बहू भी अब हमारे परिवार का अहम हिस्सा है – ज्योति आहूजा

गौरव और नलिनी दोनों की अरेंज मैरिज थी। गौरव एक इंजीनियर था। पढ़ा लिखा स्मार्ट और गुड लुकिंग था। उसके अपनी शादी को लेकर कुछ अरमान थे। उसे भी अपनी तरह पढ़ी लिखी लड़की चाहिए थी। जो देखने में भी अच्छी हो और सुंदर भी हो।
पर गौरव के पिताजी भानु लाल अपने दोस्त घनश्याम दास जी की बेटी से गौरव का रिश्ता करना चाहते थे। गौरव भी एक दो बार घनश्याम दास जी के परिवार से मिल चुका था। उसने नलिनी को पहली बार वहीं देखा था। पहली नजर में नलिनी उसे विशेष पसंद नहीं आई थी।
एक दिन घनश्याम दास जी ने भानु लाल जी के पूरे परिवार को रात के खाने पर बुलाया। और बातों ही बातों में घनश्याम दास जी ने भानु लाल जी से गौरव और नलिनी की शादी की बात कर डाली। भानुलाल जी तो पहले ही इस रिश्ते से खुश थे।
घर आकर उन्होंने अपनी पत्नी रमा और बेटे गौरव से कहा “मुझे घनश्याम दास जी की बेटी नलिनी अपने गौरव के लिए पसंद है। इन दोनों की शादी करवा देते हैं। लड़की बी.ए पढ़ी हुई है। घर के कामों में भी निपुण है। हमारे घर में आकर जल्दी ही घुल मिल जाएगी।
पर गौरव को नलिनी इतनी पसंद नहीं थी। उसे पढ़ी-लिखी अपनी बराबरी की, नौकरी करने वाली खूबसूरत लड़की चाहिए थी। उसने अपने पिताजी को कहा।”पापा मुझे इस लड़की से शादी नहीं करनी है। मुझे अपनी पसंद की लड़की से शादी करनी है। जो मेरे साथ उठती बैठती अच्छी लगे और नलिनी को मैं इस हिसाब से अपने उचित नहीं समझता।



“पर पिताजी के आगे गौरव की एक नहीं चली। और आखिरकार गौरव और नलिनी की शादी हो गई।
“शादी की रात को ही गौरव नलिनी से अनजान की तरह व्यवहार करने लग गया। उसने उस से ढंग से बात तक नहीं की। नलिनी को समझ ही नहीं आ रहा था कि गौरव ऐसा क्यों कर रहा है।
“शादी के अगले दिन भी सुबह से ही गौरव उसे इग्नोर करता रहा। और हल्का फुल्का नाश्ता करके अपने काम पर चला गया।
उदास मन से नलिनी ने अपनी सास रमा जी को पूछा!

” क्या बात मम्मी जी मुझसे कोई गलती हुई है क्या? कल ही हमारी शादी हुई है। और उन्होंने मुझसे एक मिनट की ढंग सेबात भी नहीं की है ।क्या बात है? कुछ हुआ है क्या?

तभी सास ने बोला।”कुछ नहीं बेटी! बस ऐसे ही। शादी वाला घर है ना। खूब काम के चक्कर में थकावट हो गई होगी। दो-तीन दिन में सब ठीक हो जाएगा। तू चिंता मत कर।
“थोड़े दिन और बीत गए। आखिरकार बहुत जोर जबरदस्ती करने पर गौरव ने नलिनी को पूरी बात बता ही दी। और कहा कि वह इस शादी से खुश नहीं है।
उसने कहा। “मुझे अपने बराबर की पढ़ी- लिखी, कमाऊ लड़की चाहिए थी जो स्टेटस में मेरे बराबर हो और तुम अपने आप को देखो। आज के जमाने में सिर्फ बी. ए पास हो। क्या हुनर है तुम्हारे पास?
अपने पति की इस तरह की कड़वी बातें सुनकर नलिनी का दिल भर आया।
उसने अपने पति से कहा। “क्या सिर्फ अच्छी पढ़ाई- लिखाई ही स्टेटस बनाती है। माना मैं बीए पास हूं। पर मुझ में भी कुछ कर दिखाने की ललक है। मैं खाना बहुत अच्छा बनाती हूं। मुझे पेंटिंग्स बनाने का भी शौक है। मैं सिलाई कढ़ाई बुनाई सब बहुत अच्छे से जानती हूं। हर इंसान में कोई ना कोई गुण अवश्य होता है।
और एक बात अगर इतना ही शादी करने का मन नहीं था तो क्यूँ पिता जी को नहीं कहा? क्यूँ नहीं मना पाए उन्हें? मुझे क्यूँ ताना मार रहे हो?



