अपराधबोध – मधु वशिष्ठ

 प्रिया को हमेशा यही महसूस होता था कि घर में कभी छोटी बहू नहीं बनना चाहिए। घर में सबसे छोटी होने के कारण लगभग सारी जिम्मेदारियां प्रिया के सर पर ही आ गई थी। दोनों बड़ी भाभी तो अधिकतर अपने कमरे में ही रहती थी। महाराज के साथ दोनों समय टेबल पर खाना लगवाने की … Read more

बचपन और पढ़ाई – रेखा जैन

“चटाक!” जोर से एक थप्पड़ नेहल ने अपने 3 वर्षीय पुत्र को लगा दिया। “तुमको कितनी बार समझाना पड़ेगा कि सी का मुँह राइट तरफ होता है और डी का लेफ्ट तरफ फिर भी हर बार गलती करते हो। हर बार सी को लेफ्ट की तरफ और डी को राइट तरफ करते हो!”  नेहल अपनी … Read more

अपराध बोध – गरिमा चौधरी 

“देखो नेहा, घड़ी देखो। शाम के आठ बजने वाले हैं और तुम्हारी भाभी का अभी तक कोई अता-पता नहीं है। पूरा दिन निकल जाता है, न घर की सुध है, न सास की। मैं तो कहती हूँ, ऐसी नौकरी किस काम की जो घर के सुख-चैन को ही निगल जाए?” सावित्री देवी ने सोफे पर … Read more

अपराध बोध – संजय सिंह

सुजान पंडित और सूजान पंडिताइन अपने गांव में जानी-मानी शख्सियत  थे ।वक्त बीतने के साथ-साथ उनके घर पर एक पुत्र ने जन्म लिया। बड़े प्यार से उसका नाम बृजेश  रखा । सुजान पंडित और सूजान पंडिताइन ने बड़े प्यार के साथ अपने बेटे बृजेश का लालन-पालन किया। माता-पिता के अधिक लाड – प्यार के कारण … Read more

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