खिलखिलाती जिंदगी – भगवती सक्सेना गौड़

आज पार्क में शाम को अपनी सखी मालिनी को देखकर मन प्रसन्न हुआ। सोसाइटी में वो है पांच वर्षों से, पर छह महीने यहां पर और आधे वर्ष छोटे बेटे के घर मे रहती है। मुझे अंदाज़ था आज तो सब सखियों की मस्त महफ़िल जमेगी, कोई कोई शख्स अपने साथ अपने चारों ओर पॉजिटिव … Read more

लो आ गई उनकी याद – के कामेश्वरी

पदमा और वेंकट दोनों ही बैंक में काम करते थे । वहीं से उनकी प्रेम कहानी शुरू हुई थी । दोनों एक ही ब्रांच में काम करते थे । बड़ों की रज़ामंदी से दोनों का विवाह बड़े ही धूमधाम से हो गया । अपनी ज़िंदगी में वे दोनों बहुत खुश थे । एक साथ ऑफिस … Read more

एक और प्रेम कहानी – रेणु गुप्ता

दूर्वा अपने घर में बागीचे में अपने सबसे पसंदीदा कोने, बेहद सुंदर सफेद और नारंगी रंग के अनगिनत नन्हे फूलों से लदे फदे हरसिंगार के वृक्ष की सुकूनभरी छांव में बैठी हुई थी और आज का दिन मानो चलचित्र की रील की भांति उसके मानस चक्षुओं के सामने एक बार फिर से गुजर रहा था … Read more

साहसी कदम – डा. मधु आंधीवाल

आज अवनी आई बहुत खुश लग रही थी । आकर मेरे से लिपट गयी । मैने कहा कैसी हो बेटा वह हंस कर बोली आपके सामने खड़ी हूँ ना । मै बीते दिनो में पहुंच गयी एक प्यारी सी मनमोहक छवि की मालकिन अवनी मेरी सबसे अधिक  करीबी थी । मेरे ही पड़ोस में  मि. … Read more

“बैसाखी ” – रंजना बरियार

बैसाखी तब पन्द्रह वर्ष की ही थी जब राम सिंह, मुखिया जी के बेटे ने प्रेम का झाँसा देकर उसका शारीरिक शोषण किया करता था..गर्भ से होने पर उसने शादी का दबाव बनाया तब भी बहाने बनाकर वो शोषण करता रहा..टालता रहा,पाँच माह का गर्भ होने पर वो पढ़ाई के बहाने गाँव छोड़ कर कहीं … Read more

एक छोटी सी बात – प्रतीक खंडेलवाल

शीतल सुनो यार जल्दी टिफिन बना दो ऑफिस को लेट हो रहा हूं और वो मेरी घड़ी कहां है और ये पर्स में से पैसे लिए थे क्या…   रवि ने कहा इंसान हूं कोई मशीन नहीं मैंने कोई पैसे नहीं लिए और तुम्हारे सारे कामों का ठेका मेरा नहीं है खुद भी चीजों को … Read more

मेरा क्या कसूर  – रीता खरे

 यौवन की दहलीज पर कदम रखते ही अनु भी सुन्दर सुन्दर सपने सजाने लगीं थी, वह भी किसी सुन्दर राजकुमार के आने की प्रतीक्षा करती, पर वह जानती थी कि मध्यम परिवार एवं साधारण रूप के आगे असाधारण गुण विफल हो जाते हैं ।       ग्रेजुएट होते होते उसकी कई सहेलियां प्रणय बंधन में बंधने लगी  … Read more

दहलीज – गौतम जैन 

कई वर्षों पश्चात घर की ” दहलीज ” पर कदम रखते ही राजू सर से पांव तक कांप गया…. आंसुओ का समंदर जो अब तक ठहरा हुआ था… हिलोरें मारने लगा… तट बांध तोड़ने को आतूर हो गया।जैसे ही अंदर निगाहें गई… बांध टूट ही गया । सामने ही रिश्तेदारों से घिरी “मां” । व … Read more

लायक – गौतम जैन

सायरन की आवाज के साथ ही एम्बूलैंस तेजी से अस्पताल में आकर रुकी । पेशेन्ट को तुरंत स्ट्रेचर में आपरेशन थियेटर में  लाया गया  और आपरेशन शुरू हो गया ।       सुरेश ने अस्पताल की सारी औपचारिकताएं पूरी की और तीन लाख रुपए जमा करवा दिए । और पापा की सलामती की प्रार्थना करने लगे।        करीब … Read more

डैजी –  गरिमा जैन

शाम ढलते ही पास के कॉफी शॉप जाना रोहन को बहुत पसंद था।वह उसकी पसंदीदा जगह थी ,उसके अकेलेपन को  दूर करने का एकमात्र जरिया। कॉफी शॉप में ही खेलने के लिए बाउलिंग का गेम था जिसे खेल के रोहन बहुत रिलैक्स महसूस करता था। रोहन ने इतने सालों में थोड़े बहुत पैसे इकट्ठा कर … Read more

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