बंद करो अपना नाटक – हिमांशु  जैन’मीत’ : Moral stories in hindi

इस प्रमोशन के लिए तुम्हें बहुत बधाई हो रेवती।

पूरा हाल तालिया की गड़गड़ाहट से गूंज उठा ।रेवती ने मुस्कुराकर सब की बधाइयों का जवाब दिया।

लेकिन आने वाले कार्यभार से की चिंता से अपने आप सराबोर पाया।

अपना काम निपटाकर ऑफिस से जब घर पहुंची तो देखा सारा घर ठीक वैसा ही है जैसा कि सुबह छोड़कर गई थी। सासू मां अपनी हमउम्र सहेलियां में व्यस्त थी और बेटी की आया उसे संभालते संभालते पस्त हो गई थी।

उसे देखते ही बेटी किलक कर उसके पास आई और उसकी गोद में समा गई ।

रेवती का मन हुआ आज ही नौकरी छोड़ दे।

क्यों अपनी बेटी को अपने आप से दूर रखे?

क्यों उसे अपने प्रेम से वंचित रखे।

लेकिन वह जानती थी कि उसकी नौकरी छोड़ने की बात करते ही घर में एक तूफान आ जाएगा ।

सासू मां ने जैसे ही उसके हाथ में गुलदस्ते वगैरह देख तो एक तिरछी नजर पूरे घर पर डाल व्यंग्य से मुस्कुरा उठी और पुनः अपनी हम उम्र सखियों में व्यस्त हो गई ।

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लगभग एक घंटे बाद राहुल को घर आना था ।

रेवती ने एक कप चाय पी और लग गई अपने घर की व्यवस्था को संभालने लगभग पौन घंटे में उसने घर को व्यवस्थित किया और बेटी को नाश्ता लेकर खिलाने बैठे ही थी कि अचानक सास में बोली – अरे रेवती तुम क्यों परेशान हो रही हो? 

लाओ इसे मैं खाना खिला देती हूं ।

तुम जाकर हाथ मुंह धोकर कपड़े बदल लो।

रेवती को लगा चलो अब तो सासु मां को मेरी सुध आई।

 रेवती ने  बेटी का खाना उनके हाथ में देते हुए राहत की सांस ली ।

 लेकिन 15 20 मिनट बाद जब फ्रेश होकर बाहर आई तो देखा कि राहुल अपनी बेटी को खाना खिला रहा है और सासू मां उसके पास बैठी न जाने क्या-क्या बोल रही हैं।

उसे समझ ना आया कि वह क्या करे।

 कहां तो वह चाहती थी कि राहुल से अपनी खुशी साझा करेगी और कहां राहुल की अपने पर चढ़ी त्योरियां देख उसका मन ही खराब हो गया।

ऐसा आज नहीं हो रहा था बल्कि कई बार इस स्थिति का सामना रेवती कर चुकी थी लेकिन हर बार टाल जाती पर आज कुछ ज्यादा ही व्यथित हो गई थी।

राहुल के हाथ से प्लेट लेकर उसने बेटी को खिलाना चाहा तो राहुल ने उसका हाथ झटक दिया और वही कुटिल मुस्कान सासू मां के चेहरे पर छा गई

 रेवती ने जैसे तैसे रात का भोजन तैयार किया और बिना खाए ही आकर सो गई

सुबह फिर वही दिनचर्या थी और शाम वही आलम था। अब तो उसे तकलीफ भी कम होने लगी थी।

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लेकिन आज उसने निश्चय कर लिया था कि वह अपनी समस्या का समाधान अवश्य करेगी।

आज फिर वही हुआ लेकिन आज उसने सबसे पहले  घर आकर अपने आप को व्यवस्थित किया और उसके बाद घर को व्यवस्थित किया ।

साथ ही दो कप चाय चढ़ा कर नाश्ता प्लेट्स में लगाकर अपनी बेटी को कुछ खिलाने के लिए बैठी तभी अचानक सासू मां ने फिर वही राग अलापा, लेकिन रेवती ने कहा कोई बात नहीं मां…मैं खिला दूंगी आप चिंता न करें। 

बेटी को लेकर वो किचन में आ गई और चाय देखने लगी। जैसे ही राहुल आया आज मां की त्योरियां ज्यादा ही चढ़ी हुई थीं, शिकायती लहजे में बोलीं मैं तो रिनी को खिला ही रही थी कि उसे उठाकर किचन में ले गई…

जैसे ही राहुल उससे कुछ कहने को हुआ रेवती झल्ला कर बोली बस करो मां बंद करो अपना नाटक…

राहुल की ओर देखते हुए रेवती बोली — शायद मां को पता नहीं कि आज मैंने अपना कैमरा हाल में लगा दिया था।

सच क्या है तुम ख़ुद ही देख लो…

मां की शिकायत मैंने कभी तुमसे नहीं की… लेकिन आज मेरे बर्दाश्त की हद हो गई…

अब मां के पास कहने को कुछ नहीं था..

राहुल भी चुपचाप अपने कमरे में चला गया..

हिमांशु  जैन’मीत’

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