अपनापन   -किरन केशरे

शाम पांच बजे ‌ऑफिस का कार्य पुरा कर सलोनी घर जाने की तैयारी कर ही रही थी की , अचानक ही बॉस ने अतिरिक्त कार्य सौंप दिया, उन फाइलों को निपटाते रात के साढ़े सात बजने को आ गए थे, वह सोच रही थी, नमन भी ऑफिस से छह बजे तक आ जाते हैं ,सास … Read more

सेविंग – मीनाक्षी चौहान

दोनों बच्चे और उनकी माँ के मुँह बने हुए हैं मना जो कर दिया मैनें इस बार मॉल से शॉपिंग करने के लिये। दो महीने हो गए मॉल से घर का सामान लाते हुए। अच्छा भला अब तक बड़े बाज़ार के लाला की दुकान से सामान आया करता था लेकिन उस दिन मैडम ने अखबार … Read more

हम सफर-सीमा बी.

नैना को रोज मेट्रो से आना जाना होता है उसने अपनी छड़ी और कदमों की गिनती से रास्ते को पहचानना सीख लिया है ।अपने नाम के जैसे उसकी आँखें बहुत ही सुन्दर और बड़ी बड़ी हैं पर उन आँखों मे रोशनी नही है। अनुराग और नैना की मुलाकात रोज मेट्रो में ही होती हैं । … Read more

मृगतृष्णा – सीमा बी. #लघुकथा

आज भी मुझे याद है,जब मेरे लिए अविनाश का रिश्ता आया था।अपनी अपनी माता पिता की एकलौती संतान हैं। पेशे से डॉक्टर होने के बावजूद  वो एक पढी- लिखी घरेलू लड़की से शादी करने को इच्छुक थे। इतना अच्छा रिश्ता सामने से आया तो ना करने की कोई वजह नहीं थी। छह महीने के छोटे … Read more

 लंगड़ी-कन्या – सीमा वर्मा

“लंगड़ी , हाँ यही उसका नाम है।” “जब भी मेरी यह भक्त कन्या अपने एक छोटे पाँव पर हिलक-हिलक कर अकेली ही कदम खींचती हुई आती है , मेरा ध्यान अपने समस्त भक्तों से हट कर उस पर ही केंद्रित हो जाता है, “अपनी हँसी उड़ाए जाने के डर से हमेशा एकाकी ही दिखती है … Read more

जिन्दगी बदल गयी  -पुष्पा पाण्डेय

सुबह चाय के साथ हाथ में अखबार लेते ही शर्मा जी बोले। “राधा! देखो तो ये कंचन जी की तस्वीर है?” ” अरे हाँ, ये तो कंचन ही है।” “इन्हें ‘राष्ट्रीय  साहित्य-रत्न’ पुरस्कार मिला है। मुख्य पृष्ठ पर ही तस्वीर छपी है। अब तुम्हारी बात नहीं होती है उनसे?” ” यहाँ आने पर  कुछ दिन … Read more

फैसला – रचना कंडवाल

शाम के चार बज रहे थे।  लड़का झील के किनारे बैठ कर किसी  का इंतजार कर रहा था।कभी खड़ा होता, कभी बैठ जाता। उसके अंदर अजीब सी बेचैनी थी। आसपास का मनोरम वातावरण भी उसे अपनी तरफ खींचने में असमर्थ था।उसी बेचैनी में वह झील में पत्थर मारकर पानी की खामोशी तोड़ रहा था। तभी … Read more

तुम शक्ति हो -रंजना बरियार

मेडिकल में दाख़िला हेतु आज फिर अनन्या का टेस्ट है..वो दो सालों से टेस्ट दे रही है..अब तक दसों टेस्ट दे चुकी है! “माँ मुझे नहीं जाना है क्या फ़ायदा टेस्ट देने का?” निराशा में वो अपनी माँ, सुनैना से कहती है। “नहीं बेटे तू जा एक प्रयास और कर ले!” सुनैना ने कहा। एक … Read more

पिया बसंती – रश्मि स्थापक

कादम्बिनी ने अपनी ड्राइंग रूम की खिड़की से बाहर देखा …पीले फूलों की बहार आई हुई थी,उसने कैलेंडर पर निगाह डाली बस दो दिन बचे है बसंत पंचमी को…तभी हवा का वासंती झोंका उसे जैसे बाहर गॉर्डन तक ले आया…सिहराने वाली ये वही तो हवा है जो उसके बीसवें वसंत को मदहोश किए जाती थी…तभी … Read more

भेदभाव -ऋतु अग्रवाल

 बारहवीं की परीक्षा के बाद पूर्वी अपनी नानी के यहाँ छुट्टियाँ बिताने चली गई। दो मामा,मामियाँ, उनके बच्चे और नानी भरा पूरा परिवार था। पूर्वी का परिवार शहर में रहता था जबकि नानी का परिवार एक छोटे से कस्बे में था।      शहर में पूर्वी एक  मस्तमौला जीवन बिताती थी पर नानी के यहाँ माहौल थोड़ा … Read more

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