“कर्म और भाग्य” – राम मोहन गुप्त
#ख़्वाब “देखा एक ख़्वाब तो ये सिलसिले हुए, दूर तक निग़ाहों में थे गुल खिले हुए” सुनने में बहुत अच्छे लगते हैं गीत के यह बोल पर हकीकत में स्वप्न का साकार होना, कल्पनाओं का आकार लेना तभी संभव है कि जब किस्मत और कर्म दोनों साथ दें और जब तक ऐसा ना हो तो … Read more