अपराधबोध – सीमा सिंघी 

सुनंदाजी की नजर जैसे ही अपनी बहू मीरा की थाली पर पड़ी । वो थाली की ओर देखते हुए तुरंत कड़क आवाज में कहने लगी। देखो बहू मेरे लिए तुमने शाम के लिए  गट्टे की सब्जी रख दी है ना ?? क्योंकि गट्टे की सब्जी मुझे बहुत पसंद है। अपनी सासू मां की कड़क आवाज … Read more

अपराध-बोध – डाॅ संजु झा

पिछले कुछ वर्षों से विनय जी का मन रह-रहकर व्याकुल हो उठता है।उनके दिल में एक टीस-सी उठती रहती है -“काश!अपनी ग़लती का पश्चाताप करने का अवसर मिल जाता,तो अपराध-बोध से मुक्ति मिल जाती!” विनय जी को पता है कि अब उन्हें पश्चाताप का अवसर कभी नहीं मिलेगा।एक छटपटाहट सदा के लिए उनके दिल में … Read more

अपराध बोध – डाॅ संजु झा

पिछले कुछ वर्षों से विनय जी का मन रह-रहकर व्याकुल हो उठता है।उनके दिल में एक टीस-सी उठती रहती है -“काश!अपनी ग़लती का पश्चाताप करने का अवसर मिल जाता,तो अपराध-बोध से मुक्ति मिल जाती!” विनय जी को पता है कि अब उन्हें पश्चाताप का अवसर कभी नहीं मिलेगा।एक छटपटाहट सदा के लिए उनके दिल में … Read more

मेरी भूल – गीता वाधवानी

 मां सुलभा, बेचैन होकर आंगन में इधर-उधर चक्कर लगा रही थी। कभी थक हार कर कुर्सी पर बैठ जाती थी तो कभी बड़बड़ाने लगती, ” मैं तो इस लड़की से तंग आ चुकी हूं। समझती ही नहीं है, पढ़ाई लिखाई में बिल्कुल ध्यान नहीं देती है। रोज कॉलेज जाती है सिर्फ मस्ती करने और फिर … Read more

अंत – संगीता अग्रवाल

आज वृद्धाश्रम में अपने बेड पर बैठी सविता जी अपनी गुजरी जिंदगी के बारे में सोच रही थी ….कहने को बेटे बहु पोते पोतियों से भरा पूरा परिवार है पर फिर भी कितनी अकेली है वो …पर ये अकेलापन भी तो उन्होंने स्वयं चुना है …या ये कहो कि उनके कर्मों का प्रतिफल है ये … Read more

मॉं मेरे हिस्से आयेगी। – अर्चना खण्डेलवाल

अरे! विभा जीजी आप आ गई , कमल खुशी से बोलते हुए उनके पैर छूने लगा और उनका सामान उठाकर अंदर ले गया, विभा ने मुंह बनाया, अभी तक कमल में अक्ल नहीं आई, ये नहीं शादी का घर है, जरा ढंग के कपड़े पहन लेता, गंवार का गंवार ही रहेगा, पढ़ लिख लेता तो … Read more

अपराधबोध – बबीता झा

आज जब लिखने बैठी, तो अपने साथ हुई घटना याद आ गई, और अपनी कहानी को उसी सांचे में ले गई। मेरी ननद, जिन्हें मैं अपनी मां के बाद उन्हीं को स्थान देती थी, अगर मेरे से कोई गलती होती तो वही समझा देती थी। और मुझे ही क्यों, परिवार के हर सदस्य को जोड़कर … Read more

अपराध – खुशी

नलिनी एक स्कूल में अध्यापिका थी।सुंदर सलोनी जो देखे वो उसे पलट कर जरूर देखता।इतनी सुंदर होने पर भी 30 वर्ष तक उसका विवाह नहीं हुआ।सभी पूछते पर वो क्या उतर देती घर में मां पिताजी थे एक बड़ा भाई विवेक था उसकी पत्नी आनंदी थी पर भाई भाभी अपनी ही दुनिया में मस्त थे … Read more

*अपराध बोध…* – तोषिका

इस *अपराध बोध* को अपने मन से निकाल दो तुम मां, तुम्हारी कोई गलती नहीं थी, ऋषि अपनी मां शांता देवी को सांत्वना देते हुए बोला। लेकिन बेटा… बेटा अगर…अगर मैने वो फैसला ना लिया होता तो आज यह नहीं होता। *2 साल बाद* ऋषि और उसकी मां अब दूसरी जगह शिफ्ट हो गए थे, … Read more

अपराधबोध – मधु वशिष्ठ

 प्रिया को हमेशा यही महसूस होता था कि घर में कभी छोटी बहू नहीं बनना चाहिए। घर में सबसे छोटी होने के कारण लगभग सारी जिम्मेदारियां प्रिया के सर पर ही आ गई थी। दोनों बड़ी भाभी तो अधिकतर अपने कमरे में ही रहती थी। महाराज के साथ दोनों समय टेबल पर खाना लगवाने की … Read more

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