अस्तित्व- मनीषा सिंह

अजी•• सुनते हो! कल मुझे निकलना है आपको याद तो है ना••?  स्वाति किचन से ऑफिस  के लिए तैयार होते हुए शेखर से बोली।  हां-हां•• मुझे याद है तुम्हें अपनी पैकिंग आज ही करनी होगी!   हां वो तो मैं कर लूंगी पर•• पर क्या? चश्मा लगाते हुए शेखर ने पूछा।    आप मुझे अकेले ‘भोपाल’ भेज … Read more

सपनों की दहलीज – सरिता सिंह : Moral Stories in Hindi

तुलसी अभी इंटर में है इंटर बायोलॉजी से पास किया है डॉक्टर बनने की चाहत है , लेकिन बड़े भाई और ताऊ नहीं चाहते कि वह ज्यादा पढ़ाई करें  , क्योंकि इस खानदान की लड़कियां , ज्यादा पढ़ाई नहीं करती तुलसी का भी सपना अधूरा रह जाएगा मां बार-बार यही समझ रही है कि बेटा … Read more

आकाश और भी हैं – निभा राजीव”निर्वी” : Moral Stories in Hindi

प्रारंभ में थोड़ा हिचकिचाती हुई अनुराधा जी का चेहरा शीघ्र ही आत्मविश्वास की प्रभा से दमकने लगा। उनकी भावपूर्ण भाव भंगिमाएँ एवं सधी हुई मुद्राओं ने उनके नृत्य में जैसे एक सम्मोहन सा उत्पन्न कर दिया था, जिसके प्रभाव में आकर जैसे आज पूरी प्रेमधाम सोसाइटी मुग्ध और सम्मोहित थी।           दीपावली के अवसर पर एक … Read more

मेरा अस्तित्व? – गीता वाधवानी : Moral Stories in Hindi

 बड़े से घर में दीपा,इस कमरे से उस कमरे में और उस कमरे से इस कमरे में चक्कर काट रही थी। घर का सूनापन मानो उसे खाने को दौड़ रहा था।         आज उसे अपने पति राजन की बहुत याद आ रही थी और वह उनकी तस्वीर हाथ में लेकर रो रही थी। जब वह राजन … Read more

हक की परिभाषा – विमला गुगलानी : Moral Stories in Hindi

माही ने नजर उठा कर घड़ी की और देखा तो उसे कुछ घबराहट सी हो आई। सिरफ एक घंटा ही बचा है, मेहमानों के आने में, और अभी कितने काम पड़े है। मेड भी बेचारी कितनी तेज़ी से हाथ चला रही है। चाय भी पड़ी पड़ी ठंडी हो गई तो वो उठा कर एक घूँट … Read more

तंग करने का तोसे नाता है – डॉ० मनीषा भारद्वाज : Moral Stories in Hindi

स्कूल की घंटी बजते ही अंशु अपने क्लासरूम से बाहर निकला। उसके चेहरे पर थकान थी, पर आँखों में वह चमक थी जो बच्चों को कॉग्निटिव डेवलपमेंट पर पियाजे के सिद्धांत समझाते समय आती थी। बैग में किताबों का बोझ था – वाइगोत्स्की, ब्रूनर, और उसका पसंदीदा पियाजे का संग्रह। वह सीधे घर पहुँचा और … Read more

अंगारे उगलना – सुभद्रा प्रसाद : Moral Stories in Hindi

         ” भईया, मैं आज आपसे कुछ मांगने आई हूँ |” दीपा ने आलोक से कहा |         इतना सुनते हीं आलोक की पत्नी रेखा बोलने लगी -” अरे हमलोग तो खुद परेशान हैं और उपर से ये हमें और परेशान करने चली आई | कभी सुख – चैन, शांति से रहने नहीं देती हमें | हरदम … Read more

“अब और नहीं” – गीता अस्थाना : Moral Stories in Hindi

पितृ विहीना मयूरी शैशवास्था से ही अपनी मां के साथ ही चाचा लोगों के आश्रित हो गई थी। मां आर्थिक रूप से कमज़ोर थीं साथ ही सामाजिक अंध विश्वासों और मान्यताओं से ग्रसित थीं। पिता की मृत्यु के समय एकत्रित किसी करीबी रिश्तेदाए र ने कहा  “इस परिवार मे ऐसा ही होता है।जब कोई परिवार … Read more

लड़की बिना कैसा अस्तित्व !! – संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

“अरे सुधा आज तो मोहल्ले में कोई कंजक ही नजर नहीं आ रही !” मनोहर जी बाहर से आ बोला। ” अरे ऐसे कैसे जी इतनी कंजक तो है हमारे मोहल्ले में फिर नजर क्यों ना आईं आपने ठीक से देखी ना होगी ।” सुधा जी बोली। ” सब जगह ढूंढा दूसरे मोहल्ले में भी … Read more

अंगारे उगलना – निमीषा गोस्वामी : Moral Stories in Hindi

मां आप कहां चली गई हो मुझे अकेला छोड़कर मौसी मां मुझे प्यार नहीं करती जब आप थी सब मुझे प्यार करते थे पापा भी और मौसी भी लेकिन जब से आप गई हो तब से सभी बदल गये है।मां सब कहते हैं कि आप भगवान के पास गई हो आप वापिस कब आओगी मुझे … Read more

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