खामोशी की गूंज – हेमलता गुप्ता

सुबह के 6:30 बज रहे थे। अलार्म की आवाज़ से नहीं, बल्कि रसोई में बर्तनों के पटकने की तेज़ आवाज़ से 65 वर्षीय सुमेधा देवी की आँख खुली। उनके सिर में हल्का भारीपन था। कल रात ब्लड प्रेशर थोड़ा बढ़ा हुआ था, इसलिए नींद देर से आई थी। अभी उन्होंने करवट बदली ही थी कि … Read more

कड़वाहट –  शुभ्रा बनर्जी

मुंबई के एक पॉश बैंक्वेट हॉल में झूमर की रोशनी और शहनाई की धुन के बीच मेहमानों का तांता लगा हुआ था। अवसर था ‘आरव’ का अन्नप्राशन संस्कार। आरव, जो शिखा और मयंक का पहला बेटा था, आज मखमल की शेरवानी में किसी राजकुमार से कम नहीं लग रहा था। मीरा अपने पति, आकाश, के … Read more

मेरे बेटे – एम. पी. सिंह.

मैं 65 वर्षीय रिटायर्ड व्यक्ति अपने पुत्र के साथ हॉस्पिटल से निकल कर दवाई लेने मेडिकल स्टोर गया. मेरा बेटा दवाई ले रहा था और दुकानदार मुझे बड़े गौर से देख रहा था. दवाई देने के बाद दुकानदार ने बिल बनाते हुए नाम पूछा, तो बेटा बोला, अर्जुन. दुकानदार मेरी तरफ देखकर बोला, तुम्हारा नहीं, … Read more

नर्स देखभाल कर सकती है बेटी नहीं बन सकती – संगीता अग्रवाल

शाम की धुंधलके में ड्राइंग रूम की खामोशी इतनी गहरी थी कि घड़ी की टिक-टिक भी हथौड़े की चोट जैसी महसूस हो रही थी। सोफे पर बिखरे हुए कपड़ों और गत्ते के डिब्बों के बीच खड़ी मेघा अपनी सांसों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही थी। उसके सामने उसका पति, अनिरुद्ध, हाथ में एक … Read more

अहंकार एक पति का – डॉ पारुल अग्रवाल

कमरे के भीतर से कांच के टूटने की एक तेज और कर्कश आवाज़ आई, जिसके बाद सन्नाटा छा गया। वह सन्नाटा जो शोर से भी ज्यादा डरावना होता है। बाहर बरामदे में बैठे रिटायर्ड प्रोफेसर दीनानाथ जी के हाथ से अखबार गिर गया। उनकी पत्नी, सुमति देवी, जो तुलसी में जल चढ़ा रही थीं, उनका … Read more

रिश्तों का रंग – करुणा मलिक

“पापा, कितनी बार कहा है आपसे कि जब मेरे घर में पार्टी चल रही हो, तो अपने इस गमछे और खादी के कुर्ते में बाहर मत आया कीजिए! मेरे क्लाइंट्स बैठे थे वहाँ। मिस्टर खुराना, जो खुद लंदन रिटर्न हैं, उनके सामने आप हाथ में वो स्टील का टिफिन लेकर आ गए? ‘बेटा लड्डू खा … Read more

सावित्री – गीतू महाजन

शमशान घाट की उस पथरीली ज़मीन पर घुटनों के बल बैठे आर्यन का विलाप वहां मौजूद हर शख्स का कलेजा चीर रहा था। चिता की लपटें आकाश को छूने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन आर्यन की नज़रें सिर्फ़ उस लकड़ी के ढेर पर टिकी थीं, जहाँ उसकी माँ, सावित्री देवी, का नश्वर शरीर पंचतत्व … Read more

आदर्श बहू’ – गीतू महाजन

“सुन रही हो सुमन! देख आरव ने फिर से ड्राइंग रूम में दूध गिरा दिया है। अभी थोड़ी देर में किटी पार्टी की सहेलियाँ आने वाली हैं। अगर फर्श चिपचिपा रहा तो मेरी क्या नाक रह जाएगी? जल्दी आकर साफ कर दे!” सासू माँ कुसुम जी की तीखी आवाज़ बेडरूम के बंद दरवाजे को चीरती … Read more

सीख – सुनीता मुखर्जी “श्रुति “

आराधना की प्रथम पोस्टिंग महानगर में हुई। वह बड़ी-बड़ी इमारतें, मॉल, सिनेमा घर, और पार्क और भीड़ भाड़ देखकर अवाक थी । उसने यह सब टेलीविजन में देखे था। एक छोटे से गांव की बाला …कम उम्र में ही उसका विवाह हो गया।  विवाह के पश्चात उसने पढ़ाई करने की ठानी,और यह संकल्प लिया कि … Read more

स्टेशन से घर तक – एम. पी. सिंह

सन 2025, 26 दि. का दिन मैं शायद कभी भूल नहीं पाउगा. मैं दिल्ली द्वारका मैं रहता हूँ. काम के सिलसिले मैं सहारनपुर जाना हुआ. रात को वापस आने मैं देर होने की आशंका से बाइक को स्टेशन पर पार्क करके ट्रैन से जाना उचित समझा. रात लगभग 2 बजे वापस आकर नई दिल्ली स्टेशन … Read more

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