भरपाई, एक बेबसी – ” रीमा महेंद्र ठाकुर “

हरिया, अपनी जोरु के साथ, कन्धे पर अपनी इकलौती बेटी को बिठाये लम्बे डग भरता चला जा रहा था। अगर आज छोटे मालिक चले गये तो “”” बडे मालिक से नजरे कैसे मिला पायेगा,छोटे मालिक के बडे एहसान है उसपर,,,, इस साल तो टिडिड्यो ने पूरी फसल चौपट कर दी,थी भला हो छोटे मलिक का … Read more

राजरानी – नीरजा कृष्णा

रज्जो चार वर्षों से हमारे घर काम कर रही थी।ज्यादातर नियत समय पर आना और पूरी निष्ठा से काम करना… हम सब उससे बहुत प्रसन्न रहते थे। हमारी पुरानी विश्वासी मेड ने उसको रखवाया था,”मैडम जी, ये रज्जो है। नई नई गाँव से आई है।  अब मैं थक चुकी हूँ…बहू काम करने से रोक रही … Read more

कुबेर सखा – एक मसीहा ” रीमा महेंद्र ठाकुर

आबादी से दूर एक कुटिया नजर आ रही थी!  संध्या बेला,  सुमन अपनी नन्ही बिटिया,श्रमिका की ऊंगली थामे कुटिया की ओर बडे बडे डग भरती, अंधेरा होने से पहले पहुंचने की चेष्टा कर रही थी!  गुरु जी ने सूरज ढलने से पहले उसे बुलाया था!  यदि देर हो गई तो श्राप भी दे सकते है,  … Read more

कौन बड़ा कौन छोटा – नीरजा कृष्णा

आज बीच रास्ते में कार खराब हो जाने से उन्हें एक ऑटो लेना पड़ा। उसमें बैठते ही मंद मंद संगीत लहरियों ने उनका स्वागत किया। उस ऑटोरिक्शा की भीतरी सजावट भी नयनाभिराम थी। उत्सुकता से पूछ बैठीं, “अरे भैया, तुम्हारा रिक्शा तो बहुत साफ़सुथरा और चकाचक है। ज्यादातर तो फटेहाल होते हैं। इसमें बैठ कर … Read more

डकैत – कमलेश राणा

पापा बैंक मैनेजर थे,,,उनका ट्रांसफर नई नई जगह होता रहता था,,,,और हमें उस नई जगह के भूगोल,भाषा और परम्पराओं को जानने का मौका मिलता और साथ ही साथ बहुत सारे नये लोगों से मिलने का सौभाग्य भी। उनमें कुछ लोग तो ह्रदय पर अमिट छाप छोड़ जाते,,,,,कुछ की स्मृतियाँ मन को कड़वाहट से भर देतीं … Read more

दिखावा – प्रीती सक्सेना

 सुधा मेरी पड़ोसन है,, काफ़ी लंबे समय से हम एक दूसरे की पड़ोसन हैं,,, बाउंड्री वॉल, जुड़ी होने से कई बार एक दूसरे से मिलना हो जाता,, थोडी बाते भी हो जाती।   सुधा के पति का व्यापार था,, मेरे पति नौकरी पेशा हैं,, ज़रूरत से ज्यादा शौकीन है,, सुधा ,खरीददारी की,, अच्छा  खासा खर्च … Read more

मेरे जीवन दाता — डा. मधु आंधीवाल 

आज राम प्रसाद जिसे सब लोग रामू कहते थे बहुत खुश था । खुश अकेला वही नहीं था पूरा परिवार और पूरा गांव मस्ती से झूम रहा था । आज उसका बेटा कलक्टर बन गया । कितनी मुश्किल से उसने और उसकी पत्नी मुनिया ने उसको शहर में पढ़ाया था । शरद शुरु से ही … Read more

दिल से याद – कंचन श्रीवास्तव

तमाम रिश्तों से विमुख हो मन,  दीमाग को नज़रंदाज़  कर उस दिशा में भागता जहां जाने अंजाने दिल की जमीं पर मोहब्बत का पौधा उगा आया । एक तरफ तरुणाई यौवन को छू रही तो दूसरी तरह मन किसी अनजाने से बंधन में बंध रहा, वो भी ऐसे कि उसके आगे सारे रिश्ते फीके हैं,लाख … Read more

इंतजार ” – गोमती सिंह

–मार्च का महीना था। रात के लगभग 9 बज रहे थे । सर्दी विदा ले चुकी थी।  अत: धीमी गति से पंखा चल रहा था।         नीरजा औंधी लेटी हुई अपनें पति देव के आने की राह देख रही थी।  इस तरह कुछ बीते हुए बातों के बारे में सोचते हुए उसका मन अतीत में चला … Read more

गरीबी – मीना माहेश्वरी

   आज घर में बड़ी रौनक थी । गुप्ता जी के बड़े बेटे के सुपुत्र की प्रथम वर्ष गांठ थी। बड़ा अयोजन रखा गया था। सभी नाते रिश्तेदार आए थे। मानस का अखंड पाठ। चल रहा था।  गुप्ताजी की छोटी बेटी  कामिनी अपने दोनों बच्चों के साथ  आई थी।बड़ा बेटा हार्दिक 8साल का था और बेटी … Read more

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