अजनबी जैसा व्यवहार क्यों – निशा जैन : Moral stories in hindi

आज फिर शेफाली और समीर एक दूसरे से बिना बाते किए करवट बदल कर सो गए। अब तो ये बात आम हो चुकी थी कि सोते समय वो दोनो अपने अपने मोबाइल चेक करके बिना एक दूसरे से बात किए सो जाते थे।उनके आपसी(वैवाहिक) रिश्ते बेरंग जो पड़ चुके थे

शेफाली और समीर की शादी को लगभग 12 साल हो चुके थे और दो बच्चे भी थे एक  छोटा बेटा और एक बड़ी बेटी

उनका पारिवारिक जीवन अच्छे से चल रहा था बच्चे दोनो अच्छे स्कूल में थे। समीर की भी बैंक में अच्छी पोस्ट पर नौकरी थी। शेफाली पढ़ी हुई , समझदार औरत थी पर उसने नौकरी के बजाय अपने परिवार को प्राथमिकता देते हुए गृहिणी बनकर रहने का चुनाव किया बजाय नौकरी करने के।

 समीर के माता पिता का पूरा ध्यान रखना, समीर और बच्चों का ध्यान ,घर बाहर, रिश्तेदारी, बच्चों के स्कूल से संबंधित सारे काम शेफाली भली भांति कर लेती थी। 

 सुबह पांच बजे से लेकर रात के 10 बजे तक उसके काम खत्म होने में ही नही आते पर चेहरे पर एक शिकन तक नही आती। 

          पर उन दोनो का वैवाहिक जीवन अब पहले जैसा नही रहा। दोनो साथ में सोते जरूर थे पर अलग अलग दिशा में मुंह करके। ऐसा भी नहीं था कि उनमें आपस में लड़ाई हो पर पता नही रात होते होते किसी न किसी बात पर उनकी बहस आए दिन हो जाती और फिर वही दोनो को मन मारकर सोना पड़ता। 

उनके बीच का रोमांस घर गृहस्थी और बच्चों की जिम्मेदारी में कही दब कर रह गया था। दोनो चाहते हुए भी एक दूसरे को क्वालिटी टाइम नही दे पा रहे थे और जो इच्छा एक पति को पत्नी से और पत्नी को पति से पूरी होने की चाहत होती है वो हो नही पा रही थी।

          शायद इसी वजह से दोनो आपस में चिड़चिड़े हो गए थे । कहने को दोनो पति पत्नी थे और सबके सामने लोग उनके जोड़े की तारीफें करते नहीं थकते थे पर अपने कमरे में दोनो अजनबी जैसा व्यवहार करते थे।

          कभी शेफाली का मन होता तो कभी समीर जल्दी सो जाता  कभी शेफाली बच्चो के साथ जल्दी सो जाती और समीर इंतजार करता रह जाता बस ऐसे ही दोनो की रातें निकल जाती अपनी मन की बातें एक दूसरे से किए बिना।

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          ये वही शेफाली थी जिसको समीर के बिना कभी  नींद तक नही आती थी और अपनी ननद और सहेलियों से बोलती” क्या यार आप लोग कैसे सो जाते हो अपने पति के बिना, दीदी आपको भी  जीजू के बिना नींद आ जाती है? मुझे तो समीर के बिना बिलकुल नींद नहीं आती जब तक मैं उनके चिपक कर नही सोती”

           और सब उसकी बातों पर हंसते और बोलते बेटा अभी नई नई शादी हुई है तेरी, बस दो साल हुए है और अभी तू फ्री है। अभी होने दे एक बार बच्चे फिर देखना कहां तेरा पति और कहां तू तुझे भी अपने पति के बिना आ जायेगी नींद।

           अरे नही ऐसा कभी नहीं होगा , मैंने कितनी ही कोशिश कर ली उनके बिना सोने की पर बड़ी मुश्किल होती है यार सोने में और कहकर शेफाली शरमा जाती।

           और सच में शेफाली और समीर बच्चों के होने के बाद भी  कोशिश करते कि रात का समय तो कम से कम एक  दूसरे को देना चाहिए ताकि थोड़ा समय एक दूसरे के साथ बिता सकें क्योंकि दिन में तो दोनो अपने अपने काम में बिजी रहते थे और फिर परिवार भी साथ ही था। इसलिए  उनका दिन तो नही पर रातें अक्सर साथ ही गुजरती थी। और एक दूसरे के साथ रहने से उनकी थकान भी चुटकियों में दूर हो जाती थी।

