अनजानी – प्रशांत तिवारी : Moral Stories in Hindi

जान पहचान मिलना जुलना रिश्ते संबंध सब पहले से तय है 

मगर कुछ लोग जो अचानक जीवन में आते हैं उसके पीछे कोई कारण ज़रूर होता है वो इंसान या तो कुछ सबक दे कर जाता है या सीख 

आइए जानते हैं मेरी इस अनोखी कहानी में जिसे लिखने का एक छोटा सा प्रयास मेरे द्वारा किया गया है 

उम्मीद है आप सभी को पसंद आएगी इस पर अपना सुझाव अवश्य दें 

इस कहानी के मुख्य पात्र हैं 

राघव और रूही 

राघव  -जो एक मिडिल क्लास फैमिली से आता है जो बहुत समझदार और सुलझा हुआ इंसान है 

मिडिल क्लास फैमिली से होने के कारण उसे काफी संघर्ष करना पड़ा जीवन में जैसा की अक्सर मिडिल क्लास फैमिली में होता है 

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रूही-  जो कि एक अच्छे खासे सक्षम परिवार से थी 

बहुत ज़्यादा सोचना नहीं बस जो मन में आया कर देना और जिंदगी के मज़े लेना 

ये दोनो अलग अलग परिवार और दो अलग शहरों से थे 

राघव को आगे की पढ़ाई के लिए दूसरे शहर जाना पड़ा 

वहीं रूही भी और पढ़ने के लिए दूसरे शहर आ गई 

ये बात उस दौर की है जब लोग रिश्तों को अधिक महत्व दिया करते थे आज की तरह नहीं की सोशल मीडिया पर मिले और बिछड़ गए तब मोबाइल फोन सोशल मीडिया कुछ भी नहीं था 

इसलिए रिश्ते सब कुछ थे 

रूही और राघव दोनों बहुत ही अलग स्वभाव के थे पढ़ने में दोनो ही कुशल थे मगर उनमें कुछ असमानताएं थी 

राघव को पता था की आगे चलकर परिवार की मदद करनी है 

इसलिए वो बस अपने में ही रहता था 

और रूही सिर्फ़ आज में जीती थी कल के बारे में ज़्यादा सोचना नहीं 

एक कॉलेज में होने के कारण दोनों का आमना सामना होने लगा मगर वो अक्सर इसे नज़र अंदाज कर दिया करता था 

क्योंकि इससे पहले उसने कभी किसी लड़की से बात नहीं की थी न उसे समझ आता था कि वो क्या बोले 

मगर रूही नोट्स के बहाने से बात कर लिया करती थी 

तो उसे भी मजबूरी में जवाब देना पड़ता था 

फिर क्या समय बीतता गया दोनों की पढ़ाई पूरी हो गई थी 

तब तक दोनों अच्छे दोस्त बन गए थे 

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नौकरी के लिए जाने से पहले राघव ने रूही को अपने दिल की बात बता दी की वो उससे शादी करना चाहता है 

अपने माँ बाप से उसके बारे में बात करेगा 

उसने हां कर दी रूही को भी वो पसंद था 

मगर किसे पता था कि किस्मत में कुछ और ही है 

रूही के घर लौटते ही उसकी शादी तय हो गई 

किसी मानव नाम के लड़के से जो कि एक अच्छे परिवार से था और जिसकी नौकरी भी अच्छी थी वो खुद भी अच्छा इंसान था 

फिर इस सब के चलते वो किसी को राघव के बारे मे नहीं बता पाई और शादी कर ली 

राघव को पता चला तो वो समझ गया कि उसकी कोई मजबूरी रही होगी वो ऐसी लड़की नहीं थी जो धोखा दे 

फिर क्या था राघव ने अपनी किस्मत को स्वीकार कर लिया और अपने काम में ध्यान देने लगा 

रूही के हसबैंड की नौकरी उसी शहर में थी जहां राघव नौकरी करता था मानव बहुत ही सुलझा हुआ और समझदार इंसान था उसे राघव और रूही के बारे में सब पता था क्योंकि रूही उसे राघव के बारे में बता चुकी थी 

राघव जब कभी उन दोनों से मिलता तो काफी सारी बातें होती 

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मानव और राघव अच्छे दोस्तों की तरह मिलते थे 

रूही कभी राघव से पूछती की शादी कब करेगा तो वो कहता उस जैसी कोई मिलेगी तो कर लेगा 

मगर उसे पता था कि रूही तो सिर्फ एक ही है कोई और नहीं 

इस तरह दोनों अपना बीता कल भुला कर जीवन जीने लगे 

जहां रूही अपने शादीशुदा जीवन में व्यस्त हो गई 

वहीं राघव ने फिर कभी शादी नहीं की 

लोग मिले जिंदगी में मगर 

साथ चले वो हर डगर 

अफसोस बस ये रह गया 

न बन सके वो हमसफर 

जिंदगी में लोग मिलते तो हैं मगर किस्मत तय करती है कि साथ कब तक का है 

  Story by ©️ Prashant Tiwari 

कहानी कैसी लगी कॉमेंट में ज़रूर बताएं धन्यवाद

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