आशीर्वाद

“बाबूजी, खाना रख दिया है, खा लीजिए।”रीना, महेश जी के पलंग के पास पड़ी मेज़ पर थाली रखते हुए बोली। “बहु, पता नहीं क्यों आज खाना खाने का मन नहीं कर रहा है। दोपहर का खाना लग रहा है कि जैसे अभी पेट में रखा हो। न हो तो एक गिलास दूध दे दो, खाना … Read more

माँ का कर्ज

“बेटा, क्या तूने सचमुच घर जमाई बनने की ठान ली है?” “हाँ माँ, इसके अलावा कोई चारा नहीं है। अब कंपनी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा है, इसलिए कंपनी बंद कर दी गई है और कंपनी में काम करने वाले हम सब बेरोज़गार हो गए हैं। भला हो कि पारुल के मायके वालों ने अपनी … Read more

अपनों की पहचान -सुनीता वर्मा

आठ बज चुके थे |दुकान बंद करने का समय हो चुका था , इसलिए ‘एरा कॉर्नर’बुटीक का शटर गिरा कर कनु जैसे ही सीढ़ियों से नीचे उतरी ,सामने के मेडिकल स्टोर पर उसे एक परिचित चेहरा दिखा |नाम स्मरण आते ही उसकी आँखें खुशी से चमकने लगीं |जल्दी –जल्दी सड़क पार कर उसने नजदीक पहुँच … Read more

पत्थर दिल – बीना शुक्ला : Moral Stories in Hindi

आज नीलाक्ष बहुत खुश था। कल कोर्ट के फैसले का आखिरी दिन है। उसने शोभना की हर शर्त मान ली थी।  निर्णय सुनाने के पहले जज ने उसे और शोभना को एक बार मिलने की औपचारिकता का समय भी दिया। उस समय भी शोभना ने फिर उससे कहा – ” मुझे क्षमा कर दो नीलाक्ष। … Read more

अपना ही सिक्का खोटा – शुभ्रा बैनर्जी : Moral Stories in Hindi

सुमित्रा जी को सभी रिश्तेदारों ने समझाया था,कि पहले बेटी के हांथ पीले कर दें।बेटे की शादी हो ही जाएगी। सुमित्रा जी को यह मंजूर नहीं था।बड़ी बेटी के लिए अच्छा वर मिलते ही सात  साल पहले शादी कर चुकी थीं वे।अब इकलौते बेटे की बहू आने पर ही छोटी बेटी ब्याहेंगी,ऐसी  उनकी जिद थी। … Read more

खूबसूरत साज़िश – विभा गुप्ता

   ” नहीं रश्मि…मैं उस मराठन के साथ बिल्कुल भी नहीं जाने वाली है..।अरे तू नहीं जानती…वो मुझे…।” गायत्री जी अपनी बात पूरी कर पाती, उससे पहले ही उनकी बेटी ने उन्हें बीच में ही टोक दिया,” बस माँ..अब फिर से शुरु मत हो जाओ..।भाभी तो तुम्हारी ही इच्छा पूरी..।खैर, मैं उन्हें बता देती हूँ कि … Read more

विधवा

एक बहुत बड़े होटल में शादी का फंक्शन चल रहा था। बारात दरवाजे पर आ चुकी थी। द्वार पर एक बहुत ही खूबसूरत लड़की सुर्ख लाल रंग के गाउन में बहुत ही अच्छा डांस कर रही थी। हर कोई उसे देखकर बस उसकी तारीफ़ कर रहा था। तभी वह ठककर साइड हो गई। बारात ने … Read more

अधिकार

आदित्य की कार दरवाज़े पर रुकी ही थी कि भीतर से ऊँची आवाज़ें बाहर तक आ रही थीं। वह ठिठक गया—पहचान लिया, यह तो उसकी माँ सरोज जी की आवाज़ है। मन में खटका हुआ, “शायद काव्या से कोई चूक हो गई होगी… पर ऐसे चिल्लाने की क्या ज़रूरत?” वह तेज क़दमों से अंदर पहुँचा। … Read more

नखरे

“माँ, देख लिया भाभी को? फिर घर पर ही खाना बना लिया। यह भी नहीं सोचा कि ननद कौन-सा रोज़-रोज़ आती है, तो आज खाना किसी होटल में ही खा लेते। त्यौहार कौन-सा रोज़ आते हैं, लेकिन इन्हें तो मेरे आने की खुशी ही नहीं होती।” श्रद्धा रक्षा बंधन पर मायके आई थी। राखी बाँधने … Read more

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