            पर धीरे धीरे जब बच्चे  थोड़े बड़े हो रहे थे  तो सबका एक साथ सोना थोड़ा मुश्किल हो जाता तब दोनो ने तय किया कि समीर अलग कमरे में सोएगा और शेफाली बच्चों को सुलाने के बाद समीर के पास सो जायेगी पर ऐसा हुआ नही क्युकी  बच्चों को सुलाते सुलाते कब शेफाली को नींद आ जाती पता ही नही चलता और जब सुबह आंख खुलती तो सास ससुर जी पहले से जागे होते। सुबह समीर का मुंह सूजा होता वो अलग।

           फिर सुबह शेफाली अपने काम में लग जाती और समीर भी बच्चों को स्कूल छोड़ने के बाद अपने ऑफिस निकल जाता। काम से फ्री होती तो बच्चों का होम वर्क, स्कूल प्रोजेक्ट में लग जाती और दिन भर में झपकी भी नही ले पाती। शाम को फिर वही घर का काम । समीर के आने के बाद समीर चाहता कि शेफाली थोड़ी देर उसके साथ भी बैठे, थक हार कर आया है तो दो पल उससे बात करे पर शेफाली सोचती जल्दी से बचा हुआ काम निपटा लूं ताकि फिर आराम से बैठ सकूं और अपने काम में लग जाती

           समीर अपने टीवी और फोन में मस्त हो जाता फिर शेफाली चाहती कि थोड़ी देर साथ बैठे तब तक बच्चे आ जाते और फिर उनके सामने दोनो को आपस की बातें करना उचित नही लगता। 

           अब शेफाली और समीर का  पति पत्नी का रिश्ता तो लगभग खत्म सा ही हो गया क्योंकि दोनो मां बाप जो बन गए थे । लगता समीर बस पैसे कमाता है और शेफाली घर का काम करती है। जैसे जैसे साल बीत रहे थे, उनके बीच बाते बहुत ही कम होती जा रही थी। उनका वैवाहिक जीवन तो जैसे मर ही चुका था 

उनके बीच रोमांस की जगह अब बहस ने ले ली थी पर पति पत्नी के लिए जैसे और जरुरते पूरी करना जरूरी है वैसे ही एक दूसरे की जरूरत भी पूरी करना बहुत जरूरी होता है(शारीरिक जरूरत) नही तो मन बैचेन रहता है वो ही उन दोनो के साथ भी था। दोनो थके हुए लगते थे। घर का माहोल भी चुप चुप सा  ही रहता।

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           और जिस दिन कभी  (महीने में एक या दो बार) दोनों साथ होते तो दोनो बड़े ही खुश नजर आते , खिले खिले से।

           शेफाली बहुत सोचती कि आज समीर को जरूर खुश करेगी । पर उस दिन समीर ऑफिस से ही उखड़ा हुआ आता और बस फ्री होकर अपने कमरे में चला जाता। शेफाली कुछ बोलना भी चाहती तो समीर सुनता ही नही था। शेफाली भी मन मारकर बच्चो के साथ ही सो जाती। दोनो बाहर से शांत होते पर मन में अजीब हलचल मची रहती थी जो दोनो को एक दूसरे के साथ मिलने से ही खत्म होती और ऐसा बहुत कम होता था।

           संडे सैटरडे कहने को तो ऑफिस और स्कूल की छुट्टी होती पर शेफाली जैसी ग्रहिणियों के लिए वो दिन कुछ ज्यादा ही बिजी होते थे। उसका थोड़ा मन करता बाहर घूम आए तो समीर बोलता मैं अभी दो दिन बिलकुल बाहर नहीं जाऊंगा, मैं इतना बाहर रहता हूं तो बस घर में ही रहूंगा तो बेचारी शेफाली किसके साथ जाए।

उसका मन होता लॉन्ग ड्राइव पर जाने का तो समीर बोलता मैं इतना कार चलाता हूं डेली तो बस अब दो दिन कुछ नही बस आराम और जब कभी समीर बोलता बाहर चले तो शेफाली कुछ बहाना बना देती। और थोड़ा टाइम कभी पास बैठते तो समीर फोन मे लगा हुआ रहता और शेफाली के बोलने के वावजूद उसे सुनता नही था बस हो जाती दोनो मे लड़ाई शुरू और दोनो अलग अलग कमरे में दिखते फिर। दोनो की लाइफ नीरस सी हो गई थी ।

