ये बंधन सिर्फ कच्चे धागों का नहीं है – रेखा सक्सेना
“माँ, इस बार जब छुट्टी पर आया हूँ, तो सोच रहा हूँ कि रिया की शादी की बात आगे बढ़ाई जाए।” रितेश ने खाने की मेज़ पर बैठते हुए कहा। माँ ने रसोई से मुस्कुराकर जवाब दिया, “बहुत अच्छा सोच रहे हो बेटा, तेरे पापा की जगह तूने हमेशा निभाई है। रिया के लिए अच्छा … Read more