माता की चौकी – श्वेता अग्रवाल

नेहा घर के दरवाज़े पर खड़ी रमन का इंतजार कर रही थी। जैसे ही रमन ऑफिस से घर आया, वह दौड़ती हुई उसके पास गई और मुस्कुराते हुए बोली “सुनो रमन, इस बार नवरात्रि पर गुरुजी हमारे ही घर रुकेंगे। नौ दिन की माता की चौकी यहीं लगेगी!” यह सुनते ही रमन उत्साह से बोला, … Read more

जीने की राह – बीना शर्मा

 कई दिनों से शकुंतला देवी को नींद में बुरे बुरे सपने दिखाई दे रहे थे। जिन्हें देखकर वे बेहद बेचैन हो गई थी। उन्हें सपने में बार-बार अपनी बेटी आत्महत्या करती दिखाई दे रही थी।  जब भी वे कनिका से फोन करके उससे उसकी कुशलता के बारे में पूछती तो कनिका हंसकर यही जवाब देती-‘मम्मी … Read more

मरुथल के काले गुलाब – रवीन्द्र कान्त त्यागी

बीसवीं शताब्दि साँझ के धुंधलके से होती हुई रात की गहरी स्याही में सिमटकर लुप्त हो गई थी और इक्कीसवीं सदी अपनी सुरमई किरणों से वसुधा को मानो एक नया सवेरा देने का लुभावना चुनावी वादा सा कर रही थी। इंजीनियर बनकर शानदार जिंदगी गुजारने का सपना तीन साल डिग्रियाँ बगल में दबाये शहर शहर … Read more

रिश्ते अहंकार से नहीं त्याग और माफी पर टिकते हैं – विनीता सिंह 

गांव में एक बड़ी सी हवेली थी उस हवेली के मालिक सेठ मूलचंद जी थे। उनकी पत्नी की मृत्यु हो चुकी, उनकी एक छोटी सी बच्ची जिसका नाम मीनाक्षी था जिसे सेठ जी ने बड़े लाड़ प्यार से पाला था उन्होंने अपनी दूसरी शादी भी नहीं की उनकी बेटी को कोई सौतेली मां परेशान ना … Read more

रौशन घर, अंधियारा मन – सविता गोयल

अरे वाह, बड़ी अच्छी खुशबू आ रही है क्या बना रही हो श्रीमती जी?? घर में घुसते हीं रसोई से आती देसी घी की खुशबू सूंघते हुए मनोहर जी बोले। अजी देसी घी के लड्डू बना रही हूँ। राज को तो बहुत पसंद हैं मेरे हाथ के लड्डू। इस बार दिवाली पर जब राज बहू … Read more

आँखों देखा कहर – रवीन्द्र कान्त त्यागी

सोने की तैयारी में खाट पर लेटे लेटे मिट्टी के तेल की रोशनी में मेरा ध्यान अचानक खूंटी पर लटके बाबा जी के कुर्ते की जेब पर गया। एक बोतल का ढक्कन सा बाहर झाँक रहा था। बिस्तर छोड़कर उत्सुकता व आश्चर्य से मैंने उनकी जेब को टटोला तो वहां शराब का एक भरा हुआ … Read more

रिटायरमेंट – रंजीता पाण्डेय

शर्मा जी सरकारी स्कूल में अध्यापक थे।उनके परिवार में उनका बेटा रोहनऔऱ उनकी पत्नी रमा जी थी। रमा जी बहुत ही ज्यादा पढ़ी लिखी ,समझदार महिला थी। रमा जी जब शादी करके आयी ,तभी शर्मा जी से बोली की मैं भी कोई नौकरी करना चाहती हूँ। लेकिन शर्मा जी हर बार टाल जाते, की रमा … Read more

रिटायरमेंट – सोनिया अग्रवाल

मोबाइल पर जैसे ही बैंक खाते में पैसे प्राप्त होने का मैसेज मिला तो बुजुर्ग रामलाल जी के चेहरे पर मुस्कान की एक लकीर चमक गई। देखते ही देखते आँखें नम हो गई तो जल्दी से बेटी सपना को फोन कर घर आने के लिए बोल दिया। मासिक पगार  तय तिथि पर आ जाने की … Read more

उधार का अमीर

दोस्तो, यह कहानी नहीं, एक सच्ची घटना है, जो पिछले एक वर्ष से भारत के हर शहर में नित नए रुप में किरदारों के नाम बदल कर घट रहीं है …. (यह  कहानी प्रधान मंत्री जी के आवहान पर इस ग्रुप के सदस्यों को समर्पित…) 100 नम्बर की एक गाड़ी मेन रोड पर एक दो … Read more

विषवृक्ष – रवीन्द्र कान्त त्यागी

छोटे से कस्बे में मेरा आई.आई.टी में उच्च श्रेणी प्राप्त करना कई दिन चर्चा का विषय रहा था. पहले महीने ही एक अंत्तराष्ट्रीय कंपनी में अच्छे पॅकेज की नौकरी लग जाने के बाद पिताजी ने वधु तलाश कार्यक्रम शुरू कर दिया था और ये स्वाभाविक भी था. महानगर की एक पौष कॉलोनी में प्रशासनिक अधिकारी … Read more

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