अनजान फोन से दिल के रिश्ते मजबूत हो गए – ममता गुप्ता

आज सुबह से ही बार बार फोन बज रहा था। जैसे ही राधा फोन रिसीव करती वैसे ही फोन कट हो जाता। पता नही आज सुबह से कौन फोन किए जा रहा है औऱ बात भी नही करता/करती हैं।।

“राधा बार बार अनजान नम्बर से फोन आने से परेशान हो रही थी,उस फोन की वजह से वो घर के कामों में भी ठीक से मन नही लगा पा रही थी।

राधा को चिंतित देख पति मोहन ने पूछा-“क्या हुआ..? तुम इतनी परेशान क्यो हो..? किसी ने कुछ कहा क्या..?

“पता नहीं..आज सुबह से ही अनजान नम्बर से फोन आ रहे हैं। जैसे ही फ़ोन रिसीव करती हूं तो कट जाता है..” आज पता नहीं कौन मुझे बार बार अप्रैल फूल बना रहा है।।

राधा ने जवाब देते हुए कहा।

मोहन ने राधा के फोन पर नम्बर देखते हुए कहा-“ये नम्बर तो मेरे पास भी नहीं है.. और ना ही किसी रिलेटिव का लग रहा है। फिर भी तुम अपनी चिंता को दूर करने के लिए एक बार फोन मिला ही लो..!!

ताकि तुम्हारी परेशानी भी खत्म हो।

मोहन ने कहा।।

हाँ जी!! तुम ठीक कहते हो,एक बार मैं ही फोन मिलाकर देख लेती हूँ, ताकि पता तो चले आखिर कौन मुझे पागल बना रहा है।।

राधा फोन मिलाने लगी।

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उस नम्बर पर घण्टी जा रहीं थी।

तभी किसी ने कॉल उठाया औऱ राधा बोली-

“हैलो” आप कौन”

सुबह से इस नम्बर से मेरे फ़ोन पर कॉल आ रहा था,अब आप कौन बोल रही/  रहे हो कृपया करके बताए।।

फोन पर एक दबी सी आवाज में दीदी!! “मैं आपकी सरला।। मुझे माफ़ कर दो दीदी…!!

“सरला तुम”…क्या ये तुम्हारा नम्बर हैं,पर तुम्हारा नम्बर तो मेरे पास सेव हैं। बच्चे, रोहित सब कैसे हैं..?

राधा की आवाज में ख़ुशी झलक रही थी।।

हाँ !!”दीदी यह मेरा नम्बर है,आपसे माफी मांगने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी,इसलिए बार बार फोन कट कर रही थी…। मुझे माफ़ कर दो दीदी।।

अरे!!पागल है क्या सरला। औऱ कौनसी गलती की माफी मांग रही है तू..मैंने तो तेरी कोई बात कभी दिल से लगाई ही नहीं…मैने तुझे अपनी देवरानी नही छोटी बहन माना,औऱ छोटों की बातों का क्या बुरा मानना। मुझे तो खुशी इस बात की है कि तूने पूरे 2 साल बाद मुझसे बात की,क्या तुझे अपनी भाभी की याद नहीं आई..




राधा ने थोड़ा गुस्सा जताते हुए कहा।।

“ये आप कैसी बात कर रही हो दीदी” मुझे तो आपकीं हर वक्त याद आती है, औऱ अपनी गलती पर पछतावा भी होता है, जब मुझे याद आता हैं कि कैसे मैने आपके औऱ रोहित के बारे में गलत सोचा।। ये तक भूल गई कि सास ससुर के चले जाने के बाद आपने औऱ भैया ने रोहित को बेटे की तरह प्यार दिया,प्यार में कमी न आ जाये इसके लिए आपने अपनी संतान को जनम देने के बारे में भी नही सोचा,उसे पढ़ाया लिखाकर एक काबिल इंसान बनाया। एक हंसता खेलता परिवार था। औऱ मैने क्या किया

उस हंसते खेलते परिवार में आकर आग लगा दी। रोहित को अपनी भाभी औऱ भैया के बोलचाल से मुझे नफरत होने लगी..!! उसकी पहली तनख्वाह पर आपका हक था क्योंकि आप उसकी भाभी नही भाभी माँ थी,लेकिन मुझे यह बात कील की तरह चुभ गई ,पत्नी से ज्यादा भाभी को  तवज्जो देना ठीक है क्या।

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बस उस दिन गुस्से में मैंने आपको इतने अपशब्द बोले कि शायद ही किसी न बोला हो,उसदिन आप चुपचाप सुनती रही, शायद उस चुप्पी का कारण यही था कि घर टूटने से बच सके,कभी भाई भाई से जुदा न हो।लेकिन मेरी जिद ने भाई को भाई से जुदा कर दिया.. मुझे उस घर मे रहना नहीं था शायद पागल थी जो आपके प्यार औऱ त्याग को समझ नही पाई औऱ रोहित को अलग घर में रहने के लिए मजबूर किया…यह सब कहते कहते सरला का गला रुंध सा गया।

मुझे माफ़ कर देना दीदी…मैं आज तक पछतावे की आग में जल रही हूं।।

सच मैं दीदी मैं आपको मुँह दिखाने के लायक नही हूँ इसलिए कॉल पर माफ़ी मांग रही हूं।।

सरला ने  विनम्रता से कहा।।

अरे!!छोटी मुझे तो कुछ याद ही नहीं…!! और तू ये बार बार माफ़ी क्यो मांग रही है।..? अब छोड़ बीती बातों को और ये बता तू कब आ रही है।।

राधा ने बात पलटते हुए कहा।।

दीदी!! मुझे माफ़ कर दो…प्लीज़ प्लीज यह कहकर सरला रोने लगी।

उसकी रुआंसी आवाज सुनकर राधा भी रोने लगी …राधा की आंखों में आंसू देख मोहन ने फोन लिया …

हैलो सरला.. मैं मोहन

सुनो!! राधा ने तुम्हे माफ कर दिया है। तुम्हे तुम्हारी गलती का अहसास हुआ हमारे लिए इतना ही काफी है, औऱ अब तुम भी बीती बातों को भूल जाओ जो होता है अच्छे के लिए होता,तुम्हे दूर रहकर ये अहसास हुआ कि एक हमने रोहित के लिए क्या त्याग औऱ समर्पण किया वो काफी है, अब तुम भी अपने आपको संभालो..!!

औऱ हो सके तो एक बार हमसे मिलने आ जाना ।

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मोहन ने कहा।।

ठीक है!!” भाई साहब …सच मैं मुझे अपनी गलती का अहसास हो गया। अब आगे से कभी ऐसी गलती नहीं होगी।।

औऱ हम कल ही आपके पास लौट रहे है, हमेशा हमेशा के लिए।।

सरला ने खुश होते हुए कहा।।

यह सुनकर राधा औऱ मोहन के चेहरे पर खुशी झलक पड़ी..औऱ राधा मन ही मन कहने लगी चलो अच्छा हुआ अनजान नम्बर था लेकिन दिल के रिश्ते फिर से मजबूत हो गए।।

राधा और मोहन खुश थे कि फिर से परिवार एक हो गया।।

दोस्तों।। आपकों मेरी कहानी कैसी लगी बताना जरूर।।

धन्यवाद

#अन्याय 

ममता गुप्ता

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