बैसाखी तब पन्द्रह वर्ष की ही थी जब राम सिंह, मुखिया जी के बेटे ने प्रेम का झाँसा देकर उसका शारीरिक शोषण किया करता था..गर्भ से होने पर उसने शादी का दबाव बनाया तब भी बहाने बनाकर वो शोषण करता रहा..टालता रहा,पाँच माह का गर्भ होने पर वो पढ़ाई के बहाने गाँव छोड़ कर कहीं चला गया..अब बैसाखी के पास कोई उपाय नहीं था।समय बीतता गया..पूरे गाँव में चर्चा का विषय बना रहा.. सभी उसके माता-पिता को कोसते.. दोनों दृष्टि हीन थे..उन्हें बेटी का बढ़ता हुआ शरीर नहीं दिखता था.. गाँव वाले जो सुना जाते, वो सुनते, उन्हें बहुत दुख होता, पर वो कुछ कर नहीं सकते थे। बैसाखी से पूछते, ” बेटा ये लोग क्या कहते हैं?”
वो कहती”नहीं माँ ऐसा तो कुछ नहीं है..मेरी राम सिंह से दोस्ती है , इसलिए गाँव वाले मुझसे जलते हैं!.. राम सिंह शहर पढ़ने गया है, आकर मुझसे शादी करेगा.. फिर हम दोनो मिलकर तुमलोग की देख भाल करेंगे माँ!” माँ चुप हो जाती..बैसाखी वास्तव में माँ बाप की बैसाखी ही थी। वो पाँच भाई बहनों में सबसे छोटी थी। सबों की शादी हो चुकी थी, सभी शहर में रहते थे। महीने में एक बार मनीआर्डर कर के अपनी ज़िम्मेदारी से वो मुक्त हो जाते, कुछ पुस्तैनी ज़मीन थी,बटाईदारी पर खेती करवा कर इनका काम चलता था। माता पिता के देख भाल की ज़िम्मेदारी बैसाखी की ही थी।
बैसाखी का अब पूरा समय हो गया था..वो घर के पास ही कुएँ से पानी भरते वक़्त फिसल कर गिर गई,पड़ोस में गाँव केअस्पताल की मिड वाइफ़ रहती थी, उसने अस्पताल में भर्ती करवा दिया।वहाँ उसने एक कमजोर से बेटे को जन्म दिया.. पर दुर्भाग्यवश एक दिन बाद वो नहीं रहा.. इधर मिडवाइफ़ ने बैसाखी के माता-पिता को कह दिया कि वो कुएँ पर गिर गई थी जिस कारण उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है.. एक दो दिन में वापस आ जाएगी।
बैसाखी अब पच्चीस की हो गई थी। इस बीच राम सिंह ने कभी दर्शन नहीं दिया.. या आया भी हो तो उसे कोई खबर नहीं मिली । पूरे गाँव में उसे सभी नीच कुल्टा कह कर ही सम्बोधित करते! भाई बहन शादी की बात भी कहीं करते तो गाँव वाले ये सब बता कर शादी कटवा देते।एक दिन बैसाखी की बहन अमली के ससुराल के दूर के रिश्तेदार ने एक लड़के का पता बताया, जो एकलौती संतान था,बस थोड़ी मंद बुद्धि का था,पर बहुत धनाढ्य.. खेती बाड़ी अपार सम्पत्ति, पुराना जम्मीन्दार घराना,
लड़के के बाबा राय बहादुर थे..उन्हें बस सुंदर और मैट्रिक पास लड़की चाहिए थी…बस क्या था, बैसाखी की सुंदरता में तो कोई कमी थी नहीं.. राम सिंह के जाने के बाद उसने मैट्रिक की परीक्षा भी पास कर ली थी! भाई बहनों ने कहा “ऐसे भी कौन सी इसकी शादी हो रही है.
. गाँव वाले तो होने नहीं देंगे! इतने धनाढ्य घर में रिश्ता हो जाए तो पूरे परिवार के लिए अच्छा है..” गाँव वाले के लाख भड़काने के बाद भी बैसाखी को लड़के की जानकारी दिए बग़ैर वहाँ उसकी शादी हो गई । शादी सम्पन्न होने के बाद लड़के को बग़ल में ही जनवासे में आराम करने के ख़याल से पहुँचा दिया गया। पर अचानक सुबह चार बजे बैसाखी के घर आकर सोने का बड़ा सा सीता हार दिखाता पूछने लगा ” बैसाखी कहाँ है… माँ ने कहा है हार पहनाना है..” सभी रिश्तेदार भौचक्के रह गये..
