बस हमें आपका आशीर्वाद चाहिए.. – विधि जैन

देवी बहुत सुलझी हुई सुंदर और सुशील ग्रहणी थी देवी के मां-बाप बचपन में ही गुजर गए थे अपने मां के पास रहती थी मामा ने अच्छा लड़का देखकर जल्दी ही शादी कर दी थी।  जब ससुराल गई तो ससुराल में धीरे-धीरे काम करती थी..  बहु जल्दी से नाश्ता बनाकर लेकर आ जाओ ..देवी ने … Read more

अनोखा बंटवारा – अर्चना खण्डेलवाल

रितु आज मॉं और बाबूजी आ रहे हैं, उनकी पसंद का खाना बनाकर रख लेना, तीन बजे तक वो स्टेशन पहुंचेंगे, मैं तो ऑफिस में रहूंगा, तुम कैब से जाकर उन्हें ले आना। अरे! वो कोई छोटे बच्चे हैं, जो स्वयं नहीं आ सकते हैं, मैं उस वक्त बंटी को लेने जाऊंगी या उनको, रितु … Read more

असली इरादा – moral story

कॉलेज की आख़िरी सालाना समारोह में जब मंच पर पूरे बैच के सामने टॉपर का नाम पुकारा गया, तो ऑडिटोरियम तालियों से गूंज उठा। “काव्या सिंह!” हल्के नीले रंग का सलवार सूट पहने काव्या ने घबराई-सी मुस्कान के साथ स्टेज पर कदम रखा। छोटे से कस्बे की यह लड़की महानगर की नामी प्राइवेट यूनिवर्सिटी से … Read more

हमें बस आपका आशीर्वाद चाहिए – करुणा मलिक 

अनु… माँ नहीं मानेंगी, पूरा घंटा हो गया यहाँ खड़े-खड़े । बस चलो … अब मैं तुम्हारी एक नहीं सुनूँगा ।  बस एक आख़िरी कोशिश…. मैं यहीं रूकती हूँ तुम अंदर जाकर माँ से मिलकर आओ । क्या पता , तुम्हें देखकर उनका ग़ुस्सा शांत हो जाए , प्लीज़ मना मत करना । साहिल जानता … Read more

आख़िर मेरा भी अस्तित्व है – मुकेश पटेल

प्रज्ञा बचपन से ही अलग तरह की लड़की थी।बचपन में जब मोहल्ले की लड़कियाँ गुड़िया-गुड़िया खेलती थीं, वह किसी पुराने रेडियो को खोलकर उसके तारों को जोड़ने में लगी रहती। स्कूल में भी उसका मन हमेशा गणित, कंप्यूटर और किताबों में लगा रहता। पढ़ाई में वह इतना तेज़ थी कि पूरे जिले में उसका नाम … Read more

अधिकार कैसा? – विनीता सिंह

रोशनी जब आठ साल की थी। तब उसकी मां की बीमारी से मृत्यु हो गई। उसके पिता अब रोशनी को ही उसकी मौत का जिम्मेदार समझते और दिन पर दिन उस से नफ़रत करते कहते जब इसका जन्म हुआ तब से उनकी मां बीमार रहने लगी यह बहुत ज्यादा अभागी है और उन्होंने बहुत18साल की … Read more

ये मेरी जिम्मेदारी है – मंजू ओमर 

ये लो सोनल तुम्हारा टिकट और जाने की तैयारी करो बस।कल मैं आ जाऊंगा तुमको स्टेशन छोड़ने।और हां सोनल मैं आज तुमसे एक बात कहना चाहता हूं तुम्हें जाने से पहले ,जो बहुत दिनों से मेरे मन में थी। बहुत दबाकर रखा था मन में मैंने कि पता नहीं तुम्हें अच्छा लगेगा या नहीं। क्या … Read more

बहू जिम्मेदारियाँ और अधिकार दोनों साथ-साथ चले तो ही अच्छा है – अर्चना खंडेलवाल  

 “अरे वाह, आज तो गली में बड़ी शांति है… न तो बरामदे से कोई ऊँची आवाज़, न बर्तन बजने की खटर-पटर!”लता मासी ने मोहल्ले की परिचित टोन में आवाज़ लगाते हुए चौखट पर पायल खनकाई। अंदर से किचन में रखे बर्तनों की हल्की खनक और गैस पर सीटी बजाती कुकर की आवाज़ आ रही थी।कैलाश … Read more

लीडर लेडी – संध्या त्रिपाठी

रजनी हमेशा अपनी कॉलोनी में सबसे सक्रिय महिलाओं में गिनी जाती थी। किसी भी कार्यक्रम, किसी भी आयोजन, किसी भी सामाजिक काम—सबसे पहले उसका नाम आता। उसकी तेज़ आवाज़, उसका चटक-दमक वाला अंदाज और दूसरों से एक कदम आगे रहने की आदत ने उसे मोहल्ले की “लीडर लेडी” बना रखा था। उसी मोहल्ले के पीछे … Read more

आपकी दोनों बहुएँ एकदम लक्ष्मी हैं – पुष्पा जोशी 

 मोहनलाल जी का पुराना सा मकान शहर के बीचों-बीच था, पर उसमें जितना प्यार था, उतनी ही रौनक भी। नीचे की मंज़िल पर वो अपनी पत्नी शारदा के साथ रहते थे, और ऊपर की मंज़िल दो हिस्सों में बँटी थी – एक तरफ़ बड़े बेटे प्रदीप का कमरा, दूसरी तरफ़ छोटे बेटे सागर का। प्रदीप … Read more

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