सुनंदा जी बहुत दिनों से देख रही थी बेटा बहू हर बात पर तकरार करने लगे हैं… ढाई साल ही तो हुए हैं शादी के उपर से तीन महीने की दीया के साथ राशि एकदम परेशान हो जा रही है और निकुंज बात बात पर राशि पर भड़कने लगा है… कितनी बार राशि ने कहा भी ,“ आपको मेरा साथ अच्छा नहीं लग रहा है तो मैं चली जाती हूँ…रहिए अपने घर में अपने कमरे में आराम से।”
तब निकुंज उखड़ते हुए कह देता ,“ हाँ हाँ जाओ ना… मुझे धमकी क्या दे रही हो।”
राशि ये सब सुन कर टूट जाती थी अकेले बैठ कर रो लेती पर बेटी का ख़्याल आते सब सामान्य करने की कोशिश करती साथ ही ये भी ध्यान रखती सासु माँ तक ये सब खबर ना पहुँचे नहीं तो वो क्या सोचेंगी पर सुनंदा जी की अनुभवी आँखें समझ रही थीं कि बेटा बहू के बीच बहुत समय से पहले जैसा प्यार नहीं रह गया है ।
उन्होंने पहले राशि से बात करना सही समझा और वो बेटे के ऑफिस जाते बहू के पास पहुँच गई जो अपनी बेटी को नहा कर तैयार करने में लगी थी।
“ बहू क्या बात है… देख रही हूँ आजकल घर का माहौल बहुत बिगड़ा हुआ है… तुम दोनों एक-दूसरे से या तो बात ही नहीं करते और करते भी हो तो एक दूसरे से खींझते हुए आख़िर बात क्या है?” सुनंदा जी ने पूछा
“ ओहहह आपको भनक लग ही गई मम्मी जी… मैं नहीं चाहती थी आपको ये सब पता चले … निकुंज का व्यवहार मुझे भी खुद समझ नहीं आ रहा…दिन भर सौ काम होते फिर उनकी चिड़चिड़ाहट से मेरा मन भी ख़राब होने लगा है सोच रही हूँ कुछ दिनों के लिए मायके हो आऊँ… पर फिर आप अकेली हो जाएगी ये सोच कर नहीं जा रही… अगर आप कहे तो चली जाऊँ?” राशि ने पूछा
“ बहू तेरी हालत समझ रही हूँ मैं भी पैरों में दर्द की वजह से तेरी ज़्यादा मदद भी नहीं कर पाती… फिर दीया पूरी रात जगाए रखती हैं… तू ऐसा कर अकेले जा सकती है तो चली जा मायके…. वो रमिया को बोल देना हमारे लिए खाना भी बना दिया करेंगी जो पैसे बनते वो ले लेगी… बाकी तू चिन्ता मत करना।” सुनंदा जी बहू की परेशानी समझ कर बोली
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फिर क्या था राशि फटाफट रात तक की तैयारी कर अपनी और बेटी की पैकिंग कर निकल गई…. हाँ सफर ज़रूर पाँच घंटे का था पर मायके जाने की ख़ुशी में सब मंज़ूर कर लिया ।
शाम को निकुंज घर आया तो घुसते ही कहा,“ राशि जरा कड़क चाय पिला दो आज काम कर सिर फट रहा है ।”
कमरे में गया तो बिस्तर साफ़ सुथरा…. दीया का भी सामान नज़र नहीं आ रहे…
“ माँऽऽऽ माँऽऽऽ ये राशि किधर है ?” निकुंज ग़ुस्से में पूछा
“ मायके भेज दिया उसको….।” सुनंदा जी ने इत्मिनान से कहा
“ पर क्यों…?” निकुंज आश्चर्य से पूछा
“ बेटा तुम ही तो कहते रहते थे जाने को तो वो चली गई….अब तुम्हें बता कर क्या ही जाती … कौन सा तुम उससे सीधे मुँह बात कर रहे थे…।” सुनंदा जी निकुंज के प्रति लापरवाही से बोली
“ ये तो कोई बात नहीं हुई…।” कहते हुए राशि को फोन लगा दिया
“ देख लीजिए आपका कमरा बिलकुल आपके हिसाब से छोड़ कर आई हूँ… ना मेरे कपड़े बिखरे हा ना दीया का सामान इधर-उधर फैला है…आप यही तो चाहते थे ना…।” राशि ने कहा