ये कैसा लड़का है..बैसाखी को भी तभी समझ में आया कि लड़का मंद बुद्धि का है! ख़ैर , बैसाखी अपने ससुराल विदा होकर आ गई । ससुराल में सभी बहुत प्यार करते..पर पति तो..सिर्फ़ पागलों की तरह उसे चूमता..और अपनी क्षुदा शांत करता… यहाँ भी शारीरिक शोषण.. पर यह पति कहलाने वाला व्यक्ति था.. उसे एक इज़्ज़तदार सुविधा सम्पन्न परिवार मिला हुआ था.. जहाँ सभी उसे हथेली पर रखते थे.. बस उन्हें वारिस चाहिए था…. एक साल के अंदर उसने प्यारे से पुत्र को जन्म दिया..
सास ससुर बहुत खुश.. उन्हें उनका वारिस मिल गया! बड़ी धूम धाम से बच्चे का जन्मोत्सव मनाया गया! ससुर जी ने बड़े प्यार से बैसाखी को बुलाकर कहा ” बेटा तुमने मुझे मेरे ख़ानदान का वारिस दिया है.. तुम्हें मैं इनाम देना चाहता हूँ.. जो चाहो माँग लो!”
” पिताजी, मुझे तो आपलोगों ने सब कुछ दिया है.. अब माँगने को कुछ भी नहीं है..” बैसाखी ।
नहीं… फिर भी.. कुछ माँगो! पिताजी ने कहा!
“पिताजी, मैं पारिवारिक कारणों से मैट्रिक के आगे पढ़ाई नहीं कर पाई.. अगर आप मुझे आगे पढ़ने की इजाज़त दें तो हमें बहुत ख़ुशी होगी!”
बैसाखी ने सर झुकाए धीरे से कहा।
“बिलकुल बेटा…”
दूसरे दिन वहाँ के नामी गिरानी कॉलेज में बैसाखी का दाख़िला करवा दिया गया।
बैसाखी को एक बेटी भी हुई.. सास ससुर को तो मानो जन्नत ही मिल गई हो..बेटे के मंद बुद्धि होने का ग़म तो जैसे वो भूल ही गये हों! बैसाखी के बच्चों को वो सम्भालते.. बैसाखी पढ़ाई करती.. रात में पति की क्षुदा तृप्त करती… वो भी खुश रहता.. घर में ख़ुशियाँ बरस रही थीं…अचानक एक रात उसका पति उसे छोड़कर कहीं चला जाता है..सुबह ससुर जी स्थानीय थाना में सूचना दर्ज कराने जाते हैं,
तब उनके मंद बुद्धि बेटे का शव वहाँ दिख जाता है.. बताया गया कि रात के दो बजे एक ट्रक मार कर भाग रहा था, पैट्रोलिंग पुलिस पार्टी पकड़ कर लाई है! ससुर जी ने शिनाख्त की और सारी औपचारिकताएँ पूरी की।बैसाखी के माँग का सिंदूरी भी जाता रहा..सास ससुर भी बहुत दुखी हुए… पर सब धीरे धीरे सामान्य हो गया.. उनका बेटा तो बैसाखी बनी हुई थी ही..!
बैसाखी ने धीरे धीरे अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल कर ली..इस बीच प्रतियोगिता परीक्षाओं के लिए उसकी उम्र निकल गई थी..पर वो नौकरी करना चाहती थी! उसके ससुर जी ने अपने सम्पर्कों के आधार पर एक एफिलिएटेड कॉलेज में नौकरी लगवा दी। दो साल में वो कंस्टिटुएंट हो गया! अब तो उसकी ज़िंदगी निकल चली… बच्चों की अच्छी शिक्षा रहन सहन का स्तर सब कुछ उच्चस्तरीय हो गया..दोनों बच्चों ने
इन्जीनियरिंग कर लिया…आगे की पढ़ाई के लिए उसने उन्हें अमेरिका भेज दिया ।इस बीच उसके माता-पिता, सास ससुर सभी स्वर्ग सिधार गए! बैसाखी ने सभी ज़िम्मेदारियों को पूर्ण परिपक्वता से निभाया! अब वो अकेली थी..बडी़ सी मिल्कियत की मालकीन.. आत्मविश्वास से दीप्त ओजस्वी रूप…एक एक क़दम उसकी उपलब्धियों की गवाही देते…
उसका बेटा निखिल हार्वर्ड विश्वविद्यालय से एम एस कर आ रहा है… साथ में कलक्टर साहब की लड़की नैन्सी भी है.. दोनों ने साथ ही एम एस किया है.. वो हवाई अड्डे पे खड़ी इन्तज़ार कर रही है… उसके सुरक्षा गार्ड थोड़ी दूर पर खड़े हैं। कलेक्टर साहब भी अपनी पत्नी के साथ आ जाते हैं। तीनों में अंतरंग बातें होती हैं..कलेक्टर साहब और उनकी पत्नी एक साथ बोलते हैं ” मैम, हमलोग मिलते हैं आपके घर पे!”
