अपने और पराए, वक्त ने बतलाए। – परमा दत्त झा

मां के आपरेशन के लिए पैसे का इंतजाम हो गया है -रानी अपने पति राजेश को कह रही थी।

कहां से ,किसने दिया इतने पैसे -राजेश अकचकाते हुए पूछा था।

अरे मेरे हरि काका ने -रानी सिर झुकाए बोली।

अभी मामले की नजाकत को देखते हुए दस लाख उस पेपर वाले हरि काका ने जमा कराए।

फिर तो बंसल में इलाज हो गया और मां भी दस दिन बाद वापस घर आ गई।

राजेश शकुन्तला देवी का इकलौता बेटा है। शकुन्तला देवी का मायका बहुत मजबूत है।आठ भाईयों के बीच इकलौती बहन।

शकुन्तला देवी के चार बच्चे हुए तीन बेटियां और एक बेटा राजेश।यह एम बी ए करके एक फार्म में मैनेजर हैं।इसकी पत्नी रानी एक गरीब मां बाप की बेटी है। शादी में दहेज न मिलने के कारण शकुन्तला देवी उसे बहुत सुनाती और बात बात पर नीचा दिखाती है।

आज चार साल शादी के हुए हैं और पूरे समय शकुन्तला देवी के मायके के लोग भरे रहते हैं।वह दिन-रात आवभगत में लगी रहती है और मुफ्त की नौकरानी की तरह सारा काम करती है।

मगर अभी जब शकुन्तला देवी की तबियत खराब हुई और इलाज में दस लाख खर्च की बात हुई तो सारे भाईयों ने और परिवार ने हाथ खींच लिया।

वैसे भी जीजी बूढ़ी हो गयी है,अब इतना पैसा खर्च करना बेकार है।-यह छोटा भाई था।

अरे दे भी दे तो लौटाएगी कहां से?उसके पास ले देकर यह वन बी एच के है।आज इसकी कीमत मुश्किल से पांच लाख होगी।-यह मंझला था जो ज्ञान दे रहा था।

नतीजा आज इस संकट की घड़ी में मैके खामोश होकर मरने का इंतजार कर रहा था। दूसरी ओर हरि काका जो बहू रानी का चचेरा चाचा है झुग्गी में रहता है और पेपर बांटता है।किसी भी पारिवारिक काम में लोग उसे नहीं बुलाते।

मगर आज जब सब ओर से निराशा हाथ लगी तो फरिश्ता बनकर यही आया। इलाज हुआ और यह ठीक होकर घर आ गयी।

जब इसे पूरी घटनाओं की पता चली तो इसका दिल टूट गया।वह रोने लगी उसे पता चल गया कि कौन अपना और कौन पराया यह वक्त बताता है।देखो ,अपने पराए का ज्ञान समय ने अच्छे से समझा दिया।यही कारण था कि देखने जब हरि बाबू आये तो यह खुद चाय बनाकर लायी जबकि भाइयों से मिलने तक से मना कर दिया।

#देय वाक्य -अपने और पराए, वक्त ने बतलाए।

#दिनांक-13-3-2026

#शब्द संख्या-500कम से कम।

#रचना मौलिक और अप्रकाशित है।

#रचनाकार-परमा दत्त झा, भोपाल।

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