निरादर – सुदर्शन सचदेवा
देखो ज़रा, ये वही हाथ हैं जो कभी बेटे के लिए खिलौने खरीदते थे, और अब मोबाइल पर ऑर्डर पैक कर रहे हैं। ज़िंदगी का नाम है बदलना, लेकिन आज सविता को महसूस हुआ — बदलाव सबसे मुश्किल तब होता है, जब वह अपने ही बच्चे की नज़रों में करना पड़े। सुबह बेटे आर्यन ने … Read more