“जी जी बिलकुल स्वागत है आपलोगों का!”हाथ जोड़ते हुए बैसाखी कहती है! तब तक बच्चे निकल कर आ जाते हैं। निखिल और नैन्सी बैसाखी के गले लगते हैं…फिर चरण स्पर्श करते हैं! दोनों बच्चे कलेक्टर साहब और उनकी त्नी के गले लगकर चरण स्पर्श करते हैं! तभी अचानक बैसाखी ने व्हीलचेयर पे एक बुजुर्ग को देखा… उसे लगा उसने इस व्यक्ति को कहीं देखा है..उसने मस्तिष्क पर ज़ोर देकर याद करने की कोशिश किया…पर याद नहीं कर पाई! निखिल अपनी मम्मी के साथ और नैन्सी अपने माता-पिता के साथ अपने अपने घर आ जाते हैं!
“मम्मा, नैन्सी कैसी लगी आपको?” निखिल अपनी मम्मा के गले में हाथ डालकर उसके गाल चूमते हुए पूछता है…
“बेटा, बहुत प्यारी है..पर वाह्य सुंदरता बहुत अधिक मतलब नहीं रखता बेटे… तुमलोग दोनों एक दूसरे को चाहते हो, एक दूसरे के प्रति जेन्यून हो… ये सबसे महत्वपूर्ण है!” बैसाखी ने बेटे को जवाब देते हुए कहा।
बैसाखी बहुत खुश है…. उसके दोनों बच्चे उच्च शिक्षा प्राप्त कर न्यूयार्क मे अच्छी कम्पनी में कार्यरत हैं..एक महीने बाद बेटे की शादी है…छ: महीने बाद बेटी की भी शादी है.. ईश्वर ने उसे इतना कुछ दिया है… जिसकी उसने कल्पना तक नहीं की थी.. इसी तन्द्रा में डूबी रहती है तभी कोई कॉल बेल बजाता है… इवेंट मैनेजर है…आइये… सभी बातें आज फ़ाइनल कर लेती हूँ.. “मैनेजर साहब.. लड़की के पिता इस ज़िले के कलेक्टर हैं.. आप जानते हो, मैंने सारी तैयारी अपने हाथों में लिया है… कहीं
कोई कमी न रह जाए “ बैसाखी ।
“नही मैम, कोई कमी नहीं होगी,सभी देखते रह जाएँगे!” मैनेजर ।
“वो तो ठीक है.. पर एक बार मैं केटरर से बात करना चाहती हूँ.. मेन्यू या गुणवत्ता के बारे में उनसे बात कर लूँ.. तो हमें तसल्ली हो जाए” बैसाखी ।
“मैम वो तो ठीक है.. पर वो चल नहीं पाते.. व्हील चेयर पे चलते हैं.. इसलिए!”मैनेजर ।
“कोई बात नहीं.. कोई और केटरर देख लीजिए!”
बैसाखी ।
“ठीक है मैम , मैं कल उन्हें लेकर आता हूँ ” मैनेजर ।
दूसरे दिन बैसाखी के घर के सामने एक बोलेरो गाड़ी रूकती है..एक व्यक्ति उतर कर फ़ोल्ड किया हुआ व्हील चेयर उतारता है, फिर दो व्यक्ति मिलकर एक बूढ़े से आदमी.. पूरे सफ़ेद बाल… बहुत कमज़ोर दिखता हुआ, को उतार कर व्हील चेयर पे बैठाता है.. फिर धीरे-धीरे चेयर बढ़ाता हुआ गेट के अंदर आकर कॉल बेल बजाता है..
बैसाखी ने दरवाज़ा खोलकर अंदर आने हेतु इशारा किया… सब अंदर आते हैं…बूढ़े व्यक्ति ने सभी को बाहर जाने का इशारा किया.. वो खड़े होने का प्रयास करता हुआ नमस्ते मैम कहता है..
जवाब में बैसाखी भी हाथ जोड़ती है!
“क्या मैनेजर साहब आपके बेटे हैं राम सिंह ?”बैसाखी ।
“जी नहीं मैम.. मेरी तो शादी ही नहीं हुई.. पढ़ाई किया नहीं…तीस की उम्र में ही लकवा मार दिया..तब से व्हील चेयर पे ही हूँ.. पिता जी ने केटरर का काम शुरू कर दिया था.. वही चल रहा है.. रोटी का जुगाड़ हो जाता है!”राम सिंह ।
अच्छा.. बहुत बुरा हुआ.. बोलते हुए बैसाखी व्हील चेयर को बाहर कर देती है ।
फिर मैनेजर साहब को अंदर बुलाकर कहती है ” आप केटरर दूसरा लेकर आओ मैनेजर साहब।”
स्वरचित
रंजना बरियार