            बहुत दिनो बाद शेफाली की बचपन की सहेली पूनम का फोन आया तो शेफाली ने बात ही बातों में अपने और समीर के बारे में बताया कि किस तरह दोनो एक दूसरे के लिए अजनबी बनते जा रहे है जबकि शादी के इतने सालों बाद तो दोनो का रिश्ता और मजबूत होना चाहिए

पता नही किसकी नजर लग गई मेरे रंग भरे रिश्ते को जो अब बेरंग सा होता जा रहा है कहते कहते शेफाली भावुक हो गई

           चिंता मत कर यार,ये तो घर घर की कहानी है। मेरा और राजेश का भी यही हाल था कुछ दिनो पहले। हम दोनो बहुत ही परेशान हो गए ऐसे रहते हुए तो बस दोनो ने तय किया कि जीवन के काम ,चिंताएं तो कभी खत्म ही नही होंगी और हमारे आपसी रिश्ते और खराब हो जायेगे यदि हमने कुछ नही किया तो ।

तब से हमने सोचा है बच्चे अपने रूम में ही सोएंगे और हम अपने में क्योंकि वो तो रात को लेट तक भी नहीं सोते फिर हम कब बैठे, बोले । मैं  तब से ही 10 बजे के बाद बच्चों को उनके रूम में भेजती हूं और हम दोनो अपने रूम में फिर जब चाहो सो।कम से कम कुछ समय तो मिलता है अकेले में बैठ कर बोलने का क्योंकि हर बात तो बच्चों के सामने नहीं कर सकते ना। फिर थोड़ा मूड भी बन ही जाता है( हंसते हुए बोलती है)

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           और हां थोड़ा इवनिंग वॉक पर भी जाया कर समीर के साथ ताकि दोनों आपसी मसले सुलझा सको क्योंकि तेरे बेरंग से रिश्तों में रंग भरने का समय आ गया है ।अब लेट किया तो बहुत देर हो जायेगी

           चल अब आज से ही शुरू हो जा ,मैं फोन रखती हूं खाना बनाना है।

           ओके बाय डियर एंड थैंक यू फॉर गुड एडवाइस शेफाली खुश होते हुए बोली

          ( दोनो फोन रख देती हैं)

          पूनम की बातों से शेफाली को थोड़ी तसल्ली मिलती है और सोचती है मुझे ही कुछ करना पड़ेगा क्युकी समीर को तो कुछ पड़ी नही है मेरी। ऐसे रह कर कितनी परेशान हूं वो मैं ही जानती हूं ।समीर से इस बारे में बात करनी पड़ेगी।

       अब एक दो दिनों से  शेफाली  जल्दी जल्दी अपना काम निपटाकर समीर के आने से पहले फ्री हो जाती थी । समीर को भी शेफाली का उसके पास रहना बहुत अच्छा लगता था। बहुत दिनों बाद दोनो थोड़े खुश दिखने लगे थे।

           एक  रात को बच्चों को सुलाने के बाद  शेफाली समीर के रूम में पहुंची  तो समीर भी जगा हुआ था। 

          शेफाली _”सोए नही अभी तक?”

          समीर _”तुम्हारा इंतजार कर रहा था, जो मैं रोज ही करता हूं बस तुम आज आई हो तो तुम्हे लग रहा है कि मैं जाग रहा हूं।”

          शेफाली _”अभी क्या करूं , मुझे नींद आ जाती है पूरा दिन काम करके थक जाती हूं, पर तुम भी तो नहीं आते जगाने मुझे “

          समीर _”नींद तुम्हे ही आती है? मैं भी तो थक जाता हूं पूरे दिन ऑफिस में। फिर भी तुम्हारा इंतजार करता हूं और जब तुम नही आती तो सो जाता हूं।”

          शेफाली_” बस ये ही तो होता है हमारे साथ हम जब भी मिलते है पुरानी बातों को लेकर बैठ जाते हैं और बहस करके , लड़ लड़ाकर, मुंह फुलाकर सो जाते हैं। पर ऐसा कब तक चलेगा समीर। हमारी रोमांटिक लाइफ तो खत्म ही हो गई अब। शादी के जस्ट बाद कितने रोमांटिक होते थे तुम्हे याद है, मेरा मूड बना ही देते थे अपने प्यार से…. कितने रंगीन हुआ करते थे हमारे रिश्ते

