आती रहना – रश्मि झा मिश्रा : Moral Stories in Hindi 

“…बाप रे, इतना घमंड भी अच्छा नहीं छोटी…!” ” इसमें घमंड कैसा दीदी… मैं तो बस अपने मन की बात कह रही थी… तुम्हारे है ही कौन… बेटियां तो ब्याह कर अपने घर जाएंगी… तुम्हारा जो कुछ है, कल को सुरेश और अनूप का ही होगा ना… अब दोनों बहने ब्याह के बाद यहां क्या … Read more

सुखदायक झूठ  -गीता वाधवानी : Moral Stories in Hindi

 अनु रोज दोपहर में 2:15 पर बस स्टॉप पर पहुंच जाती थी। स्कूल बस वही पर उसकी बेटी वेदिका को ड्रॉप करती थी। अप्रैल का महीना चल रहा था और इतनी गर्मी। वेदिका भी पसीने से तरबतर होती थी इतनी चिलचिलाती धूप में अनु ब्लॉक में घर के पास बने छोटे बगीचे में बेंच पर … Read more

वक्त से डरो – अमित रत्ता : Moral Stories in Hindi

लोग कहते हैं कि उस मादा सूयर का श्राप उसके पूरे परिवार को निगल गया था उसके पापों की जो सजा उसे मिली वो कुदरत का न्याय तो था मगर उन निर्दोषों को भी सजा मिली जिन्होंने कोई पाप किया नही था मगर उसके पापों ने उन्हें भी अपना नीबाला बना लिया था। लंबा छोड़ा … Read more

 वक्त का फैर – सुनीता माथुर : Moral Stories in Hindi

विश्वनाथ के घर आज बड़ी खुशियां मनाई जा रही थीं विश्वनाथ की पत्नी शेफाली बहुत खुश थी आखिर खुश भी क्यों ना हो—- उसके पति का मैनेजर की पोस्ट पर प्रमोशन हो गया था।  उनके दोनों बच्चे मीनल और मिहिर बहुत खुश थे अपने स्कूल के दोस्तों को भी पार्टी में बुलाया था विश्वनाथ के … Read more

आज मेरी तो कल तेरी बारी – विमला गुगलानी : Moral Stories in Hindi

    आज मजदूरों की पगार का दिन था। लगभग साल भर हो गया, शहर में इस होटल को बनते । अनगिनत मजदूर , मिस्तरी, बिजली वाले , पंलबर मतलब कि हर तरह के लोग यहां काम कर रहे है। माना कि इतनी सुंदर, गगन चुंबी, आलीशान अट्टालिकाएं बड़े बड़े ईजिनिंयर , आर्कीटेक्ट, सलाहाकार और न जाने … Read more

वक्त से डरो वरना वक्त आपको डरा देगा -प्रतिमा पाठक : Moral Stories in Hindi

सूरज अपनी पहली किरणें शहर की ऊँची इमारतों पर फैला रहा था। सब कुछ रोज़ की तरह ही था ।भागती गाड़ियाँ, जल्दी में लोग, और समय से आगे निकलने की कोशिश में उलझे चेहरे। लेकिन इस सुबह की खास बात थी राघव का चेहरा। शांत, गम्भीर और कुछ सोचता हुआ। राघव, एक सफल व्यवसायी, जिसने … Read more

वक्त से डरो – नीलम शर्मा : Moral Stories in Hindi

संध्या बेटा मुझे कुछ खाने को दे दो। सुबह तुमने बस  दलिया बनाया था, वही खाया था। आज तो तुमने दोपहर का खाना भी नहीं बनाया। मां जी अब मैं दोपहर का खाना नहीं बनाया करूंँगी। सुबह को ही पेट भरकर खा लिया करो। लेकिन बेटा मुझे शुगर है। जिसकी वजह से मैं ज्यादा देर … Read more

वक्त से डरो – खुशी : Moral Stories in Hindi

सीता एक गृहिणी थीं उसके पति पारस सरकारी पानी विभाग में मीटर रीडर थे।जब वो गांव से आए तो उनके पास 4 बर्तन और कुछ ही सामान था। वो एक छोटे से कमरे में रहने लगे।उनके दो  बच्चे थे।पारस बड़ी मेहनत से काम करता तनख्वाह लिमिटिड थी तो खर्चे पूरे नहीं हो पाते थे।कुछ ही … Read more

मुक्ति  – कमलेश राणा : Moral Stories in Hindi

क्या जिंदगी है मेरी? न कभी मन का खाना न पहनना बस सारे दिन काम करते रहो। जो काम हुआ उसकी कभी कोई तारीफ नहीं और भूले से भी अगर बिगड़ जाए तो इतना हंगामा करती हैं ये कि सारे मोहल्ले वालों को पता चल जाये कि आज रागिनी ने यह काम बिगाड़ दिया है … Read more

धनलोभ – अर्चना सिंह : Moral Stories in Hindi

“ईश्वर के लिए #वक़्त से डरो बेटा ! तुम्हारी  दो बेटियाँ हैं वैसे ही तुम्हारी ये बहनें हैं । आज पापा जिंदा होते तो ये दिन न मुझे देखने पड़ते न ही मुझे तुम्हारे आगे घुटने टेकने पड़ते “।  ज्योति ! तुम कुछ बोलो न बहु, समझाओ न विवेक को ,तुम भी तो एक बेटी … Read more

error: Content is protected !!