बुढ़ापे का सहारा, बहु! – लक्ष्मी त्यागी 

दीप्ती जी ,बहुत दिनों से बिमार थीं ,उनकी बहु ऋचा ने अपनी सास की खूब सेवा की एक बार को तो उन्हें लग रहा था ,अब वो नहीं बचेंगी किन्तु बहु ने अपने व्यवहार और सेवा से उन्हें बिस्तर से खड़ा कर दिया। उसका व्यवहार और उसकी सेवा देखकर कई बार उनकी आँखों में आंसू … Read more

दहेज में सम्मान और प्रेम – प्रतिभा भारद्वाज ‘प्रभा’

आज विनीता और निखिल बहुत खुश थे आखिर हों भी क्यों न…आज वह अपने बेटे विवान के लिए सुरभी को जो देखकर आए थे और वह उन्हें और उनके बेटे को पसंद भी आ गई…विवान और सुरभि की जोड़ी बिल्कुल ऐसी लग रही थी जैसे राम सीता की जोड़ी, रंग रूप, योग्यता सभी कुछ तो … Read more

तेरी छाँव रहे – रवीन्द्र कांत त्यागी

सत्तर की उम्र आते आते श्रीनिवास जी की जिंदगी का एक रूटीन बन बन गया था. सुबह शौच आदि से निवृत होकर गाय की सानी पानी करना. दूध दुहकर घर चले जाना और चूल्हे के पास धनवंती से बतियाते हुए दो ग्लास गुड़ की चाय पीना. फिर अपने बँटाई पर दिये खेतों का एक चक्कर … Read more

“बुढ़ापे का असली सहारा न बेटा न बेटी बल्कि बहू होती है“ – सोनिया अग्रवाल 

” अरे वाह बेटा क्या सब्जी बनाई है, बिल्कुल मेरी मां के हाथ के स्वाद की याद आ गई । जब से तुम्हारी सास इस घर में आई तो मां को कभी कोई कार्य ही नहीं करने दिया। आज तुम्हारे हाथ की सब्जी बिल्कुल मां के हाथ के खाने की याद दिला गई।” ससुर रमेश … Read more

रिश्ते अहंकार से नहीं त्याग और माफी से चलते हैं – मंजू ओमर 

आज बेटे के घर से वापस आते वक्त संध्या के गले से लगाकर सौम्या रो पड़ी, मम्मी मुझे माफ कर दो , मम्मी मैंने आपका बहुत दिल दुखाया है।आप मुझसे बात करो , मुझे अच्छा नहीं लगता आप बात नहीं करती तो। संध्या जी का मन थोड़ा पसीज गया और कह उठी ठीक है पुरानी … Read more

चौथी बेटी – परमा दत्त झा

अरे रमेश बाबू अब आप खतरे से बाहर हैं।आप सभी से मिल सकते हैं।-यह डा मिश्र बंसल के थै जो रूटीन विजिट में आये थे। मैं कहां हूं, मुझे क्या हुआ था -ये अकचका गये। आपको सिरियस हार्ट अटैक आया था और आप अस्पताल में भर्ती हैं।परसों आपकी बायपास सर्जरी हुई है।-डा उन्हें समझाते बोले। … Read more

बाँझ – रीतू गुप्ता

“संध्या,संध्या जल्दी आओ यार… डॉक्टर के पास जाना है ना आज…सारे टेस्ट होने है ना आज  … भूल गई क्या?”~ तैयार होते हुए मेहुल बोला। संध्या~ “आ रही हूं जी।” संध्या और मेहुल की शादी को 5 साल हो गए थे । दोनों के कोई औलाद नहीं थी। आज डॉ. के कहने पर सभी टेस्ट … Read more

रिश्ते – शालिनी दीक्षित

डॉक्टर की क्लीनिक में बैठे हुए मनीषा की नजर दूसरी तरफ बैठे हुए एक इंसान पर पड़ी, दुख और टेंशन में भी उसके चेहरे पर चमक सी आ गई लेकिन वो सोच में पड़ गई क्या ये सच मे अनुराग है? पहचान पाना मुश्किल हो सकता है क्योकि करीब करीब 25 साल हो गए उस … Read more

“कठोर शब्दों की पीड़ा ” – कमलेश आहूजा

“क्या इसी दिन के लिए तुम्हें इतना पढ़ाया लिखाया था,कि तुम अपने पिता को समझाओ क्या गलत है?क्या सही?मैं मर जाऊँ तो मेरा मुँह भी मत देखना।” पिता के मुँह से ऐसे कठोर वचन सुनकर नेहा बहुत रोई।उसकी गलती सिर्फ इतनी थी,कि वो अपने पापा को ये समझा रही थी..माँ को परेशान ना किया करें … Read more

एक आंख ना भाना – विनीता सिंह

रमेश एक छोटे शहर का लड़का था उसने बड़ी मेहनत की मुंबई में एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी प्राप्त कर ली। वह दिन रात मेहनत करता जिससे उसकी कंपनी ऊंचाईयों को छूए। यह सब देख कम्पनी के मालिक अनूप सेठी जी रमेश के काम से खुश थे उन्होंने रमेश की ईमानदारी और मेहनत देखते हुए … Read more

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