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 कहां गया वो प्यार ? वो तुम्हारी मीठे शरारतें या अब मैं अच्छी नही लगती तुम्हें? कहते कहते शेफाली रो पड़ती है।”

          समीर _” अरे यार जो हाल तुम्हारा है वो ही मेरा भी है। पति पत्नी होकर भी मां बाप बनकर रह गए हैं दोनो। हमारे हसीन लम्हे तो कहीं खो से ही गए हैं अब। तुम पास आती नही हो और जब मैं कोशिश करता हुं आने की तो तुम आने नही देती हो। कभी तुम थकी होती हो, कभी बच्चे जागे होते हैं और महीने के 5 दिन तो रिजर्व रहते ही हैं तुम्हारे पीरियड के । अब बताओ मैं क्या करूं?”

           “तुम्हे तो पता है तुम्हारे स्पर्श से ही कितना सुकून मिलता है मुझे  , तुम पास होती हो तो …….बस अब और क्या बोलूं ?”

         ” अब भी बोलता ही रहूं या कुछ करूं भी” और कहकर शेफाली को अपनी बाहों में भर लेता है और दोनो इतने दिनो बाद अपनी मन की बात एक दूसरे से कहते हुए बहुत ही सुकून का अनुभव कर रहे थे। और दोनो ने एक दूसरे का ध्यान रखने का पक्का वादा कर लिया था अब।

         इसके बाद दोनो के घर की कहानी बिलकुल बदल गई अब दोनों रोज नियम से  वॉक पे जाते अपने काम से फ्री होकर, सुबह बच्चों को छोड़ने के बाद दोनो साथ चाय पीते, कभी कभी उनका मूड भी बनने लगा था तो उनकी इच्छा पूर्ति भी हो जाती थी अब ।

         और सास ससुर भी नही थे इन दिनों क्युकी वो चार धाम की यात्रा पर गए थे तो कोई दिक्कत नही थी साथ समय बिताने में अब दोनो को। शेफाली और समीर दोनो खुश और एक्टिव हो  गए थे इन दिनों। सबकी जरूरतें पूरी करते करते कहीं न कहीं दोनो अपनी जरुरते भूल ही गए थे और तनाव युक्त जीवन जी रहे थे पर एक दूसरे का ध्यान रखने की उनकी इस छोटी सी कोशिश ने उनकी जिंदगी के खोए रंग फिर से लौटा दिए जिनकी उनको बहुत जरूरत थी।

          दोस्तों  शेफाली और समीर जैसा दर्द कहीं न कहीं हम सब अपने वैवाहिक जीवन में जरूर महसूस करते हैं जहां बच्चे हो जाने के बाद हमारी लाइफ उन्ही के इर्द गिर्द घूमती है, पति पत्नी की पर्सनल लाइफ तो चली ही जाती है जैसे। घर और बच्चों की लाइफ के बारे में सोचते सोचते अपनी लाइफ भूल ही जाते हैं और कहते है ये तो घर घर की कहानी है पर क्या कभी सोचा है इस कहानी को पैदा किसने किया। अरे भाई हम पति पत्नी हैं तो हमारी भी कुछ जरूरतें होती हैं जिनको बताया नही जा सकता पर पूरी तो करना होता है न और ये कोई शर्म की बात नही कि हम अपने बारे में सोचते हैं, हक है हमारा। जैसे और जरुरते पूरी करना जरूरी है वैसे ही पति पत्नी की शारीरिक जरूरत भी पूरी करना उतना ही जरुरी है जिससे हम मुंह नही मोड़ सकते।ये उनके वैवाहिक जीवन को सफल और तनाव रहित बनाने में बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करता है ये हमे भूलना नहीं चाहिए।और इसमें दोनो की साझेदारी होना भी आवश्यक होना चाहिए ।

          स्वरचित और मौलिक

          धन्यवाद

ये मेरे अपने विचार हैं कहानी को अन्यथा न लें। अगर आपको मेरी रचना पसंद आए तो कृपया कॉमेंट के द्वारा उत्साहवर्धन करना ना भूलें।

स्वरचित और मौलिक

निशा जैन

3 thoughts on “अजनबी जैसा व्यवहार क्यों – निशा जैन : Moral stories in hindi”

  1. बहुत बढ़िया समय की यही मांग है पति पत्नी का रिश्ता अजर अमर रहे इससे बङी पूंजी और कुछ नही है।

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