कलह – मीनाक्षी गुप्ता

शहर की एक अच्छी कॉलोनी में वर्मा जी का फ्लैट था। घर में थे श्रीमान अशोक वर्मा, उनकी पत्नी निर्मला जी, बेटा अमित, और सबसे प्यारी शांता जी (वर्मा जी की माँ और अमित की दादी)। अमित की पत्नी, अमिता, एक मल्टीनेशनल कंपनी में मार्केटिंग हेड थी। निर्मला जी एक समर्पित गृहिणी थीं। उन्होंने अपनी … Read more

रिश्तों का बंटवारा नहीं – शुभ्रा बैनर्जी 

रवि ने बड़े भाई की जिम्मेदारी बहुत अच्छे से निभाई थी।पापा नौकरी से रिटायर हो चुके थे।दो बहनें और एक छोटा भाई था। रवि की नौकरी लग गई थी, पर छोटे भाई (शशि)को नौकरी में कोई रुचि नहीं थी।एक जमीन खरीदकर उसी में मछली पालन का व्यवसाय शुरू कर दिया था उसने। रवि की शादी … Read more

कलह – मंजू ओमर 

महेश बेचैनी से आपरेशन थियेटर के बाहर चहलकदमी कर रहा था । थोड़ी देर में डाक्टर बाहर आए तो महेश लपककर डाक्टर के पास जा पहुंचा, डाक्टर साहब मेरी पत्नी कैसी है । हां मैंने उसका पेट क्लीन कर दिया है , लेकिन अभी भी उनके जिस्म में ज़हर का असर है और वो बेहोश … Read more

घाव हरा करना – सुदर्शन सचदेवा

कालेज का वार्षिकोत्सव था। पूरा कैंपस रोशनी और रंगों में डूबा हुआ था। हर ओर हँसी, संगीत और दोस्तों की बातें। आयुषी भी मंच की तैयारियों में व्यस्त थी। तीन साल बाद वह फिर से कल्चरल टीम की लीडर बनी थी। पर आज कुछ अलग था — उसका दिल अजीब-सा भारी लग रहा था। उसी … Read more

कलह – खुशी

रजनी शादी हो कर एक भरे पूरे घर में हुईं थी।जहां सास सरस्वती और ससुर घनश्याम पति राघव देवर धीरेन और बहन राधा ऐसा परिवार था।ससुर की परचून की दुकान थी।राघव सेल्स मेन था जो एक साबुन की कंपनी में काम करता था।धीरेन एक फर्म में नौकरी करता था। राधा बारहवीं कक्षा में पढ़ती थी।सास … Read more

ईगो – गीता वाधवानी

 आज फिर मीनाक्षी ने रो कर अपनी मां को फोन किया था।   मीनाक्षी ने कहा -” मम्मी देखिए ना, आज संदीप फिर से सुबह-सुबह कलह करके ऑफिस गया है और उसके इस रोज-रोज के क्लेश के कारण मेरा मूड खराब हो जाता है। आज भी ऐसा ही हुआ और मैं ऑफिस से छुट्टी लेकर बैठ … Read more

अंतिम निर्णय – दिक्षा_बागदरे

मधुर और राइमा लगभग 25 सालों का दांपत्य जीवन साथ बिता चुके थे। मगर पिछले कुछ समय से दोनों के बीच एक शीत युद्ध  चल रहा है।  ऐसा नहीं था कि उनके बीच कभी कोई वाद-विवाद ना हुए हो। वाद-विवाद तो हर पति-पत्नी के जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।  यह कहानी घर-घर की … Read more

मैंने अपना फर्ज निभाया है – विनीता सिंह

कश्मीर की वादियों में भारत पाकिस्तान के बॉर्डर के पास एक गांव जहां के लोग चरवाहे या फिर लोग की नांव में सब्जियां बेचकर अपना गुजारा करते थे।यह गांव कश्मीरी पंडितों का था लेकिन ज्यादातर लोग गांव छोड़कर जा चुके थे लेकिन अर्जुन के दादा जी ने कहा इस गांव के पुरोहित भगवान दास जी … Read more

कलह – विनीता सिंह

प्रभाकर जी और सुनीता जी के एक बेटा था उसका नाम विश्वजीत था । वह विदेश में पढ़ने गया। प्रभाकर जी रिटायर हो चुके थे ।दोनों पति-पत्नी अपने घर में रहते प्रातः काल उठकर सुनीता जी पूजा पाठ करती। प्रभाकर जी सुबह टहलने जाते। उसके बाद पेड़ पौधों की देखभाल करते। दोनों एक साथ बैठकर … Read more

जहर का घूंट पीना – मीनाक्षी गुप्ता

 एक बड़े से शहर के बीच में कहीं एक छोटा-सा घर था। इस घर में राधा अपने पति रमेश और तीन मासूम संतानों— गीता (9), कोमल (7) और अमन (5)— के साथ रहती थी। एक समय था जब यह लोअर-मिडिल क्लास परिवार सुख-शांति से भरा था। रमेश एक कंपनी में काम करता था, पर उसकी … Read more

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