वजूद – गरिमा चौधरी 

सुधा अपनी छोटी सी बगिया में गुलाब की कलम लगा रही थी कि तभी फोन की घंटी बजी। स्क्रीन पर ‘आकृति’ का नाम देखकर उसके चेहरे पर एक सुकून भरी मुस्कान तैर गई। आकृति, उसकी इकलौती बेटी, जो पुणे में ब्याही थी। “नमस्ते माँ!” आकृति की आवाज़ में एक अलग ही चहक थी। “खुश रहो … Read more

पश्चाताप के आंसु – करुणा मलिक

खिड़की के बाहर होती मूसलाधार बारिश ने ‘शांति निकेतन’ वृद्धाश्रम के उस छोटे से कमरे में सन्नाटे को और गहरा कर दिया था। 70 वर्षीय वंदना देवी अपनी व्हीलचेयर पर बैठी, कांच पर फिसलती पानी की बूंदों को एकटक निहार रही थीं। उनकी गोद में एक पुराना, मखमली फोटो एल्बम रखा था, जिसके पन्ने अब … Read more

पति-पत्नी या दोस्त – डॉ उर्मिला सिन्हा 

कमरे की हवा में मोगरे और रजनीगंधा के फूलों की महक थी, लेकिन उस महक में एक अजीब सा भारीपन घुला हुआ था। यह वो रात थी जिसे दुनिया ‘सुहागरात’ कहती है, लेकिन काव्या के लिए यह एक ‘समझौते की रात’ से ज्यादा कुछ नहीं थी। वह पलंग के एक किनारे पर बैठी थी। उसकी … Read more

बड़े भाई हो, बाप मत बनो – डॉ अनुपमा श्रीवास्तव

“माँ! अब और नाटक नहीं होगा। कह दो भैया से कि आज ही हिसाब कर दें। मैं अब इनके टुकड़ों पर पलने वाला नहीं हूँ। मुझे मेरा हिस्सा चाहिए, अभी और इसी वक़्त!” सुमित की आवाज़ से ड्राइंग रूम की खिड़कियाँ थरथरा गईं। उसका चेहरा गुस्से से लाल था और उंगली सीधे अपने बड़े भाई, … Read more

मैं भी संपूर्ण हूँ – संगीता अग्रवाल

कहते हैं एक औरत तब सम्पूर्ण कहलाती है जब वो मां बनती है ….तो क्या जो औरत किसी वजह से मां नहीं बन पाती वो अपूर्ण होती है ? क्या केवल एक मां ना बन पाना इतना बड़ा गुनाह हो जाता है कि वो दुनिया की नजर में गुनहगार बन जाती है …. क्यों ये … Read more

बहू सही है – गीता वाधवानी

 सुंदरलाल और कमला देवी के दो पुत्र थे। बड़ा बेटा नीरज जिसका विवाह हो चुका था और वह अपनी पत्नी राशि के साथ अलग-अलग रहता था। छोटा बेटा धीरज जिसका अभी कुछ दिन पहले ही सुगंधा के साथ विवाह हुआ था, वे दोनों सुंदरलाल और कमला के साथ रहते थे।   सुंदरलाल रोज पार्क में सैर … Read more

सुमित्रा स्नेह छाया – रश्मि झा मिश्रा 

पीली मखमली गद्देदार कुर्सी पर सुमित्रा देवी को बड़े ही आदर के साथ बैठाया गया था। घर के सबसे बड़े हॉल के बीचों-बीच, जहाँ से वो पूरे घर पर नज़र रख सकती थीं। आज ‘रघुवंशी सदन’ में चहल-पहल कुछ ज़्यादा ही थी। घर की सबसे बुजुर्ग और मुखिया होने के नाते सुमित्रा देवी का सम्मान … Read more

दूसरी माँ – मुकेश पटेल

“दीदी, एक बात पूछूं? आप बुरा तो नहीं मानेंगी ना? मैं पिछले छह महीने से आपके यहाँ काम कर रही हूँ, घर का कोना-कोना चमक जाता है, लेकिन आपका चेहरा कभी नहीं चमकता। मैंने आपको कभी खुलकर हंसते हुए नहीं देखा। आपकी आँखों में हमेशा एक ऐसा सन्नाटा क्यों रहता है जैसे कोई बहुत बड़ा … Read more

सास के तेवर से बचकर रहना। – गरिमा चौधरी 

विदाई की शहनाई की गूंज अभी कानों में ताज़ा ही थी कि मायके की दहलीज छूट गई और ससुराल का भव्य दरवाजा सामने आ खड़ा हुआ। नैना, जिसने अभी-अभी नई-नवेली दुल्हन के रूप में इस ‘चौधरी विला’ में कदम रखा था, का दिल किसी सूखे पत्ते की तरह कांप रहा था। गाड़ी से उतरते ही … Read more

बेटियां कब पराई हो जाती है पता भी नहीं चलता – विभा गुप्ता

कार की खिड़की से पीछे छूटते पेड़ों को देखते हुए सुमन के चेहरे पर एक ऐसी मुस्कान थमी हुई थी जिसे दुनिया की कोई भी चिंता मिटा नहीं सकती थी। शादी के पूरे चार महीने बाद वह अपने मायके जा रही थी। बगल में ड्राइविंग सीट पर बैठे उसके पति, रजत, बार-बार उसे कनखियों से … Read more

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