कैसी मर्यादा रिश्तों की – डा० विजय लक्ष्मी : Moral Stories in Hindi
रात का तीसरा पहर था।घर के हर कोने में सन्नाटा था… पर एक कोना अब भी जाग रहा था — सर्दी के दिन थे जानकी की आंखों से नींद कोसों दूर थी। तसले में जलती कोयले की आंच धीमी हो चुकी थी और पास ही बैठी जानकी की आंखें बुझी हुई राख जैसी लग रही … Read more