इतने में गौरव कहता है “जिस दिन कुछ करके दिखाओ गी उस दिन मानेंगे। हाल फिलहाल के लिए अपना मुंह बंद रखो। अब जाओ यहां से। मुझे बहुत काम है।
रोती कोई नलिनी ने कमरे से बाहर निकलते निकलते पति को जो शब्द कहे वह मात्र कोरे शब्द नहीं थे। वह एक स्त्री के अंतर्मन से निकले हुए सुनहरे शब्द थे । नलिनी ने कहा था।” कोई बात नहीं पति महाशय। मेरे भी दिन आएंगे। और जल्द ही आएंगे।
“कहते कहते नलिनी कमरे से बाहर निकल जाती है।
“गुस्से में बड़ बढ़ाता हुआ गौरव भी अपने काम में लग जाता है।
“कुछ दिनों के बाद रविवार का दिन था। गौरव अपने कमरे में बैठा हुआ अखबार पढ़ रहा था ।अखबार में अपनी पत्नी की तस्वीर देखकर वह चौक जाता है।।कमरे से बाहर आकर जोर-जोर से सब को बुलाने लगता है।

“नलिनी मम्मी -! कहां हैं आप सब लोग।
“अरे क्या हुआ? बता तो सही। गौरव की मां ने कहा।
यह देखो अखबार में नलिनी की मेन कवर पर फोटो आई है। और कुछ पेंटिंग्स दिखाई दे रही है।पूरी बात बताओ मामला क्या है?
इससे पहले की नलिनी कुछ कह पाती। गौरव की मां ने कहा। “जिस दिन तूने नलिनी से रूखे पन से बात की थी। मैंने तुम दोनों की बातें सुन ली थी। मैंने नलिनी को उसके हुनर को लोगों तक पहुंचाने के लिए , और खासकर तुझे दिखाने के लिए कि केवल पढ़ाई- लिखाई या नौकरी करने वाले ही कामयाब नहीं होते। हुनर- हुनर होता है चाहे वह खाना बनाने का हो सिलाई- कढ़ाई का हो ,पेंटिंग का हो या कुछ और।



” जब तू ऑफिस चला जाता था। तब पीछे से नलिनी मेरे साथ काम में हाथ बंटाती और खाली समय में बैठकर पेंटिंग करती। मैंने मेरी बहु का पूरा साथ दिया। आखिर अब हम ही उसका परिवार है।

“एक दिन मेरी सहेली घर में आई और उसने नलिनी की पेंटिंग्स देखी। उसे पेंटिंग इतनी पसंद आई कि उसने खरीद ली। और इनकी और इसकी फोटो लेकर अपने पास रख ली। लगता है यह पेंटिंग किसी फोटोग्राफर के पास चली गई। या हो सकता है उसी ने दी हो और आज अखबार में आई है।
” देख तेरी पत्नी रातों- रात फेमस हो गई है। आजकल सोशल मीडिया का ज़माना है बेटा तू ही कहता था ना।
तूने उसका साथ देने की बजाय उससे पहले दिन ही इस तरह से व्यवहार किया। ये तूने ठीक नहीं किया।

“अपनी मां की ऐसी बातें सुन गौरव का सिर शर्म से झुक जाता है। वह झुकी नजरों से अपनी पत्नी नलिनी की तरफ देखता है जैसे माफी मांग रहा हो । निशब्द सा हो गया था वह।
आपको यह कहानी कैसी लगी।
इंतजार में।
ज्योति आहूजा।

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