बट्टा – कंचन श्रीवास्तव

चार पैसे क्या कमाने लगी, वक्त ही नहीं मिलता,पास बैठकर हाल चाल पूछने का ,कहते हुए राधा ने श्याम को चाय की प्याली पकड़ाई और बगल में ही बैठते हुए बोली,सुनो- बिटिया अब सयानी हो गई कुछ सोचा, अरे उसके हाथ पीले कर दो वरना उमर बढ़ती जा रही है, आखिर और सब भी तो पड़े हैं अभी , खाली बब्बू की ही तो शादी की है , बाकी सभी की तो जिम्मेदारियां पड़ी हैं।

इस पर उन्होंने कहा हां देख तो रहे हैं कहीं समझ आए तब न।कहते हुए अखबार में अपनी नज़र गडा ली, पर देर तक गडाए न रह सके गौरी का उदास चेहरा उन्हें दिख गया।जो बहुत कुछ सोचने समझने के लिए विवश कर दिया।

हमेशा खिलखिलाने वाली बेटी अगर एकाएक मौन हो जाए तो खटकता तो है ही, खैर जो कुछ उन्होंने महसूस किया वो जब पत्नी से बोले तो वो थोड़ा सकपका गई,मानों जानती सब कुछ हो पर कहें कैसे,डरती थी कहीं वो भड़क न जाए।

तो बोली मुझे क्या पता हम नहीं जानते।

खैर बात आई गई खतम हो गई, और कुछ ही दिनों बाद एक जगह से रिश्ता पक्का होने को हुआ तो गौरी परेशान हो गई,पर करें तो क्या करे।

  जिसे छह साल पहले आई भाभी ने महसूस किया तो पूछा।उसके पूछने पर गौरी ने सबकुछ साफ साफ बता दिया।

और ये भी बताया कि वो उसके ……….।

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जिस पर वो परेशान तो हुई पर हल भी उसे ही ढूंढ़ना होगा ये सोच उसने पहले अपने पति से बात की कि अब जो भी है हम सबको समझदारी से काम लेना होगा , क्योंकि घर की इज्ज़त का सवाल है।

तुम बाबूजी से बात करो।

कि जितनी जल्दी से जल्दी हो सके हाथ पीले करने की तैयारी करें हम सब उनके साथ है गौरी ने लड़का देखा हुआ है ।

इस तरह बात पहले आदमियों के बीच  फिर औरतों के बीच हुई और  घर की बात घर में ही रह गई , ननद की शादी भी हो गई।

आज रेखा बहुत खुश हैं इतनी समझदार बहु पाकर बोलती जरूर नहीं पर वक्त पड़ने पर समस्याओं का हल ढूंढना खूब जानती है।

उसी की सहयोग से तो ये कारज अच्छे से निपट सका।

वरना पैसा भी तो नहीं था इतना कि तत्काल ये काम संभव हो पाता।

सच बहु हो ऐसी 

इज्जत पर बट्टा भी नहीं लगने दिया और पैसे से सहयोग करके इतनी बड़ी शादी भी निपटवा दिया।

कंचन श्रीवास्तव आरजू

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