सच्चा प्यार – एम. पी. सिंह

अशोक ओर अलका कॉलेज से ही एक दूसरे क़ो चाहने लगे थे. पहले दोस्त हुआ करते थे, फिर प्रेमी और अब साथ जीने मरने क़ी कसमें खाने लगे. पढ़ाई पूरी होते ही अशोक क़ो नौकरी मिल गई. दोनों ने अपने अपने पेरेंट्स से अपनी अपनी पसंद बता दी. थोड़ी ना नुकुर के बाद, अलका के … Read more

कलंक – खुशी

निशा ओ निशा कहा मर गई।सुनाई नहीं देता तुझे जी ताई जी क्या हुआ।चाय कहा है मनहूस,जी ला रही हूं।तेरी मां तुझे हमारे दरवाजे पर फेक कर अपने आशिक़ के साथ भाग गई। यह कलंक कभी नहीं मिटेगा।रोज़ यही बात सुनते हुए निशा बड़ी हो रही थी।उसका क्या दोष उसकी मां भाग गई और पिताजी … Read more

*यह कलंक कभी ना मिटेगा* – तोषिका

निखिल बेटा आकर खाना खाले, फिर दफ्तर भी तो जाना है। चिल्लाते हुए उसकी मां राधा बोली। अंदर कमरे से एक चीखती हुई आवाज आई “आ रहा हू मैं मां, तोड़ा सब्र करा करो।” राधा को अपने बेटे के मुंह से सुनते हुए ये शब्द काँटों की तरह चुभे पर फिर भी वो चुप रही। … Read more

यह कलंक कभी ना मिटेगा। – मधु वशिष्ठ

“आप थक गए होगे अब थोड़ी देर गाड़ी मैं चला लेता हूं, आप पापा के पास आकर बैठ जाओ|” बहुत समय बाद रजत और रमन अपने पिता के साथ गाड़ी में अकेले ही जा रहे थे| दिल्ली की पॉश कॉलोनी में एक दो मंजिला घर, जिसमें कि दोनों भाई ऊपर नीचे रहते थे| हालांकि वर्मा … Read more

मेरे जैसे बदनसीब दुनिया में कोई नहीं। – संजय सिंह

 रोहित ने जीवन में अच्छे से पढ़ाई की। खूब मेहनत की और आखिरकार उस मुकाम तक पहुंच गया ।जिसके लिए अक्सर हर व्यक्ति पढ़ता है ।रोहित को सरकारी विभाग में एक नीति के तहत नौकरी मिल गई। अब वह एक शिक्षक के रूप में नौकरी करने लगा। घर वाले खुश थे। रोहित भी खुश था। … Read more

बुढापा तो एक दिन सबका आना है – मंजू ओमर

अरे पापा आपने अभी तक नहाया नहीं, नहा लूगां बेटा तुम लोग चले जाओ तो फिर नहा लेगे। अच्छा ये बताओ कि तुम लोग तो रात की ट्रेन से जा रहे थे, ये अचानक से दिन की र्टेन क्यों ले ली। वो पापा रात मे परेशानी होगी। हंसते हुए राजेन्द्र जी बोले अरे बेटा अभी … Read more

नौ नहीं नब्बे – लतिका श्रीवास्तव 

रात भर आँखें जागतीं रहीं।दिल में बादलों की उमड़ घुमड़ उत्ताल पर हो रही थी।दीप्ति को बिस्तर पर चैन कहां था।कल उसकी जिंदगी का सर्वाधिक महत्वपूर्ण दिन होने वाला था।इतने महीनों की अथक मेहनत का परिणाम मिलने वाला था।कल उसका रिजल्ट डे था।सुबह ही टीवी और समाचार पत्रों में उसने देखा और पढ़ा था कि … Read more

यह कलंक कभी ना मिटेगा – संजय सिंह

 रुद्र के माता-पिता ने बड़े शोक के साथ उसे पढ़ाया लिखाया । इस काबिल बनाया कि वह इस समाज में अपना तथा उनका नाम रोशन करें। तकदीर ने साथ दिया और रुद्र अब एक अध्यापक बन गया ।माता-पिता उसकी तरक्की से काफी खुश थे। जिंदगी आगे बढ़ रही थी ।रुद्र अपनी मेहनत से अपने अध्यापन … Read more

टूटे भ्रम – निधि गुप्ता

अनामिका के लिए उसके पिता, प्रोफ़ेसर विद्यानाथ, किसी महापुरुष से कम नहीं थे। शहर के सबसे प्रतिष्ठित कॉलेज में समाजशास्त्र के विभागाध्यक्ष विद्यानाथ जी अक्सर मंचों से समानता, रूढ़िवाद के अंत और आधुनिक विचारों की बड़ी-बड़ी बातें किया करते थे। अनामिका बचपन से ही दर्शकों की पहली कतार में बैठकर अपने पिता को तालियों की … Read more

रेशमी धागों का अनकहा कर्ज – नेहा पटेल

सावन का महीना अपनी पूरी रंगत पर था। बाहर हल्की-हल्की बारिश हो रही थी और मिट्टी की सौंधी खुशबू महानगर के उस आलीशान फ्लैट की बालकनी तक पहुँच रही थी। आज रक्षाबंधन का दिन था। सुबह से ही घर में एक खास तरह की चहल-पहल थी। अनिकेत अपने कमरे में तैयार हो रहा था। उसने … Read more

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