एक रिश्ता ऐसा भी – मधु वशिष्ठ

दादी की आवाज जोर-जोर से आ रही थी वह चाची से बात कर रही थी और कह रही थी अरे काहे को अभी से बिटिया के लिए वर ढूंढे है, छोरी को पढने दो और फिर बिट्टो वाले मेहमान जैसा ही कोई लड़का देख लियो।” “क्याआआआआ? दादी ऐसा बोल रही है?” नाचती हुई बिट्टो रुक … Read more

एक रिश्ता ऐसा भी – बबीता झा

आज मैं जब अस्पताल से आ रही थी तो अंदर एक सुकून सा एहसास हो रहा था। आज मैं एक ऐसी शख्स मिली जो मेरा पेशेंट नहीं था, मेरा कोई अपना भी नहीं था, लेकिन पता नहीं क्यों आज उसको देखकर अजीब सी खुशी मिल रही थी।   घर पहुंची तो अजय ने कहा, “दीपा, कितनी … Read more

सम्मान को अधिकार ना समझे। – लतिका पल्लवी

  जाड़े के दिन थे। कड़ाके की ठंड पर रही थी। 1से 5तक की कक्षा विद्यालय नें स्थगित कर दिया था पर 6 से 12 की पढ़ाई चल रही थी। विद्यालय सात बजे की जगह नव बजे से खुलता था पर बच्चों को जाना पड़ता था और जब बच्चे विद्यालय जाएंगे तो उनके खाने के लिए … Read more

घर बचाना है तो अहंकार छोटा कर बहू – नीलम गुप्ता 

निखिल ने निशा को एक शादी में देखा था लंबी छर हरी सांवली सलोनी निशा की बड़ी-बड़ी शर्मीली आंखों ने उसे जैसे सम्मोहित कर लिया। पूरे समय वह उसे ही देखता रहा और अवसर पाते ही बोला -हेलो मिस ब्यूटीफुल ! क्या मैं आपका नाम जान सकता हूं? निशा ने हैरानी से उसे देखा और … Read more

बड़ी बहु – खुशी

मोहन और प्रमिला दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ते थे।दोनो ने ही बैंक की परीक्षा दी और दोनों की नियुक्ति भी हो गई। समान बिरादरी तो विवाह में भी अड़चन नहीं आई।प्रमिला और मोहन दोनो ही शांत व्यक्तित्व के मालिक थे।किसी से तू तू मैं मैं नहीं।चार साल विवाह के बाद वो बनारस रहे और … Read more

वसीयत – शिप्पी नारंग 

“वो भी बिना हमारी मर्जी जाने…!”ड्रॉइंग रूम में खड़े हर व्यक्ति के चेहरे पर अलग रंग था—कहीं झुंझलाहट, कहीं घबराहट, कहीं बनावटी मासूमियत। लेकिन सबसे स्थिर चेहरा था माधवी का, जो चुपचाप अपने ससुर विनोद के पास खड़ी थी। उसकी हथेलियाँ पसीने से भीग रही थीं, फिर भी उसने आंखें नीचे नहीं कीं। आज पहली … Read more

बदलाव – रोनिता कुंडु

“बस बहुत हो गया!”दहलीज़ पर खड़ी इशिता की आवाज़ में आज पहली बार काँप नहीं, आग थी। हाथ में उसके पुराने सर्टिफिकेट्स की फाइल थी और आँखों में वह चमक, जो वर्षों से भीतर दबाई गई थी। ड्रॉइंग रूम में सब बैठे थे—सास पद्मा देवी, पति नील, ननद सृष्टि, नील के मामा-मामी और दो-तीन रिश्तेदार, … Read more

जिंदगी – संगीता त्रिपाठी

इंजीनियरिंग कॉलेज का पचासवां वर्षगांठ…,कॉलेज प्रशासन ने बड़े धूमधाम से मनाने की सोची …,बड़े आयोजन की तैयारी की , पुराने स्टूडेंट्स  को भी निमंत्रित किया गया ।        तीन दिन का प्रोग्राम कल से शुरू है ,रेवा आज सुबह ही दिल्ली पहुंची ,कॉलेज द्वारा आरक्षित होटल में सामान रख ,कॉलेज देखने का लोभ न रोक पाई … Read more

**प्रीत की रीत** – अंजली शर्मा

    “सुरभि वैसे भी अपनी सास शारदा के आये दिन अनाथालय जाने, अनाथालय में जाकर दान करने वहाँ के बच्चों में सामान बाँटने से तंग आ गयी थी कितनी बार मना कर चुकी थी लेकिन शारदा है कि मानती ही नहीं थी। यहाँ तक तो फिर भी ठीक था लेकिन, आज तो हद हो गयी जब … Read more

बेटियां घर की शान – सुनीता माथुर

प्रगति, जागृति, रचना तीनों ही लड़कियों के कारण ज्योति बहू को घर में सास के बहुत ताने सुनते पड़ते थे। सास हमेशा यही ताने मारती कि——– एक बेटा होता, घर का बारिस होता, कम से कम—– वंश का नाम तो——- बना रहता! लेकिन——— बहू के तो तीन लड़कियां हो गईं यह सब सुनकर ज्योति दुःखी … Read more

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