और वह नहीं गई – शिव कुमारी शुक्ला
उसके पत्रकी प्रतीक्षा में धन्नो ने लम्बे -लम्बे एक,दो,तीन नहीं पूरे चार साल बिता दिए, किन्तु उसका पत्र नहीं आया।राह देखते -देखते उसकी आंखें पथरा गईं ना जग्गू आया ना उसका पत्र। जैसे वहां के वातावरण में जा देशप्रेम की धुन में वह अपने परिवार को ही भूल गया था। बूढ़ी मां और बूढ़ी हो … Read more