भाभी का सम्मान – लतिका पल्लवी

रिश्ते बनाए नहीं जाते है बन जाते है और जो रिश्ता दिल से बन जाता है सही मायने मे वही रिश्ता होता है और वही रिश्ता सही से निभता भी है। आज मै आपको एक ननद -भाभी के रिश्ते की कहानी सुनाती हूँ जो थोड़ा फंतासी लगेगा पर सच के बहुत ही करीब है। बस … Read more

साथ का रिश्ता – शुभ्रा बैनर्जी

हां सास है वे मेरी,मां नहीं।बहू हूं मैं पर बेटी नहीं।ना उन्होंने मुझे जन्म दिया,ना मैं उनकी गोद में खेली।आज पैंतीस सालों से लगातार साथ रहते-रहते हम ,सास-बहू के बीच एक अनोखा  रिश्ता बन‌ चुका है।यह रिश्तों का बंधन दुनिया को समझ नहीं आता,क्योंकि यह खून का नहीं। पैंतीस साल पहले इस घर में अपने … Read more

एक रिश्ता ऐसा भी ! – नीलम गुप्ता

जब हमारा यह मकान बन रहा था तो मैं अक्सर यहां आती रहती थी यह देखने की अब क्या बन रहा है जो बन चुका है वह कैसा लग रहा है या फिर यूं ही मन करता है ना वहां जाने का जहां अब आप जाकर रहने वाले हो ! इस दौरान सोसाइटी के कई … Read more

एक रिश्ता ऐसा भी – डाॅ संजु झा

अमन और नमन को अपने पैरों पर खड़ा देखकर नीता को विश्वास ही नहीं हो रहा है।उन दोनों के साथ नीता का क्या रिश्ता है? गुरु -शिष्य का, माॅं -बेटे का या मानवता का,यह आज तक नहीं समझ पाई।जब नीता मात्र पच्चीस साल की थी,तभी उसने सात वर्षीय अमन और नमन को गोद लेने का … Read more

स्टेशन से घर तक – एम. पी. सिंह

सन 2025, 26 दि. का दिन मैं शायद कभी भूल नहीं पाउगा. मैं दिल्ली द्वारका मैं रहता हूँ. काम के सिलसिले मैं सहारनपुर जाना हुआ. रात को वापस आने मैं देर होने की आशंका से बाइक को स्टेशन पर पार्क करके ट्रैन से जाना उचित समझा. रात लगभग 2 बजे वापस आकर नई दिल्ली स्टेशन … Read more

घर की राह – गरिमा चौधरी

 अचानक से मोबाइल का स्क्रीन चमका और एक मैसेज आया  “माँ, बाबा… इस बार नहीं आ पाएँगे। ऑफिस में बहुत काम है।” मैसेज उनका बेटा अमित भेजता था—हर बार वही कारण, हर बार वही दूरी। धनिया ने चुपचाप फोन रख दिया। फिर भी वह हँसने की कोशिश करते हुए बोली,“काम तो होता है बेटा… शहर … Read more

“पवित्र रिश्ता” – कुमुद मोहन 

रिचा और अनुज एक ही बस में आते जाते थे!दोनों एक दूसरे के प्रति खिंचाव महसूस करते पर एक दूजे की पहल का इंतज़ार करते करते मौन ही रह गए! ये सफर कब चाहत में तब्दील हो गया दोनों को पता ही न चला! एक दिन अनुज अपने प्यार का इज़हार कर चिट्ठी बनाकर लाया … Read more

लक्ष्मी: मेरी नन्ही गुरु – सीमा गुप्ता

लक्ष्मी से मेरा रिश्ता अचानक बना जो न किसी परिचय का मोहताज है और न ही किसी वादे का। वह चुपचाप आई, मेरे भीतर उतर गई और मुझे पहले से थोड़ा बेहतर इंसान बनाकर चली गई। बात शुरू होती है, महाशिवरात्रि के पावन अवसर से। महादेव की कृपा से मुझे अपनी बेटियों अदिति और अन्वी … Read more

रेशम के धागे – रवीन्द्र कान्त त्यागी

“ग्रेवाल साहब से मिलना है” केबिन के बाहर से किसी नारी का स्वर सुनाई दिया। “ग्रेवाल साहब तो… अब यहाँ दीक्षित सर देखते हैं।“ रिसेप्सनिस्ट ने उत्तर दिया। एक दंपति ने मेरे केबिन में प्रवेश किया। कुछ पल तो एक फाइल में उलझा रहा। फिर गर्दन उठाई तो सामने हमारे कौलेज की सब से चर्चित … Read more

हम पंछी एक डाल के – रवीन्द्र कांत त्यागी

रोज की तरह सॉफ्टवेयर इंजीनियर अभय सिंह ने अपने घर आकर गैराज में गाड़ी पार्क की, हाथ मुँह धोये और आराम कुर्सी पर अधलेटे पिताजी के चरण स्पर्श करके उनके बराबर में पड़ी कुर्सी पर बैठ गए. “पापा, कंपनी मेरा प्रमोशन करके तीन साल के लिए ऑन डैप्युटेशन जर्मनी भेजना चाहती है. मैंने तो मना … Read more

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