भाभी.. अब आप जाकर थोड़ा सा आराम कीजिए बाकी का सारा काम मैं देख लूंगी! अरे नहीं दीदी.. आप अपने भाई बहनों के साथ बाहर हंसी मजाक कीजिए, गेम खेलिए ,सिर्फ दो-तीन दिनों के लिए तो आप आई हो उसमें भी आप मेरे साथ में बराबर से काम करवाती रहती हो,
आपका मन नहीं करता सभी के साथ में हंसने बोलने का! करता है भाभी.. बिल्कुल करता है, हम सब बहने गर्मियों की छुट्टियों में इसीलिए तो यहां आती है ताकि एक साथ मिलना भी हो जाए और थोड़ी बहुत मस्ती भी हो जाए, लेकिन भाभी क्या आपको हमारे साथ हंसने बोलने का मन नहीं करता?
हमारे आने के बाद आप हर समय काम में ही लगी रहती हैं, मैं चाहती हूं हमारी इकलौती भाभी भी हमारे साथ बैठे, बातें करें अपने सुख दुख की बताएं! भाभी 5-5 ननदो को संभालना आसान काम नहीं है, किंतु आप फिर भी इतने प्यार से हमें हर तीज त्योहार पर,
और छुट्टियों में बुलाती हैं, हमारा इतना ध्यान रखती है इतना मान सम्मान करती है, यह क्या कम है, और अगर हमने थोड़ी बहुत आपकी मदद करवा दी थी तो क्या हो गया.. हम भी कहीं की महारानियां तो है नहीं, अपने घरों में तो हम इससे कई गुना ज्यादा काम करते हैं,
यहां तो हमारे हिस्से में काम ही कितना आता है? नहीं नहीं दीदी… फिर भी आप जाइए, अगर आपके भैया ने देख लिया तो वह नाराज हो जाएंगे और कहेंगे कि मेरी बहन यहां पर काम करने आती है क्या.? भाभी आपको भाई की चिंता करने की जरूरत नहीं है,
बस आप देखना अब हम भाई को भी कैसे सुधारते हैं! जया भाभी और छोटी बहन नमिता की बातें सुनकर बड़ी बहन रागिनी ने आकर नमिता के कान में कहा…. क्या नमिता… तू भी पागल हो रही है, अरे दो-तीन दिनों के लिए तो हम यहां आए हैं,
उसमें भी तू दिन भर भाभी के साथ घर के कामों में लगी रहती है, भाभी है ना.. सब कर लेगी! क्या दो-तीन दिन को अपनी नंदो को बनाकर खिला नहीं सकती? और काम भी कितना है, और सारे काम के लिए तो काम वाली आती ही हैं, बस खाने का काम ही तो रहता है!
हां दीदी.. पर हम पांच, हमारे साथ एक-एक बच्चा, 10 तो हम हो गए, चार भैया के परिवार में से 14 जनों का रसोई का काम भी क्या काम नहीं होता, बच्चे दिन भर घर में तांडव मचाते रहते हैं सो अलग, क्या हम इतना कर पाते हैं अपने ससुराल में, और दीदी आजकल छोटी-छोटी बातों पर कितनी जल्दी रिश्ते टूट जाते है,
आप क्या चाहते हो कि हमारी भाभी हमें बुलाना बंद कर दें, कभी आए भी तो उनको हम बोझ लगे, आखिर भाभी भी तो इंसान है.. क्या उन्हें थकान नहीं होती? क्या उन्हें हमारे आने से डिस्टरबेंस नहीं होता, लेकिन भाभी कितना हंसती मुस्कुराती रहती हैं,
दीदी क्या यह आपको अच्छा लगेगा कि हमारे आने पर भाभी का मुंह मायूसी से भर जाए और वह हमारे जल्दी से जल्दी जाने की कामनाएं करें! दीदी.. अगर टूटे रिश्ते बचाने हैं तो हमें भी परस्पर एक दूसरे का सहयोग करना ही पड़ेगा, तभी यह रिश्ते बच पाएंगे!
अगर आप ऐसा सोचती हैं की भाभी का काम है बस अपने ससुराल वालों की सेवा करना तो गलत है, ससुराल वालों का भी फर्ज बनता है कि वह भी अपनी बहू की इच्छा का ध्यान रखें, बहु उनके घर में काम वाली नहीं आई है, वह बहु रानी है!
दीदी… हमारे पापा मम्मी के न रहने के बादभी भैया भाभी हमें इतने मनुहार के साथ बुलाते हैं, अगर हम पांचो बहने भी थोड़ा-थोड़ा भाभी की हेल्प करवा दे घर के कामों में, तो भाभी को कितना अच्छा लगेगा, क्या भाभी का हक नहीं है अपनी नंदो के साथ हंसने बोलने का, दीदी आजकल कितनी ही बहुएं ऐसी हैं
जो अपने नंदो को एक दिन भी बर्दाश्त नहीं कर पाती, हमारी भाभी तो इन सबसे अलग है, अगर मैं अपनी कहूं तो मुझे भी कितना बुरा लगेगा अगर मेरी नंद मेरे यहां पर आए और केवल हुकुम चलाती रहे, भले ही मैं उनका ऊपर से आदर सत्कार करूंगी, किंतु क्या मेरे मन में उनके प्रति वह सम्मान रह पाएगा,
तो क्यों ना दीदी… हम छोटी-मोटी ही सही, भाभी की हेल्प करवा दे, जिससे वह हमेशा ही हमें इतने मान सम्मान के साथ हमारे मायके में बुलाती रहे! हां नमिता.. तू बिल्कुल ही सही कह रही है, हम यहां भैया भाभी से मिलने आए हैं, इस घर से मिलने थोड़ी,
भाभी ने हमें कितने प्यार से यहां पर बुलाया है, और हम ही भाभी की अनदेखी करते हैं, नमिता तू सबसे छोटी होकर भी कितनी समझदार निकली, आज से तू देखना हम हमारी भाभी को इतना प्यार देंगे कि वह अपने मायके वालों का प्यार भी भूल जाएगी,
आखिरकार हमारी भाभी जैसा कोई नहीं! औरसच में आधे घंटे बाद तो रसोई का काम तुरंत ही समाप्त हो गया, जिस काम को करने में भाभी को दिन में दो बज जाते थे वह काम आज 12:00 बजे ही संपन्न हो गया, यहां तक की आज भाभी भी सबके साथ-साथ हंस रही थी,
खिलखिला रही थी और भाभी के चेहरे पर थकान की जगह मुस्कुराहट देखकर सभी बहनों को आज सच में बहुत खुशी हो रही थी, बहनों ने अपने भाई को भी डांट दिया की भाई… भाभी इस घर की लक्ष्मी है, तू कभी भी हमारी वजह से उनसे झगड़ा मत करना
क्योंकि ऐसी भाभी और ऐसी पत्नी तो किस्मत वालों को मिलती है, हमारी भाभी तो पारस है जो लोहे को भी सोना बना देती है! और सभी ननदो को अपने टूटे रिश्तों को संभालने का मौका मिल गया! अब वह चार दिन हंसी-खुशी में कैसे निकल गए पता ही नहीं चला,
जब नंदे अपने घर के लिए विदा हो रही थी उस दिन भाभी की आंखों से आंसू रुक नहीं रहे थे, और पांचो नंद भी अपनी भाभी से मिलकर एक असीम आनंद की प्राप्ति कर रही थी जो कि आज से पहले उन्होंने कभी नहीं की थी!
हेमलता गुप्ता स्वरचित
कहानी प्रतियोगिता #टूटते रिश्ते