बुढ़ापे का सहारा, बहु! – लक्ष्मी त्यागी
दीप्ती जी ,बहुत दिनों से बिमार थीं ,उनकी बहु ऋचा ने अपनी सास की खूब सेवा की एक बार को तो उन्हें लग रहा था ,अब वो नहीं बचेंगी किन्तु बहु ने अपने व्यवहार और सेवा से उन्हें बिस्तर से खड़ा कर दिया। उसका व्यवहार और उसकी सेवा देखकर कई बार उनकी आँखों में आंसू … Read more