स्नेह का बंधन – रश्मि वैभव गर्ग : Moral Stories in Hindi

 14 वर्ष की अल्पायु में उसके सिर से पिता का साया उठ गया था। गरीबी इतनी कि 2 जून की रोटी की भी जुगाड़ नहीं। राजन….. जी हां यही नाम था उसका, परिस्थितियां बिल्कुल नाम के विपरीत, हौंसले यथा नाम। पिता की असमय मृत्यु ने अंदर तक झकझोर दिया था उसको, उसका बाल मन समझ … Read more

स्नेह का बंधन – चंचल जैन : Moral Stories in Hindi

“क्यों रूठी हो गुडिया?” “अभी तक बचपना गया नहीं तुम्हारा?” ” कह दिया, बहुत याद आ रही है आपकी। मिलने चले आओ।” ” नेहा, हमें भी तो तुम्हारी याद आती रहती है। तुम्हारी नई-नई शादी हुई है, ससुराल में मन रमाओ अब।” “जंवाई राजा समझदार है। सास ससुर चाहते हैं, तुम घर संभालो।” नेहा शादी … Read more

आओ भैया ! कुछ तुम कहो, कुछ मैं कहूँ – उमा महाजन : Moral Stories in Hindi

कितने बरस हो गए हमें एक साथ आराम से बैठ कर बातचीत किए हुए ! वह बचपन का सरल और निश्छल प्रेम, बात-बात पर झगड़ पड़ना ,एक दूसरे को मारने के लिए अंधाधुंध दौड़ पड़ना और बाबूजी को सामने पा कर शराफत से एकदम ठहर जाना, तुम्हारी किताबों को हाथ न लगाने की सख्त ताकीद … Read more

कांता बाई के केक की मिठास – मनु वाशिष्ठ : Moral Stories in Hindi

लॉक डाउन के बाद कांता बाई का आज काम पर जाना हुआ। अंदर ही अंदर डर समाया हुआ था पता नहीं मालिक काम पर रखेंगे या नहीं। लेकिन कांता बाई को देखकर कोठी वाली मेमसाब की खुशी देखते ही बन रही थी, वो भी थक चुकी थी रोज काम करते हुए, सोच रही थी पता … Read more

स्नेह भरी टिकिया – संध्या त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

हैलो…… बुलबुल का फोन….?  आज अचानक कैसे याद आ गई मेरी तुझे बुलबुल…..? अरे तूलिका… सुन ना ….तू मुझे अपने घर का एड्रेस बता ना जल्दी से…. या लोकेशन भेज…… क्या…..?  एड्रेस ….? लोकेशन  ?  पर तू है कहां….. और इतने हड़बड़ी में मेरा एड्रेस क्यों मांग रही है…? सब ठीक तो है ना…? हां … Read more

सुलोचना मां – गीतू महाजन’ : Moral Stories in Hindi

सुबह से ही व्यस्त सुलोचना जी सारे कामों की निगरानी अच्छे से कर रही थी।बार-बार घड़ी की और देखते उनकी नज़र मेहमानों की लिस्ट पर भी बहुत बार घूम चुकी थी।’कैसे होगा सब’ यही सोचकर उनके हाथ और तेज़ी से कम कर रहे थे।हालांकि..बच्चे कई बार फोन पर कह चुके थे कि उनकी सारी तैयारी … Read more

“अगला जन्म किसने देखा?” – दीपा माथुर : Moral Stories in Hindi

जूही ने खिड़की के बाहर झाँकते हुए गहरी सांस ली। हल्की ठंडी हवा उसके चेहरे से टकराई, पर मन में उठते सवालों की गर्मी कम नहीं हुई। उसने मन ही मन सोचा—क्यों जन्मों की आस लगाए बैठे हैं हम? जब ये जीवन हमारे पास है, तो उसी में खुशियां क्यों न तलाशें? संबंधों की चमक … Read more

ननद भाभी तो सहेलियां होती हैं – प्रतिभा भारद्वाज ‘प्रभा’ : Moral Stories in Hindi

“भाभी!…आप गईं नहीं अभी तक…. मैंने आपसे कहा तो था फोन पर कि आप निकल जाना मुझे आने में देर हो जाएगी….” अंजली ने अपनी भाभी कामिनी से कहा। “अरे तो चली जाएगी….पूरा दिन पड़ा है….तू तो अब आई है सुबह से….अब ऐसे भला अच्छा लगता है कि बहन बेटी घर आएं तो घर की … Read more

संस्कार – राजेश इसरानी : Moral Stories in Hindi

नई नई बहु आई थी हमारे घर में। उसके पति से लेकर सास, नंनद, और घर के सभी बच्चे बहु के आगे पीछे घूम रहे थे। बहु थोड़ी परेशान सी नजर आ रही थी। तो मैने उससे कहा बेटा थोड़ा आराम कर लो अपने कमरे में चले जाओ। नहीं पापाजी ऐसी कोई बात नहीं है। … Read more

स्नेह का बंधन – प्रतिमा श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

राधा और गुंजन का खून का रिश्ता नहीं था लेकिन ऐसा रिश्ता था जो हर किसी के मन में चाहत लाता था कि काश! गुंजन जैसी बेटी ईश्वर सबको देता। गुंजन राधा के घर काम करने वाली सेविका की बेटी थी। बेटे की चाहत में जब चौथी बेटी के रूप में गुंजन का जन्म हुआ … Read more

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