प्रेम के रंग – सीमा वर्मा

स्थानीय इंजिनियरिंग कॉलेज में दूसरे बर्ष के छात्र रीतेश और ज़ारा में कुछ तो गुपचुप अवश्य चल रहा है। जा़रा जितनी प्यारी है ,उतनी ही मीठी उसकी आवाज। रीतेश स्वभाव से जितना खुशदिल उतना ही अच्छा गजल भी लिख लेता है।   उसकी लिखी गज़ल और जा़रा की मीठी आवाज वाली गाएकी में कौन किसे शोभाएमान … Read more

अहिल्या  – मिन्नी मिश्रा

माँ, कहानी सुनाओ ना |” “अरे…सो जा , बहुत रात हो गई | सबेरे तुझे स्कूल भी जाना है |” “स्कूल ? ओह ! कल रविवार है ! माँ, तुमको कुछ भी याद नहीं रहता ! ना मुझे कल पढाई की चिंता है और ना ही होमवर्क की ! तुम्हारे पास कहानी का खजाना है … Read more

उम्मीद – प्रीति आनंद अस्थाना

आज रामनाथ जी बहुत खुश हैं। बेटे की पढ़ाई पूरी हो गई, अपने ही शहर में अच्छी-सी नौकरी लग गई और आज उसे पहली तनख्वाह मिलने वाली थी। न जाने कितने बरसों से इस दिन का सपना संजो रखा था उन्होंने। बड़ी उत्सुकता थी कि अविनाश अपनी पहली तनख्वाह का क्या करेगा? सुना है उन्होंने … Read more

श्रिंगार – विनय कुमार मिश्रा

“जीजा जी आप तैयार नहीं हुए!” अपने तरीके से तो मैं तैयार हो ही चुका हूँ। अब इससे ज्यादा मैं कैसे तैयार हो पाऊं। गलती इसकी भी नहीं। ये मेरे ससुराल में मेरी शादी के बाद तीसरी शादी है। और ले देकर मैं यही पुराना कोट पैंट आज तीसरी दफा पहन रहा हूँ। साले साहब … Read more

लव बर्ड्स – कमलेश राणा

यथा नाम तथा गुण,,,ये चिडियाँ सारे दिन प्यार में ही मस्त रहतीं हैं,,तभी इन्हें लव बर्ड्स कहा जाता है,,ये ऑस्ट्रेलियन पक्षी है,,इन्हें बजरी या बज्जी भी कहते हैं,, ये चिडियाँ जोड़ा बनाती हैं और जीवनपर्यन्त उसीके साथ रहती हैं,,,इनका जीवन मनुष्य के लिए सफल गृहस्थ जीवन का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है,, ये मैने तब … Read more

पेरिस एयरपोर्ट पर,,दो रात एक दिन का बसेरा,, – सुषमा यादव

पेरिस के एयरपोर्ट का एक रोचक संस्मरण,,, ,,,,, एक देवदूत के संग,,  मैं अपनी बेटी के साथ पेरिस के एयरपोर्ट के लिए निकली,,जो उनके घर से लगभग चालीस किलोमीटर दूर था,, उसकी बच्ची अभी मात्र एक महीने की थी,, मेरी फ्लाइट,, एयर इंडिया,की , दिल्ली के लिए रात दस बजे की थी,, मेरी बेटी ने … Read more

लाल कमीज़ – मीनाक्षी चौहान

फेंसिंग होने के बावजूद भी दो-तीन दिन से घर के बाहर गार्डन में लगी गुलाब और गेंदें की क्यारियों में से खिले-खिले सारे फूल गायब हो रहे थे। रह जाते बस अधखिले फूल और कलियाँ। “अभी रिकॉर्डिंग चेक करती हूँ तभी कुछ पता चलेगा।” बड़बड़ाते हुए अनु घर के अंदर आई और तीन दिन पहले … Read more

आभागी , दुर्भाग्य का अंत – रीमा महेंद्र ठाकुर

लो  भकोस लो “””इस  बुढिया से जाने कब छुटकारा मिलेगा, इतना कहते  हुए ,रेवती ने चावल की तपेली दादी सास के सामने उँडेल दी ,कुछ चावल बर्तन मे कुछ जमीन पर कुछ दादी सास के हाथो पर चिपक गये!   जलन से दादी तडप उठी , दादी उस तपेली को खमोशी से देखती रही ,जली हुई … Read more

एक ही बेटी – कंचन श्रीवास्तव

पराया धन कह कर पता नहीं बेटियों की उपेक्षा की जाती है या उन्हें सम्मान दिया जाता है नहीं मालूम पर आज सरल पर जो कुछ बीत रही उसका व किसी से जिक्र भी नहीं कर सकती। किससे करें ससुराल में करें तो सब ताना मारेंगे और मायके में पहले जैसा कुछ रहा नहीं। सब … Read more

कॉलेज की सुहानी यादें –   वीणा 

बात तब की है जब लोगों की जुबां पर ‘जीता था जिसके लिए ‘ गीत के बोल चढ़े हुए थे । युवक -युवतियों के बीच प्यार का आलम परवान पर था। सलमान खान ,शाहरुख खान ,अजय देवगन आदि  अभिनेता युवकों के आदर्श बने हुए थे।                      ऐसे ही समय में मेरे कॉलेज में कौशर नाम की … Read more

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