“ हाँ हाँ ठीक है … ।” कह निकुंज ने फ़ोन रख दिया
“ बेटा अब बताओ क्या चल रहा है तुम्हारे दिमाग़ में जो राशि से इतना चिढ़ने लगे हो…?” सुनंदा जी ने पूछा
“ माँ….मुझे अपने कमरे में जरा शांति नहीं मिलती… हर तरफ़ दीया का सामान रहता… रात भर ठीक से सो नहीं पाता… उपर से काम कर के थक जाता हूँ… पहले राशि मुझपे ध्यान भी देती थी अब तो सारा समय बस बेटी पर लगा रहता…पहले मुझे बहुत अच्छा लगता था वो मेरा कितना ध्यान रखती थी……मनपसंद खाना खिलाती थी कपड़े निकाल कर रखती थी पर अब कुछ नहीं करती…बस ये सब देख मुझे ग़ुस्सा आने लगा है ।” निकुंज ने कहा
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“ बेटा… समझ सकती हूँ पर दीया तेरी भी बेटी है…राशि जब तक माँ नहीं बनी थी पत्नी के फ़र्ज़ बख़ूबी निभा रही थी अब वो माँ भी है… उसकी हर छोटी मोटी ज़रूरत राशि ही समझ सकती है… और तुम कोई बच्चे तो हो नहीं…बस थोड़ा सा दीया को गोद में लेकर पुचकार देते हो पिता का फ़र्ज़ बस उतना ही समझते हो… वो रात भर जागती सोती ,तुम बड़बड़ाते रहते ,एक बार भी राशि की मदद करने की सोचते हो… बेटा ज़िन्दगी बच्चे के आने के बाद सिर्फ़ तुम्हारी नहीं पत्नी की भी बदल जाती है … बेटा तुम ऐसे करते रहे ना तो सच में एक दिन राशि छोड़कर चली जाएगी…. दूरियों को जगह मत दो… बात कर हल निकालने की कोशिश किया करो … वो भी इंसान ही है ।”सुनंदा जी ने समझाते हुए कहा
निकुंज कुछ सोचते हुए बोला,“ माँ सच में मैं बस अपने बारे में ही सोच रहा था… राशि के बारे में कभी सोचा ही नहीं.. अब जब गई है तो कुछ दिन रहने देता हूँ पर जब वो वापस आएगी दीया की थोड़ी ज़िम्मेदारी मैं भी उठा लूँगा ।”
“ चल तुझे अक्ल तो आई … अब मेरी बहू से प्यार से बात कर लें… और बहू जाने से पहले खाना भी बना कर गई है…आ कर खा ले।” सुनंदा जी ने कहा
“ राशि यार तुम्हारे बिना रहने की आदत नहीं है….जल्दी से आने की कोशिश करना…. और हाँ मेरे व्यवहार के लिए मुझे माफ़ कर दो… मैं तुमसे पहले की तरह ही सारी उम्मीदें करता रहा ये भूल ही गया कि अब तुम पर पत्नी से ज़्यादा माँ की दोहरी भूमिका निभानी पड़ रही है .. अब से ऐसा नहीं होगा प्रॉमिस ।”निकुंज फ़ोन पर बोला
पता निकुंज कभी कभी मुझे लगने लगा था अब तुम्हें मुझसे पहले सा प्यार नहीं रहा तभी इस तरह व्यवहार करने लगे हो।”राशि ने कहा
“ नहीं राशि बस मुझे यही लग रहा था तुम पहले सा ध्यान नहीं देती… अभी माँ ने भी यही समझाया तभी तो तुम्हें जल्दी आने बोल रहा हूँ ।” कुछ देर बात कर निकुंज ने फोन रख दिया
दस दिन बाद जब राशि घर आई सुनंदा जी के चेहरे पर अब संतोष के भाव दिख रहे थे कभी-कभी दूर जाकर भी एक दूसरे को समझा जा सकता है…. जो पास रह कर नहीं समझ पाते।
दोस्तों अब तो समय और बदल रहा है… अब तो हर लड़की चाहती है उसका पति हर कदम पर उसको सहयोग करें जैसे वो करती है…. पर कुछ पति समझना ही नहीं चाहते और ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न हो जाती हैं ।
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धन्यवाद
रश्मि प्रकाश
VM