दिखावे से परे – ज्योति आहूजा 

मुंबई की एक बड़ी और चमकदार सोसाइटी में राहुल और नेहा रहते थे। शादी को उन्हें दो साल हुए थे। दोनों नौकरीपेशा थे—राहुल एक मल्टीनेशनल कंपनी में मैनेजर और नेहा एक प्राइवेट फर्म में मार्केटिंग प्रोफ़ेशनल। सुबह जल्दी निकलना, दिनभर काम की दौड़ और रात को थके-हारे लौटना उनकी दिनचर्या थी। कई बार तो ऐसा … Read more

झूठ दिखावे से जिंदगी नहीं चलती – विधि जैन : Moral Stories in Hindi

सुनील बहुत तेज चिल्ला रहा था आंखें गुस्से में बहुत लाल हो चुकी थी चेहरा उखड़ गया था । तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग बाहर निकल आए थे उन्हें ज्ञात नहीं हो रहा था कि सुनील इतनी जोर-जोर से क्यों चिल्ला रहा है । दूसरी ओर शिखा सुनील कि गुस्से को और बढ़ा रही … Read more

साजिश – डाॅ संजु झा : Moral Stories in Hindi

कभी-कभी मनुष्य भावनाओं में इतना बह जाता है कि अपना करीबी रिश्तेदार  ही  उसके खिलाफ साजिश रचता है और वह उसी को अपना हितैषी समझ बैठता है, परन्तु  जब  वही  व्यक्ति अपनी साजिश से उसे सदा के लिए किसी मरूस्थल के सूखे और प्यासे पेड़ की तरह ठूॅंठ बनाकर चला जाता है,तब उसकी ऑंखें खुलती … Read more

ग्रहण – श्वेता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

“रानो,रानो बहू कहाँ हो? सुनो तो जरा |” विमलादेवी सत्संग से आकर अपनी बहू रानो को खोज रही थी | “यहीं हूँ,माँजी” चाय लेकर आते हुए रानो ने कहा | दोनों चाय पीने लगी | चाय पीते-पीते विमलादेवी ने कहा “रानो परसों सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक सूर्य-ग्रहण है | इस बीच … Read more

साज़िश – के कामेश्वरी : Moral Stories in Hindi

वाहहह प्रियंका तुमने तो बहुत बढ़िया साज़िश रच दी ……अपने पियक्कड़ भाई के साथ मानवी की शादी करा दी ……. तुम्हें पता था ना कि तुम्हारा भाई कैसा है ………फिर भी मेरी फूल सी बच्ची मानवी के लिए ………उसका रिश्ता लेकर आ गई ……..रमणी प्रियंका को ताना मार रही थी क्योंकि ……..कुछ देर पहले ही … Read more

बेटियां पराई होकर भी अपनी होती है – डॉ बीना कुण्डलिया : Moral Stories in Hindi

रमा देवी और कैलाश जी दोपहर बाद घर के सामने बने पार्क में टहलने निकले तभी रमादेवी लड़खड़ाती गिरने ही वाली थी अगर कैलाश जी ने आगे बढ़कर उनको तुरंत थामा न होता। रमा जी बोली इतनी फिसलन है की आज आप ने थामा न होता तो हाथ या पैर में से कुछ टूट ही … Read more

साज़िश – सीमा सिंघी : Moral Stories in Hindi 

 रवि और किशन दोनों ही देसाई जी बेटे थे ! मगर दोनों के स्वभाव एक दूसरे के बिल्कुल विपरीत  ! जहां रवि हर छोटी-छोटी बात पर घर हो या बाहर सब पर क्रोध किया करता था और तो और किसी को नीचा दिखाने के लिए वह बुरी  से बुरी साज़िश करने से भी नहीं चूकता … Read more

काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती – सीमा सिंघी  :  Moral Stories in Hindi

 इतने ऑर्डर आए हुए हैं, मगर यह जूली भी न जाने कहां जाकर बैठ गई है। मशीन पर बैठेगी,तभी तो कपड़े सिलाई होंगे। यूं अपने आप तो नहीं तैयार हो जाएंगे ना,मगर मेरी बात सुने तब तो,इसी तरह बडबडाते हुए जूली की ताई जी शीला जी जूली को ढूंढते हुए उसके कमरे तक पहुंच गई।  … Read more

आग(स्वतंत्र) – परमा दत्त झा : Moral Stories in Hindi

बाबूजी आप देखकर नहीं चल सकते क्या?-बहू घर में आते ही चिल्लाते हुए बोली। क्यों क्या हुआ?-वे सहज भाव से पूछे। अभी पोंछा लगाया था,अभी सारा काम फिर से करना होगा। -अच्छा,वे बात को विराम देते हुए बोले। अचानक हुए हमले से वे चौंक गये ।अब मैं परिचय दे दूं। श्वसुर हैं डाक्टर योगेश जो … Read more

उल्टा दांव – परमा दत्त झा : Moral Stories in Hindi

आज संजना सिर पटक रही थी कारण श्वसुर जी को उसने छोड़ दिया था परिणाम आज पूरे एक करोड़ रूपए की पुरस्कार राशि से हाथ धोना पड़ा। अरे कुछ करो,सारे पैसे वह डाइन मधु डकार लेगी।-संजना अपने पति राकेश को चिल्लाते बोली। मैं क्या करूं,तुमने झगड़ा किया, तुम अलग हुई ,जब दीदी के पति मरे … Read more

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