डाक चाचा – डॉ. उर्मिला सिन्हा
डाकिया—एक शब्द नहीं, एक युग की धड़कन। हमारे जीवन के वे अभिन्न अंग थे, जिनकी उपस्थिति पारिवारिक सदस्य से भी बढ़कर थी। उनका हमारे साथ न रहना गौण था, क्योंकि वे तो उन अपनों का प्यार भरा संदेशा लाते थे, जो हमसे कोसों दूर, क्षितिज पार बसे थे। वे संदेशवाहक नहीं थे, वे तो भावनाओं … Read more