*अपने और पराए – वक्त ने बताए* – तोषिका

आज मुझे *अपने और पराए – वक्त ने बताए* वरना मैं हमेशा ही धोखे में ही रहती रोते हुई मुस्कान बोली।

उसकी साथ बैठी दोस्त रूपा ने उस से पूछा “ऐसे क्यों बोल रही हो? क्या हुआ? किसी ने कुछ कहा क्या?” मुस्कान चाह कर भी अपने मुख से एक शब्द भी नहीं निकाल पा रही थी बस अश्रु से ही अपने टूटे दिल का हाल बयान कर रही थी।

रूपा ने उसको पानी दिया और सांत्वना देते हुए शांत कराया और कुछ घंटों के बाद वो तोड़ी शांत सी हुई फिर सिसकती आवाज में बोली। मेरे साथ बहुत बड़ा धोखा किया मेरे माता पिता ने। रूपा जिसको कुछ नहीं समझ आ रहा था बोली “मुस्कान मुझे विस्तार में बताओ क्या बात है? कोई भी माता पिता अपने बच्चे के साथ दिखा नहीं कर सकते है।

उधर बिजली भी कड़क रही थी और उसी कड़कती और दर्द भरी आवाज में मुस्कान बोली “मुझे भी यही लगता था, पर मैं गलत थी। सब के मां बाप ऐसे नहीं होते है। मेरे माता पिता ने अपना कर्ज चुकाने के लिए मुझे किसी बड़े आदमी को बेच दिया है, ताकि वो अपने आराम की जिंदगी जीएं और मेरे से पीछा छुड़वा ले।

रूपा बोली “जरूर तुम्हे कोई गलत फहमी हुई होगी मुस्कान, मुझे नहीं लगता काका काकी ऐसा करेंगे, मैं उनको बचपन से जानती हू।”

मुस्कान एक दम से गुस्से में झल्ला के बोली “अगर इतना ही भरोसा है अपने काका काकी पर तो तुम ही उनकी बेटी बन जाओ और करवा लो शादी” ये बोलते हुए वो वहां से चली गई और रूपा बस आश्चर्यचकित हो कर मुस्कान को वहां से जाते हुए देखती रही।

मुस्कान जब घर आई तो उसने देखा कि उसके मां बाप घर की सजावट कर रहे थे, जिसे देख वो और भड़क गई और पैर पटकते पटकते अपने कमरे में चली गई। उसके माता पिता उसके बर्ताव को देख कर हैरान हुए पर कुछ नहीं बोले। 

कुछ घंटों बाद उसकी मां ने दरवाजे पर खटखटाते हुए बोला कि बेटा त्यार हो जाना शाम को घर पर मेहमान आने वाले है। मुस्कान ने अंदर से कोई जवाब नहीं दिया।

उधर अंदर बैठी वो सब सुन रही थी और उसने घर से भाग जाने का फैसला लिया। वो अपने कमरे की खिड़की से, कपड़ों के सहारे घर के बाहर निकली और वह से भाग कर वो रूपा के घर आ गई। वहां उसने रूपा से मदद मांगी और कहा कि उसको कुछ दिन रहने दे क्योंकि वो अभी इस शादी के लिए तैयार नहीं है, अभी उसको पढ़ाई करनी है। रूपा बोली क्या पता तुम्हे गलत लग रहा हो मुस्कान, एक बार अपने माता पिता से बात करके तो देखो। मुस्कान बोली “देख रूपा मुझे जो सुनना था, समझना था मैं समझ गई हू, अगर तुम मेरी मदद नहीं कर सकती तो कोई नहीं, मैं कही और चली जाऊंगी।” रूपा बोली “ऐसा नहीं है यार मुझे भी तेरी फिक्र है।” 

शाम होने को आई थी और मुस्कान कमरे से बाहर नहीं निकली थी तो उनके दिल बड़ी ज़ोर से धड़क रहे थे, और दरवाजा खटखटाने पर भी कोई आवाज नहीं आ रही थी, उन्होंने दरवाजा धक्का दे कर खोला और देखा कि मुस्कान वहां है ही नहीं। ये सारा माहौल देख कर उनको समझ नहीं आ रहा था क्या करे कहा जाए उधर पार्टी के लिए मेहमान आने वाले थे। सोचते सोचते मुस्कान की मम्मी के दिमाग में घंटी बजी साथ ही में घर की घंटी बजी , घंटी सुनकर वह अपने पति को बोली कि वो दरवाजा खोले और वो रूपा को कॉल करती है।

रूपा ने फोन उठाया और उसने पूछा कि वो मुस्कान की शादी क्यों करवा रहीं है। अभी तो उसको आगे की पढ़ाई करनी है।

उधर मुस्कान की मां अचंभित हो कर बोली किसने कहा हम अभी मुस्कान की शादी करवा रहे है? रूपा बोली मुस्कान ने आपकी सारी बातें सुन ली थी, कि आप लोगों ने कर्ज चुकाने के लिए उसका रिश्ता कही और पक्का कर दिया है।

उसकी मां को कुछ नहीं समझ आ रहा था फिर बोली कि बेटा तुम्हे कोई गलत फहमी ही है, मुस्कान हमारी अपनी बेटी है, हम उसके साथ ऐसा क्यों करेंगे बल्कि आज तो हमने उसके अच्छे नंबर आने की खुशी में पार्टी भी रखी है, रूपा फिर बोली तो वो लड़का कौन था जिसकी मुस्कान बात कर रही थी?

उसकी मां ने बोला कि अरे बेटा वो तो हमारी मदद के लिए आए थे और साथ में अपनी शादी का न्योता देने आए थे।

रूपा गहरी साँस लेकर बोली “ओ ओ अच्छा अच्छा, मैं मुस्कान को बोला था आप लोग ऐसे कर ही नहीं सकते हो, वो मेरे साथ ही है, मैं उसको भेजती हू। मुस्कान की मां बोली हां बेटा।

उधर दरवाजे को देख कर मुस्कान के पिताजी मुस्कुराए और उनका अंदर स्वागत किया, और नाश्ता पानी दिया। कान में उसकी मम्मी ने खुसपुसाते हुए बोला कि मुस्कान आ रही है घर।

रूपा ने उधर सारी बात मुस्कान को बताई और बोली तुम ऐसे ही ज्यादा सोच रही थी, चलो अब घर जाओ जल्दी से सब तुम्हारी राह देख रहे है। मुस्कान को यकीन नहीं हुआ पर फिर भी रूपा की बात मान कर वह चली गई। घर के दरवाजे पर जब वो आई उसने देखा कि उसके साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ है, और उसकी मम्मी उसको देखते ही अंदर ले आई ताकि वो फिर से न भाग सके और उसको उस आदमी के आगे लाकर खड़ा कर दिया जिसको उन्होंने बेच दिया था। वह आदमी मुस्कान की असल की खूबसूरती देख मोहित हो गया और अपने साथ ले गया। मुस्कान वहां से बस चिल्लाती रह गई आप मेरे अपने होकर मेरे साथ परायों जैसा बर्ताव कैसे कर सकते हो और उधर दरवाजे पर दोनों बस उसकी विदाई पर मुस्कुराते रहे।

लेखिका

तोषिका

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