रिश्ते अधिकार से नहीं, करुणा से चलते – सिम्मी मल्होत्रा
सविता की तबीयत दिन-ब-दिन अधिक बिगड़ने लगी थी। वह कई दिनों से बस एक ही बात दोहराती रहती—“मेरी बिटिया को देखना है… एक बार उसे देख लूं… बस एक बार।” उस दिन दोपहर के वक्त फोन बजा। नंबर मायके का था। दिल धक से रह गया, लेकिन जैसे ही मैंने रिसीवर उठाया, उधर से भाई … Read more