स्नेह का बंधन – रचना गुलाटी : Moral Stories in Hindi

आज मीरा का मन बहुत बेचैन था। उसे अपनी माँ की बहुत याद आ रही थी। माँ की फ़ोटो हाथ में लेकर वह सुबक रही थी। कमरे के एक कोने में बैठी हुई अपनी माँ को याद कर रही थी। उसकी माँ उसके बचपन में ही उसे छोड़कर भगवान के पास चली गई थी। उस … Read more

अंगारे उगलना – चंचल जैन : Moral Stories in Hindi

परीक्षा के परिणाम घोषित हो गये थे। हमेशा अव्वल आनेवाली विद्या प्रतियोगी परीक्षा में पीछे रह गयी थी। आंसू झरझर बह रहे थे। कितने सपने संजोये थे उसने। कितने अरमान थे माँ के। पापा से बिछडने के बाद माँ बेटी एक दूजे का सहारा, संबल थी।  उसे पता है, माँ अकेली होती है तब खूब … Read more

बेटी होना पाप नहीं – लतिका पल्लवी : Moral Stories in Hindi

माँ, पापा कहाँ है, पूछते हुए दामिनी रसोईघर मे घुसी। अरे! यह क्या कर रही है? बाहर से आकर सीधे रसोई मे घुस गईं, और यह क्या ना प्रणाम ना गले लगना,बस आते ही पापा कहाँ है। पहले मुझसे मिल ले फिर पापा की खोज खबर भी ले लेना।अब दामिनी को अपनी गलती का एहसास … Read more

ताकत – उमा महाजन : Moral Stories in Hindi

  अपने ही घर में उन दरिंदों द्वारा तार-तार कर दी गई अपनी बेटी की अस्मिता पर माँ और बेटी दोनों ही जार-जार रो रही थीं। वहीं पास में बेटी के पिता लाचार एवं असहाय खड़े थे क्योंकि दोनों दरिंदें राजनीति एवं पैसे की दृष्टि से बहुत रसूखदार एवं ताकतवर थे। तीनों ही अपने आप को … Read more

वो अनपढ़ स्त्री – संध्या त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

 बला की खूबसूरत थी वो स्त्री…. सजने संवरने के बाद तो उस पर चार चांद ही लग जाते थे…..हाव-भाव , तौर तरीकों से कोई समझ ही नहीं सकता था कि वो अनपढ़ है ….उसके पास कागज की डिग्रियां जो नहीं थी …! पर वो जिंदगी के समीकरण को खूब समझती थी  …रिश्तो के जोड़ घटाव … Read more

कैसे-कैसे लोग –  विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

 ” सीमा..किसी का फ़ोन आ रहा है..मैं तुमसे फिर बात करती हूँ..।” कहते हुए अंजू ने फ़ोन डिस्कनेक्ट कर दिया।     सीमा की पड़ोसन थी अंजू।दोनों ऊपर-नीचे के फ़्लैट में रहतीं थीं।अंजू अक्सर ही सीमा के घर चली आती और सास-ननद, पति-बच्चे की बातें करती।कभी बहुत प्रशंसा तो कभी बहुत शिकायत।सीमा उसकी बातें सुनती..हाँ- हूँ कर … Read more

“टका सा मुँह लेकर रह जाना” – रंजीता पाण्डेय : Moral Stories in Hindi

आओ आओ , दीनानाथ कैसे हो? बहुत दिनों बाद आये हो, कहा गये थे? मैं कुम्भ नहाने चला गया था।पूरे पंद्रह दिन वही था, बहुत अच्छे  से दिन बिता वहाँ पर। रोज सुबह नहाना , पूजा पाठ ,दिन भर भजन  मज़ा आ गया था । तुम क्यो नही गये  सुभाष ?क्या बोलू, जाना तो चाह … Read more

कल ,आज और कल! – वर्षा गर्ग : Moral Stories in Hindi

 ” पिताजी ! आप फिर आज स्कूल में धोती पहनकर क्यों आये थे? मेरे सभी दोस्त मज़ाक बनाते हैं। इससे तो अच्छा था मुझे किसी हिन्दी मीडियम स्कूल में ही पढ़ने भेजते।” “अरे रे बबुआ! इतना गुस्सा काहे करते हो,अबकी बार शहर से एक पतलून ले आयेंगे और पूरे साहब बनकर स्कूल में आयेंगे, ठीक … Read more

पछतावे के आँसू.. – शीतल भार्गव : Moral Stories in Hindi

रामू की आँखों से नींद कोसों दूर थी ,मन ही मन बहुत पछता रहा था कि काश उसने अपनी माँ की बात मानी होती यह सोच-सोच कर रोज ही रोता रहता । औरपुरानी बातें याद करने लगता ।एक छोटे से गाँव में रामू नाम का लड़का रहता था ।वह एक गरीब क़िसान का बेटा था … Read more

बलि – एम पी सिंह : Moral Stories in Hindi

राजस्थान के कोटपूतली का किरतपुरा शेत्र आज सुर्खियों में हैं। वज़ह, 3 साल की एक मासूम बोरवेल में गिर गई ओर 150 फिट गहराई में फस गई। बोरवेल में गिरने वाले सब बच्चे प्रिन्स जैसे किस्मत वाले नही होते जो अपने माँ बाप से दुबारा मिल सके। प्रिंस के बोरवेल में गिरने के बाद अबतक … Read more

error: Content is protected !!