वजूद – गरिमा चौधरी
सुधा अपनी छोटी सी बगिया में गुलाब की कलम लगा रही थी कि तभी फोन की घंटी बजी। स्क्रीन पर ‘आकृति’ का नाम देखकर उसके चेहरे पर एक सुकून भरी मुस्कान तैर गई। आकृति, उसकी इकलौती बेटी, जो पुणे में ब्याही थी। “नमस्ते माँ!” आकृति की आवाज़ में एक अलग ही चहक थी। “खुश रहो … Read more