सहारा – मधु वशिष्ठ

डोर बैल की आवाज सुनकर भाभी बाहर गईं। थोड़ी देर में उनकी चिल्लाने की आवाज सुनकर मैं भी बाहर निकली तो मैंने देखा भाभी बाहर खड़े कुछ सफाई कर्मचारी जैसे दिखने वाले लोगों से जोर जोर से बोल रही थीं।  कहां काम करते हो तुम ? क्या सरकार तुम्हें तनख्वाह नहीं देती ? जब तुम्हें … Read more

सहारा – संजय सिंह।

 रात का समय था ।तकरीबन 10:00 बज रहे थे ।राम पूरा दिन काम करके अपनी थकान को मिटाने के लिए बिस्तर पर लेटा हुआ था। सोने की तैयारी कर रहा था। उसके बिस्तर के सामने एक मोमबत्ती जल रही थी ।उसी की रोशनी सारे कमरे को रोशन कर रही थी।राम मन ही मन में सोचने … Read more

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