नींद के टुकड़े, ख्वाबों के पहाड़ – डॉ० मनीषा भारद्वाज्ञ : Moral Stories in Hindi
रात के डेढ़ बजे।पंखे की घुरघुराहट के बीच बिस्तर तप रहा था। दाहिना घुटना जैसे किसी लोहे की कील से टिका हो। “अरे भगवान… ये गठिया का दर्द तो हजारों की फौज लेकर टूट पड़ा है,” मैं कराहा। पास ही सोई पत्नी सुमन करवट बदली। “फिर नींद उड़ी?” उसकी आँखें नींद से चिपकी थीं, पर … Read more