स्वभाव की थी। हर समय घर में क्लेश करती … Read more

जेनरेशन गैप – सीमा प्रियदर्शिनी सहाय : Moral Stories in Hindi

कई दिनों से अपराजिता का मूड थोड़ा ऑफ था, यह रियाबहुत अच्छी तरह से महसूस कर रही थी। ना जाने क्यों आजकल वह थोड़ी उखड़ी उखड़ी सी रहती है। अपनी आप से मतलब रखती है और काम से काम और कोई बात नहीं। न कोई हंसी मजाक न कोई चुहल । न जाने क्यों उसकी … Read more

हमारे ख़ानदान में लेने देने की जगह रिश्तों में प्यार हो और अपनापन हो इस बात पर ज़्यादा ध्यान दिया जाता है । – के कामेश्वरी : Moral Stories in Hindi

नरेश जी ने इंजीनियरिंग अंतिम वर्ष में पढ़ रही अपनी बिटिया रजनी से कहा कि बेटा अब तो तुम्हारी पढ़ाई ख़त्म हो रही है मैं और तुम्हारी माँ तुम्हारे लिए रिश्ते देखना चाहते हैं।  तुम्हारी नज़र में वर कैसा होना चाहिए । सुधा ने कहा आप भी उससे क्या पूछ रहे हैं बिल्ली से पूछ … Read more

” ननद” – पूजा शर्मा : Moral Stories in Hindi

मां इतना बड़ा घर कहां है हमारा इस छोटे से फ्लैट में आप बुआ को भी अपने साथ रखने के लिए कह रही हो , आप खुद बताओ कहां रहेगी बुआ? एक कमरा हमारा एक दोनों बच्चों का और एक छोटा सा कमरा आपका, बताओ क्या 1 सदस्य के बढ़ जाने से परेशानी नहीं हो … Read more

बेटी की शादी में तमाशा नहीं – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi

“ सुनते हो आज बड़ी भाभी का फ़ोन आया था कह रही थी हमारी पीहू के लिए उनके एक रिश्तेदार ने पूछा है… वो कह रही थी जो भी निर्णय लो जल्दी बता देना।” दफ़्तर से पति के आते ही कामिनी ने अपनी दबी भावनाओं को उड़ेल दिया  “ अरे पर उन्होंने हमारी पीहू को … Read more

ननद हो तो ऐसी – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

  ” क्यों नहीं खेलेगी रंग…अंशु, चल आ..अपनी चाची पर रंग डाल..पर ज़रा संभल के..कहीं उसकी आँखों में न पड़ जाये…।” पुष्पलता ने अपने दस वर्षीय भतीजे से कहा तो रमा ने घबराकर अपने कदम पीछे कर लिये।रंग खेलने आई महिलाएँ चौंक उठी और आपस में काना-फूसी करने लगीं,” ये कैसी ननद है जो अपने भाई … Read more

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