इस गुनाह की माफी नहीं – परमा दत्त झा

आज सुखिया और दिलभजन मंडल पर पंचायत बैठी थी।गांव के पंच परमेश्वर और सरपंच राम चौधरी,मुखिया जुम्मन शेख सहित लगभग चार सौ लोग उस पीपल पेड़ तले बैठे थे। सरपंच हुजुर,सुखिया को गांव से बाहर निकाला जाय, हुक्का पानी बंद किया जाए -यह कंटीर मिश्रा थे जो सुखिया पर आंख गड़ाए थे। हां हुजूर कंटीर … Read more

सीख – सुनीता मुखर्जी “श्रुति “

आराधना की प्रथम पोस्टिंग महानगर में हुई। वह बड़ी-बड़ी इमारतें, मॉल, सिनेमा घर, और पार्क और भीड़ भाड़ देखकर अवाक थी । उसने यह सब टेलीविजन में देखे था। एक छोटे से गांव की बाला …कम उम्र में ही उसका विवाह हो गया।  विवाह के पश्चात उसने पढ़ाई करने की ठानी,और यह संकल्प लिया कि … Read more

हां मैं स्वार्थी हूं। – मधु वशिष्ठ

जी हां हो गई हूं मैं स्वार्थी इतना कहकर रीना अपनी बेटी श्रेया को पढाती रही। बाहर से गुस्से से भरी आवाजें आती रही। रसोई में भी  बर्तनों का बजना जारी था।      आइए आपको रीना के परिवार से मिलाऊं। रीना संयुक्त परिवार में थी जिसमें कि उसके दो देवर और दो ननदें थी। आम संयुक्त … Read more

एक रिश्ता ऐसा भी… – तोशिका

मैं कई बार सोचती हूं कि अगर मैं उसको ऐसे बोलती तो शायद आज हमारा रिश्ता ऐसा होता। मैने और मेरी दोस्त रानी ने एक नया क्लब ज्वाइन किया था यही कुछ पांच महीने पहले। वहां का माहौल बहुत उत्सुकता से भरा हुआ था और कई लोगों से हमने बात भी की और उनके बारे … Read more

भाभी का सम्मान – लतिका पल्लवी

रिश्ते बनाए नहीं जाते है बन जाते है और जो रिश्ता दिल से बन जाता है सही मायने मे वही रिश्ता होता है और वही रिश्ता सही से निभता भी है। आज मै आपको एक ननद -भाभी के रिश्ते की कहानी सुनाती हूँ जो थोड़ा फंतासी लगेगा पर सच के बहुत ही करीब है। बस … Read more

साथ का रिश्ता – शुभ्रा बैनर्जी

हां सास है वे मेरी,मां नहीं।बहू हूं मैं पर बेटी नहीं।ना उन्होंने मुझे जन्म दिया,ना मैं उनकी गोद में खेली।आज पैंतीस सालों से लगातार साथ रहते-रहते हम ,सास-बहू के बीच एक अनोखा  रिश्ता बन‌ चुका है।यह रिश्तों का बंधन दुनिया को समझ नहीं आता,क्योंकि यह खून का नहीं। पैंतीस साल पहले इस घर में अपने … Read more

एक रिश्ता ऐसा भी ! – नीलम गुप्ता

जब हमारा यह मकान बन रहा था तो मैं अक्सर यहां आती रहती थी यह देखने की अब क्या बन रहा है जो बन चुका है वह कैसा लग रहा है या फिर यूं ही मन करता है ना वहां जाने का जहां अब आप जाकर रहने वाले हो ! इस दौरान सोसाइटी के कई … Read more

एक रिश्ता ऐसा भी – डाॅ संजु झा

अमन और नमन को अपने पैरों पर खड़ा देखकर नीता को विश्वास ही नहीं हो रहा है।उन दोनों के साथ नीता का क्या रिश्ता है? गुरु -शिष्य का, माॅं -बेटे का या मानवता का,यह आज तक नहीं समझ पाई।जब नीता मात्र पच्चीस साल की थी,तभी उसने सात वर्षीय अमन और नमन को गोद लेने का … Read more

स्टेशन से घर तक – एम. पी. सिंह

सन 2025, 26 दि. का दिन मैं शायद कभी भूल नहीं पाउगा. मैं दिल्ली द्वारका मैं रहता हूँ. काम के सिलसिले मैं सहारनपुर जाना हुआ. रात को वापस आने मैं देर होने की आशंका से बाइक को स्टेशन पर पार्क करके ट्रैन से जाना उचित समझा. रात लगभग 2 बजे वापस आकर नई दिल्ली स्टेशन … Read more

घर की राह – गरिमा चौधरी

 अचानक से मोबाइल का स्क्रीन चमका और एक मैसेज आया  “माँ, बाबा… इस बार नहीं आ पाएँगे। ऑफिस में बहुत काम है।” मैसेज उनका बेटा अमित भेजता था—हर बार वही कारण, हर बार वही दूरी। धनिया ने चुपचाप फोन रख दिया। फिर भी वह हँसने की कोशिश करते हुए बोली,“काम तो होता है बेटा… शहर … Read more

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