प्रिया एक वर्किंग महिला,शाम को काम से घर आने के बाद पूरे दिन में एक बार बच्चों को लेकर एक घंटे के लिए निकलती हैँ पार्क में ! वहाँ सभी औरतें ठीक हैँ ,बस एक हैँ जिसके बच्चें प्रिया के हम उम्र हैँ 6 और 3 साल के ! हर दिन प्रिया के बच्चों को देखकर बोलती हैँ – कितने दुबले पतले हैँ बच्चें देखो इनके ! लगता हैँ कुछ खाते पीते नहीं ! जब माँ नौकरी वाली होगी तो कहाँ से बच्चों के खाने पीने पर ध्यान दे पायेंगी ! तभी तो ऐसे हैँ ! जब बच्चें आपस में लड़ते दोनों के तो वो औरत हंसती और कहती – देखो
,मेरे बच्चें कितने स्ट्रोंग हैँ ! कैसे धक्का दे दिया उसे ! प्रिया ज्यादा ध्यान ना देती उसकी बातों पर ये सोचकर बच्चों को तो रोज इसी पार्क में खेलना हैँ ! किसी से झगड़ा करना सही नहीं ,इसका प्रभाव बच्चें पर पड़ेगा ! अपने बच्चों का हाथ पकड़ घर आ जाती ! पर एक दिन प्रिया फ़ोन पर बात कर रही थी कि तभी बच्चों में झगड़ा हो गया होगा ! उस औरत ने प्रिया के बेटे के चेहरे पर एक जोरदार तमाचा ज़ड़ दिया क्यूंकी आज प्रिया के बेटे ने भी गुस्से में उसके बेटे को धक्का दे दिया था !
प्रिया गुस्से में आयी ! अपने सिस्कते हुए बेटे को चुप कराया ! वो औरत बोलने में लगी थी – कितना बतमीज लड़का हैँ ,माँ बाप ने यहीं सिखाया हैँ ! जब माँ बाप ध्यान ही नहीं देते ! पूरा दिन बाहर रहेंगे तो बच्चें ऐसे होंगे ही !
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आज प्रिया का पारा भी चढ़ गया ! वो बोली – ओ मैडम ,बहुत दिनों से सुन रही हूँ तुम्हारी बकवास ! जब खुद के बच्चें किसी को मारे तो हंसती हो ! बच्चें सभी शरारती होते हैँ किसी के भी हो ! मैने कभी तेरे बच्चों को कुछ कहा ! मेरे संस्कार ऐसे नहीं ! बच्चें हैँ एक जगह खेलेंगे तो थोड़े बहुत झगड़ेगे भी फिर अगले पल खेलने लगेंगे ! और खबरदार जो बार बार मेरे बच्चों को दुबला पतला ,बतमीज कहा तो मेरे बच्चें हैँ उनका कैसे ख्याल रखना हैँ मुझे पता हैँ ! मैं और मेरे पति इनके लिए ही कमाने ज़ाते हैँ !
आज बता रही हूँ तेरा पति मेरे ही ऑफिस में काम करता है ,रोज मालिक से जल्दी सैलरी देने की बोलता हैँ ,तुझे पता हैँ तेरे और तेरे बच्चों के लिए मालिक के पैर भी पड़ जाता हैँ ! अच्छा हो अगर तू इधर ऊधर की पंचायत की जगह अपने पति का कोई काम करके हाथ बांट दे तो शायद उसे नौकरी के बाद रात में
सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी ना करनी पड़े ! ऐसा ही रहा तो दबाव में आकर वो कुछ कर ना ले ! कई बार कहते सुना हैँ उसे कि आत्महत्या कर लूँ सोचता हूँ ,परिवार को भी नहीं पाल पा रहा ठीक से ! और सिस्कियां भरता हैँ अपने दोस्त से बात करते हुए !
आज वो औरत बुत सी बनी खड़ी रह गयी ! उसकी आँखों से आंसू अनवरत बहते रहे ! प्रिया अपने बच्चों का हाथ पकड़ घर आ गयी !
मीनाक्षी सिंह की कलम से
आगरा