मुस्कुराते नन्हें सपने – मीना माहेश्वरी

बचपन में जब भी मैं किसी को पुरस्कृत होते देखती तो मुझे बड़ा अच्छा लगता,  मुझे हमेशा लगता की मैं  जिस किसी काम को करूं, बढ़िया करूं, लोग मेरी भी तारीफ़ करें। मैं कहानियां पढ़ती,और अच्छे किरदारों से प्रभावित हो उनके जैसे बनने की कोशिश करती। ठीक से याद नही हैं ,शायद कक्षा  चार मे  … Read more

स्वाद – कमलेश राणा

मम्मी आज फिर पोहा बना दिया,,,सैंडविच कितने दिनों से नहीं बनाये आपने,,, बहू मेरा दलिया बन गया क्या,,, अभी लाई मां जी,, क्षिप्रा, जरा अखब़ार और चश्मा तो देना मेरा,, जी ,बाबूजी,, क्षिप्रा,मेरा टिफ़िन तैयार हो गया क्या,, सुबह से सांस लेने की फुर्सत नहीं,,चकरघिन्नी हुई जा रही है,,,जरा भी वक़्त नहीं मिलता अपने लिए … Read more

मन तो बच्चा है जी – भगवती सक्सेना गौड़

ट्रेन अपनी गति से भाग रही थी, स्कूल की तरफ से एनसीसी की लड़कियों को लेकर कुछ शिक्षिकाओं को  इलाहाबाद भेजा था । उनमे से एक अनिता का वहां कभी मायका भी हुआ करता था, आज वो फूली नही समा रही थी। 40 वर्षो के बाद ये  बहुमूल्य पल उसके सामने थे और यादों का … Read more

बहारें बसंत की मोहताज़ नहीं – सरला मेहता

बेहद प्रभावशाली व्यक्तित्व की स्वामिनी चारु मित्रा, कॉलेज में पढ़ाती है। अपने काम से काम रखती है। अवसर पाते ही पेड़ो के झुरमुठ में ऐनक चढ़ाए कोरे कागज़ की नायिका सी जा बैठती है, अपनी डायरी लिए। अनुराग भी अभी तक पूर्व प्रेमिका प्रिया द्वारा दिए ज़ख्मों को झेल रहा है। चारु की बातें उसे … Read more

 कत्थई आंखों के ख्वाब – Short Story In Hindi

फिर वही ख्वाब…..मिताली अपनी ही डरावनी आवाज़ से जागकर बिस्तर पर उठ कर बैठ गई…… …..एक कमरा  छोटा सा…. चारों तरफ से बिल्कुल बंद  जिसका केवल एक ही छोटा सा दरवाजा है…..काफी नीची छत है …..एक भी रोशनदान नहीं है… घुप अंधेरा….. उसमें एक लड़की  है उसका पूरा चेहरा अस्पष्ट सा है केवल उसकी  कत्थई … Read more

सपनें – Inspiring Story In Hindi 

“दादी माँ! अपनी पसंद बताओ ना, क्या खाओगी” मेरी बहू की बहू ने मेनू कार्ड मेरी तरफ कर पूछा तो आँखें छलक आईं जब अपने बाउजी के घर में थी तो चारदीवारी ही मेरी दुनिया थी। सिर्फ मेरी ही नहीं! मेरी माँ, भाभी,चाची और दादी की भी। स्कूल सिर्फ सातवीं तक गई वो भी बड़े … Read more

गुलाबी-स्कूटी – सीमा वर्मा

साथियों इतनी लम्बी जिन्दगी के न जाने कितनी खट्टी-मीठी यादें होगीं। उनमे से एक जो मैं सुनाने जा रही हूँ वो आज भी मेरे दिल के बहुत करीब है। ये कथा करीब २००२ में हमारे शहर की गली-मुहल्ले वाली संस्कृति से जुड़ी है। जहां आज भी विकास की हवा हौले-हौले ही बह रही है। सब … Read more

संस्कार’ – -पूनम वर्मा #लघुकथा

“मम्मी ! आजकल आप रोज चिड़ियों के लिए दाना-पानी क्यों रखती हैं ?” जिज्ञासु बंटी ने मम्मी को सकोरे में पानी रखते देखकर पूछा । ” मेरे प्यारे बंटी ! देख रहे हो आजकल गर्मी कितनी पड़ रही है ? सभी नदी-तालाब सूख गए हैं और खेतों में भी अभी फसल नहीं लगती । इसलिए … Read more

बेटे के लिए अंधा प्यार – के कामेश्वरी

प्रतीक माँ के सामने ग़ुस्से से खड़ा था । माँ उसे समझा रही थी कि बेटा ऐसे नहीं कहते वह तुम्हारी बहन है । प्रतीक अपने ग़ुस्से को क़ाबू में करते हुए कहता है कि माँ मुझे समझाने की ज़रूरत नहीं है मुझे मालूम है कि मुझे क्या करना है । बेटे के लिए अटूट … Read more

अंधे रिश्ते” – सुधा जैन

सौम्या कारपोरेट सेक्टर में काम करती है ।बहुत ही प्रतिभाशाली है। एक वर्ष पूर्व ही उसने अपने साथी नीरज से शादी की है ,और अपनी नई गृहस्थी का आनंद ले रही है ।उसी के ऑफिस में प्रमोशन लेकर राहुल आए हैं। राहुल ने सौम्या की प्रतिभा को पहचान कर उसे अपने प्रोजेक्ट में लिया है … Read more

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