हमें खेद है ये बोलते हुए लेकिन सीमा अब नहीं रही है, आप सारी औपचारिकता पूरी करके इनके शरीर को यहां से ले जा सकते है, ऐसा कह कर डॉक्टर वहां से चले गए पर रोहन बस वही का वही खड़ा रह गया। उसको यकीन ही नहीं हो रहा था कि उसकी पत्नी, उसकी जीवनसाथी जिसके साथ उसने सात जनम की कसमें खाई थी
अब वो उसको इस दुनिया में अकेले छोड़ के चली गई है। उसे ऐसा लग रहा था कि अब उसके जीवन का मकसद खत्म हो गया है, जिसके चलते वो पहाड़ी के पास आकर खुदकुशी करने चला गया।
*२ महीने पहले*
बधाई हो सीमा तुम मां बनने वाली हो , डॉक्टर ने मुस्कुराते हुए बोला। सीमा जो फूले नहीं समा रही थी कहती है “क्या सच में डॉक्टर, इससे बड़ी खुशी कोई और हो ही नहीं सकती है
मेरे जीवन में” डॉक्टर बोली “मैं समझ सकती हू, मैं भी एक मां हू, पर आपकी हालत नाजुक है तोड़ी तो अपनी सेहत पर और खास तौर पर अपने खान पीन का ध्यान रखना मत भूलना।” सीमा ने जोरो का सिर हा में हिलाया और बोली “जी डॉक्टर”
जब सीमा घर आई तो शाम होने को आई थी और वह सोच रही थी कि रोहन को इतनी बड़ी खुशखबरी कैसे दे।
सीमा, सीमा कहा हो तुम और ये घर में इतना अंधेरा क्यों है? ऐसे बोलते हुए रोहन घर में घुसा ही था कि पीछे से सीमा ने आती ही उसको गले लगाते हुए बोली “रोहन अब हम 2 से 3 का परिवार होने वाले है।”
रोहन ये सुन कर चौंक गया फिर अपने काम में सीधा अपना बैग रख कर वापिस आया और अपनी पत्नी को उठाकर खुशी से घूमने लगा और कहा “ये मेरे लिए अब तक की सबसे अच्छी खबर है,
मैं पापा बनने वाला हू, मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है सीमा।” सीमा बोली “अरे मुझे नीचे उतारिए, मुझे चक्कर आ रहे है।” रोहन बोला “हां हा मैं खुशी के मारे भूल ही गया था।”
घर में खुशी का माहौल था और सीमा फिर फ्रिज से केक लेकर आई और दोनों ने मिलके एक दूसरे का मुंह मीठा किया तभी रोहन ने बोला “आज से तुम कोई भी घर का काम नहीं करोगी,
मैं भी दफ्तर से पैटरनिटी लीव ले लूंगा।” सीमा रोहन की भावनाओं को समझते हुए बोली “रोहन आप अभी छुट्टी मत लीजिए, अभी मैं मैनेज कर लूंगी, बाद में आप लीव के लिए अप्लाई कर देना।”
रोहन ने जिद्द की पर सीमा के आगे उसकी एक भी न चली। ऐसे करके उनके दिन खुशी में गुजर रहे थे कि अचानक से एक दिन किसी का रोहन के पास कॉल आया, जैसे ही उसने फोन उठाया तो एक दम आ परेशान हो कर कड़ा हुआ और लड़खड़ाते हुए ऑफिस के बाहर भागा, सभी उसके संगी साथी उसको देख कर चिंतित हुए पर फिर से अपने काम में व्यस्त हो गए।
रोहन हॉस्पिटल आया वहा उसने डॉक्टर से हांफते हुए अपनी बीवी के बारे में पूछते हुए बोला कि “यहां…यहां…एक…एक सीमा नाम की पेशेंट एडमिट हुई है, वो घर पर फिसल गई थी।” उसको रूम नम्बर पता चला और जब वो वहां आया तो डॉक्टर ने कुछ ऐसा बोल दिया, जिसकी वो सपने में भी उम्मीद नहीं कर सकता था।
डॉक्टर बोले ” हमें खेद है ये बोलते हुए लेकिन सीमा अब नहीं रही है, आप सारी औपचारिकता पूरी करके इनके शरीर को यहां से ले जा सकते है, ऐसा कह कर डॉक्टर वहां से चले गए पर रोहन बस वही का वही खड़ा रह गया। उसको यकीन ही नहीं हो रहा था कि उसकी पत्नी, उसकी जीवनसाथी जिसके साथ उसने सात जनम की कसमें खाई थी अब वो उसको इस दुनिया में अकेले छोड़ के चली गई है। उसे ऐसा लग रहा था कि अब उसके जीवन का मकसद खत्म हो गया है, जिसके चलते वो पहाड़ी के पास आकर खुदकुशी करने चला गया।
जैसे ही वो वहां गिरने लगा था कि उसका हाथ एक बूढ़े आदमी ने उसको पकड़ कर पीछे खींचा और गुस्से में बोला “ये क्या कर रहे हो तुम, अपनी उम्र भी देखी है?”
रोहन बोला “अब मेरे जीने का कोई मतलब नहीं है”
बूढ़ा आदमी बोला “ऐसा मुश्किल भरा दौर सबका आता है बेटा, लेकिन अगर जिंदगी के अभी मज़े नहीं किए तो कब करोगे? एक न एक दिन *बुढ़ापा तो सबका आता है*।
रोहन रोते हुए बोला “सबका नहीं आता बुढ़ापा, सबका आता होता बुढ़ापा तो आज मेरी पत्नी और मेरा होने वाला बच्चा मुझे ऐसे अकेले छोड़ कर इस दुनिया से नहीं जाते।”
वहां पर कड़ा बूढ़ा आदमी सब ध्यान से सुन रहा था, फिर बोला “बेटा मैं समझ सकता हू, मैं भी किसी समय ऐसे दौर से गुजरा था पर इसके चलते हम अपनी जिंदगी तो खत्म नहीं कर सकते ना। आखिर में दुख तुम्हारी पत्नी और तुम्हारे होने वाले बच्चे को ही होगा कि उनकी वजह से तुमने ये कदम उठाया, उस समय मुझे भी यही चीज किसी भले आदमी ने समझाई थी और शायद आज तक मैं जिंदा भी तुम्हे बचाने के लिए ही था। भगवान पर भरोसा रखो सब ठीक होगा।
ये सुनते ही रोहन वहां पर अपना सिर उस बूढ़े आदमी के कंधे पर रख कर फूट फूट कर रोया जैसे पता नहीं कितने सालों का दुख समेत के बैठा हुआ था।
*२ साल बाद*
रोहन ने अनाथालय से एक बच्ची को गोद ले लिया था और अब वो उसकी पूरी तरह से देखभाल करता है, साथ ही उसके आने पर रोहन का संसार पूरा फूलों से भरा बगीचा जैसा हो गया था जिसके चलते उसने अपनी गोद ली हुई बेटी का नाम खुशी रख दिया था और हमेशा उन बूढ़े आदमी का शुक्र गुजार करता है जिनकी वजह से उसको एक नई जिंदगी मिली और उसको खुशी जैसे प्यारी बेटी से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
लेखिका
तोषिका